Top 5 Dalit news: सनातन धर्म को मानने के नाम पर दलितों और पिछड़ो को बहिष्कृत करार देकर अलग थलग करने की कोशिशें अभी भी जारी है। लेकिन अगर उनके लिए कोई आवाज उठाने वाले को सरकार पूछने लग जाती है तो यहीं मनुवादियों के पेट में दर्द होने लगता है। तब दलित उन्हें सनातन विरोधी कहते है। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बतायेंगे, जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है।
ग्वालियर में बन रहे अंबेडकर धाम के विरोध में विवादित वकील
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला मध्य प्रदेश के विवादित वकील अनिल मिश्रा को लेकर है.. अक्सर दलितों और पिछड़ो को लेकर विकृत बयान देने वाले वकील अनिल मिश्रा कई बार संविधान शिल्पीकार बाबा साहब अंबेडकर का अपमान कर चुके है, लेकिन एक तरफ यूपी की सरकार ने करोड़ो रूपय खर्च करके बाबा साहब के मूर्तियों का रखरखाव करने का फैसला लिया गया है तो वहीं अब मध्य प्रदेश के ग्वालियर के डबरा के जौरासी में करीब 200 साल पुराने हनुमान मंदिर के पास 45000 वर्ग फुट पर 20 cr रूपए की लागत से भव्य अंबेडकर धाम बनाया जा रहा है.. लेकिन अब इसे लेकर अनिल मिश्रा ने विरोध जताते हुए कहा कि सरकार का ये फैसला सनातन धर्म के विरोध में है।
ये केवल सरकार की स्वर्णों को कमजोर करने की एक नीति है। जबकि बाबा साहब को मानने वाले ज्यादातर तो हिंदू धर्म को मानते ही नहीं है। ये हिंदूओ की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है, इस पर रोक लगतनी चाहिए। ये अंबेडकर धाम नहीं बल्कि एक सनातनी धर्मशाला होना चाहिए। वैसे अनिल मिश्रा बाबा साहब से जुड़ी किसी भी अपलब्धि से कब खुश नहीं हो सकता.. लेकिन सरकार के इस फैसले पर आपका क्या कहना है।
बिहार में दलितों की स्थिति पर बड़ा खुलासा
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला बिहार से है, जहां एससी-एसटी उत्पीड़न निवारण समिति के मुख्य सचेतक कुमार सर्वजीत ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि नामी दलित नेता होते हुए भी राज्य में पिछले कुछ महीनों में दलित उत्पीड़न के मामले कमने के बजाय बढ़े है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और चिराग पासवान को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि आपको जानकर हैरानी होगी कि केवल गया जिले में ही 63 ऐसे थाने है, जहां दलित अधिकारी तक नहीं है.. जो केवल इस बात का सबूत है कि सरकार को भी दलित अधिकारियों पर भरोसा नहीं है। बाकि के जिलों की सूची तो अभी जारी ही नहीं हुई है।
उन्होंने आगे एक और खुलासा करते हुए कहा कि 300 एससी एसटी मामलो को निपटान करने की सूचि मिली थी लेकिन उसमें से 100 से ज्यादा तो पासवान समाज वाले ही थे.. यानि की पासवान समाज के नेता होते हुए भी उनका उत्पीड़न कम नहीं हुआ है। सच तो ये है कि दलितो को उनके पूर्ण अधिकार तक नहीं दिये गए है.. उन्हें जिम्मेदारियों से वंचित रखा गया है.. और फिर बाद में कह दिया जायेगा कि आरक्षण से पद मिला था..लेकिन काम नहीं किया। और उनके अधिकारों का लगातार हनन होता रहेगा। बिहार के जिले में दलितो की स्थिति और वहां बढ़ते हुए मामलो को लेकर आपका क्या कहना है। क्या वहां वाकई में जानबूझ कर सरकार दलितों की अनदेखी कर रही है। हमें कमेंट करके जरूर बतायें।
दलित युवक की सीवर साफ करते हुए मौत
3, दलितो से जुड़ा अगला मामला राजधानी दिल्ली से है, जहां एक दलित सफाई कर्मचारी अपनी 2 महीने की बकाया मेहनताना लेने गया था, लेकिन पहले तो उसे जबरन सीवर की सफाई करने को कहा गया.. और फिर बिना सुरक्षा के सीवर में उतरने के कारण उसकी दर्दनाक मौत हो गई। ये घटना दिल्ली के दिलशाद गार्डन की है, जहां 30 मार्च को मृतक राहुल बेद जो कि वाल्मिकी समाज से आता था, वो कॉन्ट्रैक्ट पर सफाई कर्मचारी के तौर पर काम कर रहा था, लेकिन जब वो 2 महीने का बकाया लेने गया तो उसे पहले ताहिरपुर में 8 से 10 फ़ीट गहरे नाले की हाथ से सफ़ाई करने को कहा गया।
मजबूरी में पीड़ित सफाई करने चला गया लेकिन काफी देर तक कोई हलचल नहीं दिखी तो बचाव दल को बुलाया गया, राहुल को बाहर निकाल कर गुरु तेग बहादुर अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी, राहुल की मौत हो गई थी, वहीं अब इस मुद्दे पर दलित आदिवासी शक्ति अधिकार मंच ने भी पीड़ित परिवार के लिए आवाज उठाते हुए कहा कि पहले लापरवाही की गई, और जब राहुल की मौत हो गई तब भी उसके परिवार को जानकारी नहीं दी गई।
यहां तक कि मौत होने के बाद उसके शव को पूरी तरह से साफ सुथरे कपड़ो में लाया गया। जिससे पता चलता है कि सबूतो से छेड़छाड़ की गई.. वहीं पीड़ित परिवार से मिलने के लिए भी कोई अधिकारी नहीं पहुंचा.. यहां तक कि परिवार को अब तक मुआवजा भी नहीं मिला है,, और न ही किसी के खिलाफ कोर् कार्यवाही हुई है। ऐसे में पुलिस प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे है कि क्या दलित होने के कारण राहुल की जान की कोई कीमत नहीं थी.. क्या पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा।
नगीना लोकसभा के क्षेत्रों में सांसद आजाद का एक्शन
4, दलितो से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ को लेकर है.. जो लगातार सरकारी अधिकारियों की रातों की नींद और दिन का चैन उड़ाये हुए है। वो रोजाना अलग अलग क्षेत्रों में अधिकारियों के साथ बैठके कर रहे है और विकास के कार्यो से लेकर बेसिक जरूरतें पूरी करने तक के तीखे सवाल कर रहे है। इसी कड़ी में उन्होंने नगीना लोकसभा की कीरतपुर नगर पालिका में सड़को और नालियों की स्थिति को लेकर अधिकारियों की बोलती बंद कर दी है।
आजाद ने सीधे तौर पर अधिकारियों से कहा कि जिस काम से जनता खुश नहीं है, संतुष्ट नही है तो फिर वो काम करना ही क्यों। आजाद पिछले कई दिनों से नगीना लोकसभा के कई क्षेत्रों में अवलोकण कर रहे है और वहां पर व्यवस्था की हाल देखकर उन्होंने अलग ही रूप दिखाया है। आजाद को इस तरह से देखकर दलित समुदाय के लोग 2027 में उनके सीएम बनने की उम्मीद भी कर रह रहे है.. ऐसे में देखना ये होगा कि क्या आजाद वाकई में सीएम योगी आदित्यनाथ को टक्कर देने लायक हो चुके है.. आपकी इस पर क्या राय है हमें कमेंट करके जरूर बतायें।
सपा कार्यकर्ता मे दी दलित छात्र को धमकी
5, दलितो से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के लखनऊ से है, जहां समाजवादी पार्टी से खिलाफ पोस्टर लगाने वाले यूथ अगेंस्ट माफिया’ संगठन से जुड़े एक दलित छात्र ने सपा कार्यकर्ता पर जान से मारने की धमकी देने का आऱोप लगाया है। पीड़ित छात्र लखनऊ विश्वविद्यालय में पढ़ता है और यूथ अंगेस्ट माफिया से जुड़ा हुआ है, लेकिन अखिलेश यादव के अगेंस्ट में पोस्टर लगाने को लेकर उसे फोन पर अज्ञात व्यक्ति से जान से मारने की धमकी देते हुए काफी गालिंयां भी दी। पीड़ित छात्र ने लखनऊ के हसनगंज थाने में शिकायत भी दर्ज करानी चाही, लेकिन उल्टा पुलिस ने पीड़ित को ही उल्टा साधी कहते हुए थाने से बाहर निकाल दिया।
छात्र ने सपा कार्यकर्ता एसके सिंह पर संगीन आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने छात्र को जातिसूचक गालियां दी थी.. जिसके बाद पीड़ित छात्र सीएम योगी आदित्यानाथ से न्याय और सुरक्षा की मांग कर रहा है। बता दें कि यूथ अगेंस्ट माफिया संगठन कुछ दिनों पहले कुछ पोस्टर लगाये थे जिसमें सपा राज को धुरंधर के ल्यारी से तुलना करते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ को धुरंधर सीएम कहा था, जिससे सपा कार्यकर्ता नाराज हो गए.,और दलित छात्रों को धमकी दी गई। अब देखना ये होगा कि सरका इन मुद्दो पर अब क्या प्रतिक्रिया देती है।



