Dr. B.R. Ambedkar’s Gurus: यह तो हम सभी जानते हैं कि बाबा साहब ने सामाजिक सुधार के बहुत से कदम उठाए थे। उनका पूरा जीवन कमजोर पिछड़े दलित के उत्थान और उनके हितों की रक्षा के लिए समर्पित था वह बचपन से ही एक मेधावी छात्र थे लेकिन अपनी शिक्षा को केवल आय का एक साधन बनाने की वजह उन्होंने इसका उपयोग सामाजिक तौर पर लोगों को जागरूक करने उन्हें मजबूत करने के लिए किया था।
मगर इस संघर्ष इस लड़ाई की प्रेरणा कहां से मिली थी कौन थे उनके गुरु जिनके रास्ते पर चलकर बाबा साहब अंबेडकर संविधान निर्माता भारत रत्न और दलितों के महान मसीहा बन पाए। अपने इस लेख में हम जानेंगे कि आखिर कौन थे बाबा साहब के गुरु। जिनका बाबा साहब की जिंदगी पर काफी ज्यादा प्रभाव रहा। बाबा साहब के वह तीन महान गुरु जिन्होंने बाबा साहब को प्रेरणा दी समानता और सम्मान का जीवन जीने के लिए।
बाबा साहब के पहले गुरु – Gautam Buddha
बाबा साहब ने अपने जीवन काल में कई महान और समाज को तंज कसने वाली किताबे लिखी है..लेकिन बाबा साहब ने अपने संघर्षों को आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए अपनी आत्मकथा भी लिखी, जिसमें उन्होंने खुद बताया कि वो जैसे है, जो भी है उसके लिए 3 लोगो का योगदान अहम रहा है। अपनी आत्मकथा ‘मेरी आत्मकथा, मेरी कहानी, मेरी जुबानी’ में बाबा साहब ने अपने जीवन पर गहरे प्रभाव के लिए तीन लोगो का जिक्र किया है। उन्होंने स्वयं ये माना है कि उनके आध्यत्म और सामाजिक सुधारो को लेकर जो भी सोच है वो प्रेरणा उन्हें तीन महान समाज सुधारक, आध्यात्मिक संत बुद्ध, कबीर दास और ज्योतिबा रावल फूले से मिली थी।
बौद्ध धर्म और गौतम बुद्ध के प्रति उनका लगाव
बाबा साहब ने अपनी आत्मकथा में कहा है बौद्ध धर्म और गौतम बुद्ध के प्रति उनका लगाव कहीं न कहीं बचपन से ही रहा था। बाबा साहब ने बताया कि जब वो छोटे थे, तब उनके पिता जी के परम मित्र थे बौद्ध धर्म और बुद्दा कों चरित्र अपने शब्दों में पिरोने वाले दादा केलुस्कर ने पहली बार छोटे से बाबा साहब के व्यक्ति पर गहरा प्रभाव डाला था। केलुस्कर यानि की कृष्ण राव अर्जुन केलुस्कर वैसे तो ब्राह्मण जाति से थे लेकिन उन्होंने जाति पाति के बंधनो को तोड़ कर बाबा साहब अंबेडकर को शिक्षा और सामाजिक न्याय के प्रति प्रोत्साहित किया था, उन्होंने ही बाबा साहब को पहली बार बुद्ध पर लिखी उनकी किताब गौतम बुद्ध चरित्र भेंट की थी।
बुद्ध धर्म आखिर क्यों इतना प्रभावशाली
इस किताब गको पढ़ कर पहली बार बुद्ध ने जाना था कि बौद्ध धर्म कितना महान धर्म है। उन्हें समझ आया कि बुद्ध धर्म आखिर क्यों इतना प्रभावशाली हुआ था। वो समझ पाये कि बौद्ध धर्म में जातिगत भेदभाव के लिए कोई स्थान नहीं है, यहां कोई उंच नीच जातपात नहीं है.. सब एक समान है। जो मनुष्य को मनुष्य के भांति समझता है, जहां कोई छोटा और बड़ा नहीं है। बुद्ध चरित्र पढ़ने के बाद उन्हें पहली बार अहसास हुआ जो धार्मिक धर्म ग्रंथ है, वो केवल बांटने का काम करते है, और उनका रामायण, महाभारत, ज्ञानेश्वरी, मनुस्मृति जैसे ग्रंथो से उनका भरोसा ही उठ गया।
उन्होंने बोद्ध धर्म को मानसिक रूप से अंदर ही अंदर अपना लिया था, वो बौद्ध धर्म को और करीब से जानने के लिए उन पर रिसर्च करने लगे थे। वो इस बात को समझ पाये कि केवल बौद्ध धर्म की भारत में जीवन जीने का सही तरीका है, और वो बुद्ध के अनुयायी बन गए और उन्हें अपना पहला गुरू मानने लगे, हालांकि बौद्ध धर्म अपनाने से पहले बाबा साहब ने उसका भी गहन अध्ययन किया तभी उन्होंने बौद्ध धर्म के 22 प्रतिज्ञाओं को लिया था।
बाबा साहब के दूसरे गुरु – Sant Kabir Das
बाबा साहब के दूसरे गुरु थे महान संत कबीर दास जी। बाबा साहब को की बार गांधी जी को महात्मा न बुलाने पर आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था, लेकिन वो गांधी को कभी भी महात्मा मानते ही नहीं थे। उन्होंने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि जिसे महात्मा का सही अर्थ जानना है उन्हें कबीरदास को समझना चाहिए, जिनमें जरा भी भेदभाव की एक अंश मात्र भी नही था। कबीर दास जी ने न केवल जाति व्यवस्था, छुआछूत, अंधविश्वास का खंडन किया था बल्कि वो समाजिक असमानता मुक्त समाज चाहते थे।
कबीर की नजरो में हर एक मनुष्य एक समान है। कबीर न तो वेदों को मानते थे और न ही ब्राह्मणो की बनाई नीतोयों को.. जो बाबा साहब को काफी प्रेरित करते थे। वो मूर्ति पूजा करके ईश्वर को बांटने के बजाये निर्गुणवाद को बढ़ावा देते थे। बाबा साहब का परिवार खुद कबीरपंथी था इसलिए उन्हें बचपन से कबीर को करीब से जानने का मौका मिला था।
बाबा साहब के तीसरे गुरु – Jyotiba Rao Phule
ज्योतिबा राव फूले, जिन्हें शायद ही कोई हो, जो न जानता हो.. उन्होनें महिलाओ की शिक्षा, दलित और शोषणि वर्ग के लिए समान शिक्षा से लेकर सामाजिक सुधारो की दिशा में जो कार्य किया था उससे बाबा साहब काफी प्रभावित थे। बाबा साहब मानते थे कि समाज को मजबूत बनाने के लिए महिलाओं का सम्मान औऱ उनकी शिक्षा जरूरी है जिसकी शुरूआत ज्योतिबा फूले ने की थी। बाबा साहब ने अपनी किताब शूद्र कौन है.. अपने गुरु ज्योतिबा राव फूले को समर्पित की थी। शोषित वर्ग को स्वालंबी और आत्मनिर्भर बनाने के लिए फूले का उठाया कदम ही बाबा साहब को उनका कायल कर गया था। ये थे वो तीन गुरु जिन्होंने बाबा साहब के जीवन पर गहरा प्रभाव डाला था, इनके विचार आज भी समाजिक बदलाव में अहम साबित होते है। बाबा साहब के गुरुओं को आज पूरा दलित समाज नमन करता है।



