Satavahana University news: हाल ही में, तेलंगाना विश्वविद्यालय (Telangana University) से एक चौंकाने वाली और दुखद खबर सामने आई है। एक दलित महिला प्रोफेसर के साथ दुर्व्यवहार किया गया; यही नहीं, छात्रों को उनसे बात करने से भी रोक दिया गया। इस घटना से गहरे आहत होकर, पीड़ित महिला प्रोफेसर ने न्याय की गुहार लगाई है।
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यूनिवर्सिटी में दलित प्रोफेसर का बहिष्कार
आजकल, सच के समर्थन में आवाज़ उठाना भी बेहद मुश्किल हो गया है। अगर कोई सच के लिए बोलता है, तो उसे समाज से अलग कर दिया जाता है; कोई उससे बात तक नहीं करता। इसके अलावा, अगर वह किसी सरकारी पद पर है, तो उसका प्रमोशन रोक दिया जाता है और उसके साथ भेदभाव किया जाता है। ऐसी ही एक खबर तेलंगाना (Telangana) की सतावहना यूनिवर्सिटी (Satavahana University) में दलित प्रोफेसर (Dalit Professor) के साथ हो रही नाइंसाफी को लेकर है, जहां उन्हें कुछ छात्रों ने बदनाम करने के लिए “शहरी नक्सल” होने का आरोप लगाया तो वहीं इस मुद्दे पर सतावहना यूनिवर्सिटी के उच्च अधिकारी उनकी मदद करने के बजाय प्रोफेसर का ही सामाजिक बहिष्कार कर रहे है।
पीड़िता समाजशास्त्र विभाग (Department of Sociology) की प्रमुख प्रोफेसर सुजाता सुरेपल्ली ने बताया कि खुद वाइस चांसलर यू उमेश कुमार ने ही यूनिवर्सिटी के छात्रो को उनके बात न करने की चेतावनी दी है। इतनी ही नहीं यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार (University Registrar) के पद पर प्रमोशन भी रोक दिया गया, जबकि वो सबसे ज्यादा हकदार थी।
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छात्र के साथ दुर्व्यावहार के खिलाफ उठाई आवाज
इस बहिष्कार से वो मानसिक रूप से काफी आहत हो गई है। वीसी ने सुजाता की एक एक गतिविधि पर नजर रखने के लिए उन पर 24 घंटे सर्विलांस लगा दिया है.. जिसने उनकी प्राइवसी को पूरी तरह से भंग कर दिया। इतना ही नहीं सुजाता ने बताया कि उसके कमरे के पास cctv कैमरे तक लगा दिए गए है और अत्यधिक निगरानी की जा रही है। बता दें कि सुजाता को उनके सहकर्मी, असिस्टेंट प्रोफेसर पेंचला श्रीनिवास ने निशाना बनाया था, जिनके खिलाफ 2019 में यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई थी। तभी से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। वही विश्वविद्यालय द्वारा गठित एक समिति ने 23 मार्च, 2019 को उन्हें दोषी पाया और एक ज्ञापन जारी किया।
न्याय के लिए लगाई गुहार
लेकिन अब हद पार हो गई है। उन्हें सीधे तौर पर शहरी नक्सली कहा जा रहा है। उन्होंने अपने साथ हो रहे अत्यातार और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हुए प्रशासन से कोई कड़ा कदम उठाने की गुहार लगाई.. ताकि कोई अनहोनी न हो। जिसके बाद सुजाता के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए, ‘सेव एजुकेशन कमेटी’ ने तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। कमेटी के अध्यक्ष और सचिव के तौर पर कार्यरत प्रोफ़ेसर के. चक्रधर राव, जी. हरगोपाल और के. लक्ष्मीनारायण ने कहा, “सभी आवश्यक योग्यताएं और अनुभव होने के बावजूद, एक दलित महिला प्रोफ़ेसर के तौर पर अपनी सारी जिम्मेदारियां निभा रही हैं उनको उनके पद से हटाना एक बदले की भावना से किया गया कृत्य है।” अब देखना ये होगा कि पुलिस का क्या रवैया होता है और कैसे सुजाता को न्याय मिलता है।



