क्या कहती है BNS की धारा 248, जानें इससे जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण बातें

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248 BNS in Hindi – भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 248 मुख्य रूप से चोट पहुँचाने के इरादे से झूठा आरोप लगाने से संबंधित है। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस में इसके के बारे में क्या कहा गया है।

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धारा 248 क्या कहती है? BNS Section 248 in Hindi

जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस की धारा 248 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 248 उन व्यक्तियों को दंडित करती है जो जानबूझकर किसी अन्य व्यक्ति को हानि पहुँचाने के उद्देश्य से उनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करते हैं या झूठे आरोप लगाते हैं, जबकि उन्हें पता होता है कि उन आरोपों या कार्यवाहियों का कोई असली या वैध कारण नहीं है।

BNS 248 Important Points

  • किसी को जानबूझकर चोट पहुँचाने का इरादा रखना।
  • इस बात का ज्ञान होते हुए कि किसी आरोप या कानूनी कार्रवाई का कोई सच्चा आधार नहीं है।
  • उस व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामला शुरू करना या गलत आरोप लगाना।
  • “गलत आरोप” से तात्पर्य है कि किसी अपराध के होने का झूठा बयान देना।
  • इस धारा के अनुसार यह एक असंज्ञेय (Non-cognizable) अपराध है (यानी पुलिस बिना वारंट के गिरफ्तार नहीं कर सकती)।

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बीएनएस धारा 248 की और सजा

इसके अतिरिक्त, बीएनएस (BNS) की धारा 248 के तहत, यदि किसी व्यक्ति को दोषी ठहराया जाता है, तो उसके लिए सजा निर्धारित की गई है। यदि झूठा आरोप किसी ऐसे अपराध से संबंधित है, जिसके लिए मृत्यु दंड, आजीवन कारावास, या 10 साल या उससे अधिक की सजा का प्रावधान नहीं है, तो दोषी को 5 वर्ष तक की कैद, दो लाख रुपये तक का जुर्माना, या फिर दोनों तरह की सजा का सामना करना पड़ सकता है।

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