Top 5 Dalit news: दलितों को राजनीति करने का मौका मिले तो पूरे के पूरे देश को चलाने का ओहदा रखते है, बावजूद इसके दलितों को नाकाबिल समझने वालों की कमी नहीं है.. खुद से उन्हें नीच और कमजोर समझने की इसी गलती के कारण आज भी दलितों की स्थिति में कोई खास सुधार नहीं आ है। तो चलिए आपको इस लेख पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाली घटनाओं के बारें में जानेंगे जो इस सच को उजागर करते है कि जातिवादियों ने कभी भी नहीं चाहा कि दलित सत्ता हासिल करें।
भीम आर्मी चीफ की लोकप्रियता में लगे चार चांद
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को लेकर है, जो आगामी यूपी विधानसभा चुनावों में तख्ता पलट करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे है तो वहीं काबिलियत के कारण अब दूसरी पार्टी के लोग भी उनसे भारी संख्या में जुड़ रहे है, इसी कड़ी में एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है.. समाजवादी पार्टी के मजबूत स्तंभ माने जाने वाले और युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय नेता डॉ. हिरदेश कुमार पाल ने आखिरकार सपा की साइकिल से उतरकर आसपा का दामन थाम लिया है। ये फेरबदल एक तरफ सपा के लिए बड़ा नुकसान साबित होने वाला है तो वहीं आसपा की ताकत कई गुणा बढ़ गई है।
बता दें कि डॉ. हिरदेश कुमार पाल सपा युवजन सभा के राष्ट्रीय सचिव भी थे, और पाल बिरादरी और ओबीसी वर्ग में उनकी मजबूत पकड़ भी रही है, वहीं खबरें आ रही है कि अब पाल से दातागंज विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे। पाल से आसपा में आने से दलित ओबीसी गठबंधन की नींव मजबूत होगी.. जो सत्ता परिवर्तन में अहम भूमिका निभाने वाले है। सपा को काफी बड़ा नुकसान हुआ है, देखना ये होगा कि पाल का आसपा में आना सपा की तिलमिलाहट को कितना बढ़ाता है और कौन सा बड़ा सत्ता परिवर्तन आजाद लेकर आने वाले है।
संतकबीरनगर में दलित युवक की निर्मम हत्या
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला यूपी के संतकबीर नगर से है। एक तरफ यूपी पुलिस ने आकड़े बतायें कि दलित उत्पीड़न में यादव और मुससिम समुदाय आगे है तो वहीं एक और दलित युवक की एक मुसलमान ने दिनदहाड़े सरेआम गला रेत कर हत्या कर दी.. लेकिन प्रशासन अब भी हाथ पर हाथ धरे बैठा है। इस सनसनीखेज घटना को संतकबीरनगर के बखिरा क्षेत्र के बभनी चौराहा पर अंजाम दिया गया था। जहां मामूली कहासुनी से नाराज नासिर अली और उसके सहयोगियों ने चौराहे पर दिनदहाड़े अपनी दबंगई का प्रमाण देने के लिए मृतक आनंद की तेजधार हथियार से गला रेत कर हत्या कर दीं।
इस घटना को लेकर बखिरा पुलिस स्टेशन के प्रभारी उमाशंकर तिवारी का बयान सामने आया है कि किसी रंजिश के कारण ये हत्या हुई है, पुलिस आरोपियों की तलाश कर रहे है, मामले की जांच जारी है, वहीं पूरे गांव में तनाव का माहौल है.. इस मामले में प्रशासन की तरफ से हो रही लापरवाही को लेकर दलित समुदाय के लोगो ने भी आवाज उठाई है औऱ उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन से मांग की है कि आरोपियो के खिलाफ कठोर विधिक कार्रवाई हो और उनके घरों पर बुल्डोजर चलें।
वहीं पीड़ित परिवार के लिए भी तुरंत सुरक्षा, आर्थिक मुआवजा और न्याय की मांग की है। लेकिन हैरानी की बात है कि इतने हंगामे के बाद भी पुलिस क्या कार्यवाई कर रही है, वो देखने वाली बात होगी.. लेकिन अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी का न होना, राज्य में फैलते जंगलराज को दर्शा रहा है। वैसे ये सोचने वाली बात है कि आखिर किसकी शय पर ये दलित उत्पीड़न कर रहे है। जवाब आप खुद दीजियें
सत्ता परिवर्तन के बाद भी कर्नाटक की राजनीति में गर्मी
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला कर्नाटक से है, जहां अभी अभी सत्ता परिवर्तन हुआ है, वहीं यहां की राजनीति में काफी गर्मा गर्मी का माहौल बनता जा रहा है। बता दें कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ द्वारा दलितों को समान अधिकार न दिये जाने और उनकी अवहेलना किये जाने को लेकर उठ रहे सवालों पर बीजेपी के सांसद रमेश जिगाजिनगी ने तीखा सवाल उठाते हुए पूछ दिया कि दलितों को आरएसएस के बारे में चिंता करने की क्या जरूरत है?…वहीं उन्होंने सीधा चेतावनी भी दे दी थी आरएसएस के विरोधियों को समझना चाहिए कि जिसके भी उनका विरोध किया है वो मिट्टी में मिल गए है।
मगर इस सवाल ये राजनीतिक रूप ले लिया है,.. वहीं कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खर्गे ने बीजेपी पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि बीजेपी का ये सवाल गहन जांच का हकदार है, वहीं दलितों के प्रति आरएसएस की भूमिका भी अब सवालों के घेरे में है। इस तरह का सवाल केवल ये तथ्य दर्शा रहा है कि दलित समाज से आने वाले आरएसएस के पवित्र क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर सकते है। इसलिए ऐसे संगठन से संबंध नहीं रखना चाहिए। इसी के साथ गृह मंत्री ने पूछा कि बीजेपी नेता के इस बात का क्या मतलब है कि आरएसएस से टकराने वाला जीवित नहीं है, क्या वो एक आतंकी संगठन है, जो उनसे सवाल करने वालों को खत्म कर देता है।
वजह जो भी हो लेकिन बीजेपी नेता का इस तरह का बयान कर्नाटक की राजनीति में बड़ा उबाल लेकर आ गई है, वहीं बीजेपी की आरएसएस पोषित विचारधारा भी सामने आ गई है, ऐसे में पिछले कई सालो से राजनीति में दलितों को मजबूत करने की लड़ाई के बीच ऐसा बयान कहीं बीजेपी को और ज्यादा कमजोर न कर दें, अब देखना ये होगा कि क्या इस मुद्दे पर वाकई में जांच बिठाई जायेगी.. अगर ऐसा होता है तो बीजेपी की रही सही इज्जत भी मिट्टी में मिल जायेगी। अब देखना ये होगा कि गृह मंत्री के इस मामले में बोलने के बाद क्या होता है।
ओड़िशा में जमीन खरीद बिक्री के नाम पर दलित से धोखा
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला ओड़िशा से है, जहां पिछले 8 महीने से अपने साथ हुई धोखाधड़ी को लेकर एक दलित महिला कोर्ट के आदेश के बाद भी केवल मामला दर्ज कराने के लिए ही दर दर भटक रही है। ये मामला रणपुर पुलिस स्टेशन क्षेत्र में आता है, पीड़िता ने मजिस्ट्रेट कोर्ट में अर्जी दी थी कि मई 2025 में महिला की एक जमीन की खरीद बिक्री मामले में उससे 2 लाख 10 हजार रूपय की धोखाधड़ी की गई थी। पीड़िता ने पहले पुलिस थाने में मामला दर्ज कराने की कोशिश की थी, लेकिन पुलिस ने उसे भगा दिया।
जिसके बाद मजिस्ट्रेट कोर्ट में अर्जी दी थी, हैरानी की बात है कि 6 अगस्त, 2025 को मजिस्ट्रेट ने रणपुर पुलिस स्टेशन को आदेश दिया था कि वो मामले को दर्ज कर जांच करें, लेकिन दस्तावेज खो जाने का बहाने बना कर करीब 8 महीनों तक मामला ही दर्ज नहीं किया गया था। जिसके बाद जब मामला उड़ीसा उच्च न्यायालय पहुंचा तो पुलिस नींद से जागी औऱ 24 अप्रैल 2026 को मामला दर्ज किया गया। मामले में हुई देरी को लेकर अब उड़ीसा उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति सावित्री राथो ने प्रशासन को जमकर लताड़ लगाई है। उन्होंने कहा कि दस्तावेजों के खो जाने का बहाना न्यायिक निर्देशों की अनदेखी और न्याय व्यवस्था को कमजोर करने की बड़ी चाल है। इसलिए अब इन मुद्दे पर निष्पक्ष जांच जरूरी है। वहीं अब पुलिस ने पीड़िता के मामले की जांच शुरु कर दी है, देखना ये होगा कि पीड़ितों को सही न्याय मिलता भी है या नहीं।
तमिलनाडु में एक दलित परिवार पर दो बार हमला
5, दलितो से जुड़ा अगला मामला तमिलनाडु के डिंडीगुल से है, जहां जातिगत भेदभाव को कायम रखने के लिए जातिवादि दबंगो ने एक ही परिवार के कई लोगो को बुरी तरह से मारा, उन्हें जातिसूचक गालियां दी, उनके घर में तोड़ फोड़ की और पत्थर से हमला किया..एक ही दिन में दो बार हमला किया गया.. ये मामला पलानी के नाइकरापत्ती के वीपी पुदुर गांव का है, पीड़ित वी अरुमुग ने पुलिस को तहरीर दी कि वो खेत मजदूर है, और पहली घटना के वक्त खेतो में काम कर रहा था, लेकिन तभी एस कार्थी नाम के शख्स ने उससे बहस शुरु कर दी और उस पर हमला कर दिया।
किसी तरह दोनो को शांत कराया गया और पीड़ित को इलाज के लिए भेज दिया गया मगर रात के समय फिर से कार्थी ने कुछ साथियों के साथ पीड़ित के घर पर हमला कर दिया। तोड़फोड़ किया, जातिसूचक गालियां दी और पीड़ित के साथ साथ उसकी पत्नी को भी मारा। जिसके बाद करीब 11 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया था, जिसमें से 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, और बाकियों की तलाश जारी है। आरोपी ने ये हमला किस इरादे से किया था ये सच जांच के बाद साफ हो ही जायेगी.. मगर जातिवादियों का ऐसे खुलेआम हमला करना दलितों की स्थित को लेकर चिंता का विषय जरूर बन गया है।



