Top 5 Dalit News: अगर दलितों के लिए सम्मान चाहिए तो जरूरी है कि उन्हें केवल एक छोटे से समाजिक स्तर पर ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी प्रेजेंट करना जरूरी है। लेकिन हैरानी की बात है कि अगर कोई पिछड़े और वंचितो के हक की लड़ाई को वैश्विक स्तर पर लड़ने के लिए कोशिश करता है तो उन्हें ही दबाने की कोशिश की जाती है, तो भला कैसे दलित मजबूत होंगे। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाली घटनाओं के बारें में बताएँगे जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है।
नगीना सांसद ने अमेरिका में बढ़ाया दलितों का मान
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला नगीना के सांसद और दलितो के नए मसीहा चंद्र शेखर आजाद की उस उपलब्धि को लेकर है, जब उन्होंने बाबा साहब की जयंति के मौके पर अमेरिका जाकर बाबा साहब की मूर्ति का अनावरण किया, साथ ही एक लाइब्रेरी का भी उद्घाटन किया है, आजाद की ये उपलब्धि भारत के दलित और पिछड़ो की बढ़ती शक्ति को दर्शाती है। तो वहीं आजाद की बढ़ती लोकप्रियता उन्हें बदनाम करने वालों को कुछ ज्यादा ही चुभने लगी है। चंद्र शेखर आजाद पर धोखेबाजी का आरोप लगाने वाली उनकी कथित एक्स प्रेमिका रोहिणी घावरी ने फिर से आजाद को निशाना बनाते हुए एक संगीन आरोप उनकी जाति पर लगाया है।
घावरी ने ऐलान किया कि आने वाले समय में घावरी की हत्या हो सकती है और ये हत्या एक दिन चमार ही करवायेंगे.. घावरी ने कहा कि पिछले 75 सालों से जाटव समाज खुद को कमजोर दिखा कर लोगो की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रहे है जबकि अब घावरी ने उनका पर्दाफाश करना शुरु कर दिया है.. वहीं घावरी ने ये भी घोषणा की कि गैर जाटव की तरक्की में सबसे बड़ी बाधा जाटव ही है, इसलिए अब जरूरी है कि जाटवो को पूरी तरह से अलग थलग कर दिया जायें, तभी बाकि पिछड़े समुदाय का विकास हो सकेगा। अब देखना ये होगा कि घावरी के इस ऐलान के बाद क्या आजाद की छवि को इससे नुकसान होगा।
नागपुर में दलित महिला ने की आत्महत्या की कोशिश
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला महाराष्ट्र के नागपुर से है, जहां एक दलित महिला ने वाजार डैम में कूद कर आत्महत्या की कोशिश करते हुए बचाया गया है। ये मामला नागपुर ग्रामीण के परातवाड़ा का है, 26 साल की दलित महिला की ये सातवी आत्महत्या की कोशिश थी। पीड़िता के मुताबिक वो एक युवक के साथ रिश्ते में थी.. आरोपी युवक ने पीड़िता को कई बार शादी का झांसा देकर उसका बलात्कार किया था, लेकिन जब पीड़िता ने उससे शादी के लिए कहा तो वो मुकर गया।
जिसके कारण पीड़िता ने पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद पुलिस के सामने उसने फिर से शादी करने की बात स्वीकार की थी, लेकिन रिहा होते ही वो वापिस अपनी हरकतों पर उतर आया…जिससे आहत होकर महिला ने अब तक कई बार खुदकुशी की कोशिश कर ली है। ग्रामीण एलसीबी पीआई किरण वानखेड़े ने बताया कि महिला की हालत अभी ठीक है, तो वहीं पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी है। अब देखना ये होगा कि क्या महिला को न्याय मिल पायेगा।
बैंगलुरू में दलित महिलाओ की स्थिति बदतर
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला कर्नाटक के बैंगलुरु से है, जहां दलित महिलाओं के रोजगार को लेकर बेहद चौंकाने वाला आकड़ा सामने आया है। जी हां, ‘भू ओडेताना’ योजना का अवलोकर करने के दौरान । बिहार की संस्था ‘ट्रांस-रूरल कंसल्टिंग’ ने पाया कि कर्नाटक मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन अथॉरिटी (KMEA) द्वारा लागू की गई ये योजना भले ही दलित महिलाओं को खेती के लिए जमीन दे रही है लेकिन केवल नाम के लिए.. क्योंकि आकड़े बताते है कि अभी भी 10 में से 6 दलित महिलायें दूसरों की ज़मीन पर खेतिहर मज़दूर की तरह काम करती है।
आकड़ो के अनुसार जमीन के लिए आये 11,039 आवेदन में से केवल 2,270 महिलाओं को ज़मीन मिली है.. यानि की 50 प्रतिशत भी नहीं है। ये वो महिलाये है जिनकी मासिक आय 5000 रूपय भी नहीं है। यानि की बात साफ है राज्य में दलित महिलाओं के उत्थान, उनके विकास की चर्चा तो काफी जोरो शोरो से होती है लेकिन उन्हें लाभ निल बटे जीरो ही मिल रहा है.. दलितो के भले की कहानी केवल वोटबैंक बढ़ाने तक ही है, वहीं आकड़ो के अनुसार जमीनों पर भू माफियाओं की भी नजर रहती है, जिसके कारण जिन्हें उनका हक मिलना चाहिए.. उनके ही वंचित रह जाता है तो भला कैसे दलित आर्थिक रूप से शसक्त होंगे.. और कौन करेगा उनकी मदद।
तेलंगाना की सतावहना यूनिवर्सिटी में दलित प्रोफेसर का बहिष्कार
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला तेलंगाना की सतावहना यूनिवर्सिटी में दलित प्रोफेसर के साथ हो रही नाइंसाफी को लेकर है, जहां उन्हें कुछ छात्रों ने बदनाम करने के लिए “शहरी नक्सल” होने का आरोप लगाया तो वहीं इस मुद्दे पर सतावहना यूनिवर्सिटी के उच्च अधिकारी उनकी मदद करने के बजाय प्रोफेसर का ही सामाजिक बहिष्कार कर रहे है। पीड़िता समाजशास्त्र विभाग की प्रमुख प्रोफेसर सुजाता सुरेपल्ली ने बताया कि खुद वाइस चांसलर यू उमेश कुमार ने ही यूनिवर्सिटी के छात्रो को उनके बात न करने की चेतावनी दी है। इतनी ही नहीं यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार के पद पर प्रमोशन भी रोक दिया गया, जबकि वो सबसे ज्यादा हकदार थी।
इस बहिष्कार से वो मानसिक रूप से काफी आहत हो गई है। वीसी ने सुजाता की एक एक गतिविधि पर नजर रखने के लिए उन पर 24 घंटे सर्विलांस लगा दिया है.. जिसने उनकी प्राइवसी को पूरी तरह से भंग कर दिया। बता दें कि सुजाता ने 2019 में एक प्रोफेसर द्वारा किसी छात्र के साथ दुर्व्यावहार के खिलाफ आवाज उठाई थी, तभी से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है, लेकिन अब हद पार हो गई है। उन्हें सीधे तौर पर शहरी नक्सली कहा जा रहा है। उन्होंने अपने साथ हो रहे अत्यातार और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हुए प्रशासन से कोई कड़ा कदम उठाने की गुहार लगाई.. ताकि कोई अनहोनी न हो। अब देखना ये होगा कि पुलिस का क्या रवैया होता है और कैसे सुजाता को न्याय मिलता है।
कन्नूर जिले में दलित छात्र की आत्महत्या का मामला बिगड़ा
5, दलितों से जुड़ा अगला मामला केरल के कन्नूर जिले से है, जहां जातिगत भेदभाव से तंग आकर आत्महत्या करने वाले दलित छात्र की मौत के बाद भी कॉलेज प्रशासन की तरफ से होने वाली ढिलाई को लेकर आखिरकार दलित संगठन का गुस्सा फूट पड़ा। दलित संगठन ने अंचरककंदी डेंटल कॉलेज में विभागाध्यक्ष डॉ॰ राम द्वारा नितिन राज का कथित रूप से जातीय आधार पर उत्पीड़न किये जाने के सबूत मिलने के बाद भी कोई कार्यवाई या गिरफ्तारी न किये जाने को लेकर कॉलेज के बाहर धरना प्रदर्शन किया।
इतना ही नहीं दलित संगठन ने ये भी ऐलान किया कि अगर आरोपी के खिलाफ जल्द से जल्द उचित कार्यवाई नहीं होती तो राजधानी तिरुवनंतपुरम में बड़े स्तर पर धरना-प्रदर्शन किया जायेगा। हैरानी की बात है कि दलित छात्र खुद अवसाद में था, लेकिन उसकी मदद करने के बजया उल्टा उसे अपमानित किया जा रहा था, और जब छात्र ने आत्महत्या जैसा संगीन कदम उठा लिया तो अब कॉलेज प्रशासन उल्टा उसे ही आरोपी बता रहा है. ऐसी संस्थाओं पर हर हाल में ताला लगना चाहिए।



