Bihar News: हाल ही में बिहार के पटना से खबर आई, जहां पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने बाबा साहेब की जयंती पर एक बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि दलितों की समस्याओं को सुलझाने और जातिगत भेदभाव खत्म करने के लिए हर महीने गरीब चौपाल लगनी चाहिए। जिसमें कई बड़े नेता भी शामिल थे। इतना ही नहीं, उन्होंने महिला आरक्षण और शराबबंदी नीति को लेकर भी सरकार की आलोचना की।
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जीतनराम मांझी का बड़ा ऐलान
कई बड़े नेता अक्सर दलितों के खिलाफ भेदभाव खत्म करने के बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन बाद में वे सिर्फ खोखले वादे ही साबित होते हैं। ऐसी ही खबर बिहार के पटना से है, जहां दलितो की समस्याओं को सुनने के लिए पूर्व सीएम और केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी (Former CM and Union Minister Jitan Ram Manjhi) ने हर जिले में ‘गरीब चौपाल’ लगाने की घोषणा की है।
इसकी जानकारी खुद हम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष कुमार सुमन (HAM Party National President Santosh Kumar Suman) ने श्रीकृष्ण मेमोरियल हाल (Sri Krishna Memorial Hall) में आयोजित आंबेडकर जयंती समारोह (Ambedkar Jayanti celebrations) में दी। उन्होंने कहा कि गरीब चौपाल का उद्देश्य केवल दलितों और वंचितो को न्याय दिलाना ही नहीं होगा बल्कि शिक्षा में समानता और राजनीतिक भागीदारी की दिशा में काम किया जायेगा।
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जातिगत भेदभाव को खत्म करने का प्रयास
इस चौपाल के जरिए जातिगत भेदभाव को खत्म करने का प्रयास किया जायेगा..ताकि सामाजिक न्याय स्थापित हो। जीतनराम मांझी खुद के दलित परिवार से आते है, जो कि दलितो के एक मुख्य चेहरा भी है, उनकी ये घोषणा अगर सही मायने में धरातल पर उतरी तो उम्मीद है कि बिहार में दलित उत्पीड़न और जातिगत भेदभाव के मामलो में कुछ तो गिरावट आयेगी।वैसे आपको क्या लगता है कि क्या इस चौपाल से कुछ होगा या ये केवल वोटर्स को लुभाने मात्र के लिए हथकंडा है।
इसके अलावा, उन्होंने बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की शराबबंदी पॉलिसी (Prohibition policy) का रिव्यू करने की भी मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि महिला आरक्षण बिल, जिसके 2023 में पास होने की उम्मीद है, के लिए महिलाओं की भागीदारी पक्का करने के लिए डिलिमिटेशन ज़रूरी था।



