Top 5 Dalits news: दलितों की स्थिति पर कितना ही डिबेट कर लिया जाए, लेकिन जब तक खुद दलित अपने अधिकारों के लिए सशक्त रूप से खड़े नहीं होंगे, तब तक डिबेट करने वाले भी केवल जुमलेबाजी करेंगे, जो केवल लुभावने वादों से सराबोर होगा, मगर जमीनी स्तर पर कुछ नहीं।
अनिल मिश्रा को मिली रिहाई
1. दलितों से जुड़ी पहली खबर मध्य प्रदेश के ग्वालियर से है, जहां बाबा साहब आंबेडकर और संविधान का अपमान करने वाले हिंदूवादी वकील अनिल मिश्रा को आखिरकार कोर्ट ने रिहा कर दिया है। हालांकि अनिल मिश्रा की रिहाई ओर कैसे को खत्म करने के बदले उसपर एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। कोर्ट ने इस केस को बेबुनियाद बता कर कैसे को ही रद्द कर दिया है, एक तरफ मनुवादी समाज इसे न्याय की जीत बता रहा है तो वहीं दलित संगठन अनिल मिश्रा की रिहाई को लेकर नाखुश नजर आ रहे है, दलित संगठन का कहना है कि अनिल मिश्रा जैसे लोग जेल के ही रहने चाहिए और वो अब इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट के लेकर जाएंगे।
वहीं आजाद समाज पार्टी के नेता दामोदर यादव मंडल ने खुले तौर पर कहा कि आजाद समाज पार्टी का खुला संदेश है कि जो बाबा साहब का अपमान करेगा, पार्टी उसे बख्शेगी नहीं। अब अनिल मिश्रा का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में जाएगा और उसे जेल जाना ही होगा, ताकि उसके जैसे लोगों को ये संदेश जा सकें कि बाबा साहब और संविधान का अपमान करने वालों को देश की अदालत कभी आजाद नहीं रह देगी
बिजनौर में दवा लेकर लौट रहे दलित युवक को पीटा
2. दलितों से जुड़ा अगला बावला उत्तर प्रदेश के बिजनौर से है, जहां मामली कहासुनी होने पर दवा लेकर लौट रहे एक दलित युवक को बुरी तरह से पीटा गया। ये घटना बिजनौर के धोकलपुर गांव की है। पीड़ित की मां की तबियत खराब थी और वो दवा लेकर घर लौट रहा था, तभी तीन लोगों ने उस पर हमला कर दिया । पीड़ित युवक के साथ हुई इस वारदात का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है जिसमें साफ देखा जा सकता है कि किस तरह से तीनों आरोपियों ने पीड़ित युवक को पहले रोक, उसकी टोपी उतरवाई, उसे कई थप्पड़ मारे और उसके सिर पर जूतों से कई बार पीटा।
मारपीट के दौरान पीड़ित लगातार हाथ जोड़कर पैर पकड़कर माफी मांग रहा है और छोड़ने की गुहार लगा रहा है। वीडियो के वायरल होने के बाद पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक पीड़ित और आरोपी पक्ष अलग अलग जाति से आते है और किसी पुराने विवाद को लेकर उन लोगों ने हमला किया था। फिलहाल इस मामले में अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। जल्द ही तीनों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
इटावा के दलित बस्ती में भागवत से नाराज हुए मनुवादी
3. दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के इटावा से है, जहां दलित समाज ने भागवत कथा का आयोजन क्या किया, मनुवादियों को सोच को ही धक्का लगा गया, उन्होंने न केवल भागवत के आकर उत्पात मचाया बल्कि बाबा साहब आंबेडकर की मूर्ति को भी तोड़ा, और विरोध करने वाले ऑपरेटर को भी बुरी तरह से पीटा। ये मामला थाना ऊसराहार के भोराजपुर गाँव का है, 6 जनवरी 2026 को रात को करीब आठ बजे दलित बस्ती में होने वाले भागवत कथा में अचानक कुछ दबंगों ने हमला कर दिया, भागवत के मंच पर देवी देवताओं की मूर्ति के साथ बाबा साहब की मूर्ति भी रखी थी।
जिसे दबंगों ने आकर तोड़ दिया और पूरा साउंड सिस्टम खराब कर दिया। इतना ही साउंड ऑपरेटर राहुल ने जब उसका विरोध किया तो उसे बुरी तरह से पीटा। इस पूरी घटना का वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसे इस उत्पात के दौरान वहां खड़े ग्रामीणों ने बनाया था। पुलिस को जब इसकी जानकारी लगी तो उन्होंने तुरंत हमला करने वाले रामू यादव, भूरे यादव, संजीव यादव और नामित समेत कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है वहीं पुलिस ने नामित नाम के युवक को गिरफ्तार कर लिया है, और बाकी आरोपियों की तलाश जारी है। हालांकि फिलहाल पुलिस बल ने गांव में शांति बनाई रखी है।
18 साल से यूएई में फंसा है तेलंगाना का दलित मजदूर
4. दलितों से जुड़ा अगला मामला तेलंगाना के हैदराबाद से है, जहां का एक मजदूर पिछले 18 सालों से संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में फंसा हुआ है। दरअसल तेलंगाना के निर्मल जिले के सोन मंडल में आने वाले मधापुर गांव के रहने वाले मंदुला राजन्ना साल 2007 में एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम के सिलसिले में यूएई गए थे लेकिन एक साल बाद ही वो कंपनी छोड़ कर निकल गया था लेकिन पिछले 18 सालों से घर नहीं लौटे। जानकारी के अनुसार उन्हें यूएई में अवैध रूप से रहने के मामले में जेल में बंद कर रखा है, जहां वो ये ही साबित नहीं कर पा रहे है कि वो भारतीय है।
राजन्ना अनपढ़ है, इसलिए कोई शैक्षणिक दस्तावेज नहीं है, वहीं 18 सालों से देश से बाहर रहने के कारण वोटर लिस्ट में भी नाम नहीं है, इसके अलावा 2007 में आधार कार्ड बनवाने का चलन भी था तो वो भी दस्तावेज नहीं है। राजन्ना के परिवार ने हैदराबाद में मुख्यमंत्री के शिकायत प्रकोष्ठ (Grievances Cell) और निर्मल जिला कलेक्टर से मदद की गुहार लगाई है, ताकि राजन्ना की भारतीय नागरिकता साबित कर सकें। राजन्ना के परिवार के पास भी सबूत के नाम पर केवल बैंक पासबुक है, न तो उनके पासपोर्ट की कॉपी है और न ही उस कंपनी की डिटेल्स जिसमें वो काम करने के लिए गया था। अब ऐसे में उसके परिवार के लिए केवल राज्य सरकार ही उनकी आखिरी उम्मीद है। अब देखना ये होगा कि क्या एक दलित मजदूर 18 साल बाद घर लौट सकेगा।
कर्नाटक में दलित बीजेपी कार्यकर्ता के साथ बर्बरता
दलितों से जुड़ा अगला मामला कर्नाटक के बेंगलुरु से है, जहां एक दलित महिला बीजेपी कार्यकर्ता के साथ पुलिस की बर्बरता के खिलाफ बीजेपी ने मोर्चा खोल दिया है । दरअसल कर्नाटक के हुबली में BJP महिला कार्यकर्ता सुजाता उर्फ विजयलक्ष्मी हांडी को केशवापुर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था जिसके बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है जिसमें उनके कपड़े उतरे हुए है और उनके शरीर पर चोट के निशान है, जिसके बाद से मामला काफी गरमा गया है। बीजेपी ने अपना रोष जताते हुए पुलिस वालों के खिलाफ कार्यवाही करने हुए निलंबित करने की मांग की है।
बता दे ये मामला तब शुरू हुआ जब कांग्रेस की पार्षद सुवर्णा कलकुंतला ने बीजेपी कार्यकर्ता के खिलाफ मामला दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि सुजाता ने SIR-BLO अधिकारियों के मिलकर वोटर लिस्ट से वोटर्स ने नाम हटवाए थे। जिसके बाद पुलिस ने कार्यवाही की थी वहीं हुबली के पुलिस आयुक्त शशिकुमार ने सुजाता और बीजेपी कार्यकर्ताओं के आरोपों को सिरे खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने खुद अपने कपड़े फाड़े है, और पुलिस वालों पर हमला किया है। पुलिस को केवल फंसाया जा रहा है। अब ऐसे में देखना ये होगा कि आखिर इस मामले में किसकी सफाई के सच्चाई है। फिलहाल ये मामला जांच के दायरे में आ गया है। जांच के बाद ही दूध का दूध और पानी का पानी होगा।



