Zero FIR, E FIR: 1 जुलाई 2024 को जब पूरे भारत में केंद्र सरकार ने आईपीसी की धाराओं को बदल कर भारतीय न्याय संहिता में किया तो केवल अंग्रेजी हुकुमत के दिये गए नाम ही नहीं बदले बल्कि कई धाराओं को भी बदल गया। कानूनों को आज के समय की मांग के अनुसार भी बदले गए.. आज के डिजिटल टाइम के अकोर्डिंग.. उन बड़े बदलाव में अब से जीरो एफआईआर और ई एफआईआर को भी कानूनी मान्यता दी गई है.. जिससे लोगो को अब से किसी भी क्षेत्र में एफआईआर करने की शक्ति दी गई है। अपने इस लेख में बीएनएस 2023 में दिये गए जीरो एफआईआर (Zero FIR) और ई-एफआईआर (e-FIR) के कानूनी अधिकारों के बारे मे जानेंगे।
क्या है जीरो एफआईआर
जीरो एफआईआर यानि की एक ऐसी First Information Report, जो अब से पीड़ित भारत के किसी भी हिस्से में कर सकता है, भले ही अपराध किसी और थाना क्षेत्र में हुआ हो, इसके लिए किसी भी पुलिस स्टेशन में पहली एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है..लेकिन आईपीसी में एफआईआर FIR उसी पुलिस स्टेशन में दर्ज की जाती थी जहां घटना हुई हो, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। जीरो एफआईआर में केवल शिकायत दर्ज की जाती है, अपराध के बारे में कोई जानकारी नहीं होती।
वहीं जीरो एफआईआर दर्ज करने के बाद शुरुआत जांच करने के बाद 15 दिनों के अंदर जीरो एफआईआर को मूल जूरिडिक्शन, यानी जहां क्राइम हुआ है, उससे जुड़े पुलिस स्टेशन में ट्रांसफर कर दिया जाता है, जिसके बाद उस मामले की आगे की कार्यवाई की जाती है। वहीं विक्टिम को FIR की कॉपी भी दी जायेगी.. जीरो एफआईआर क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम एप्लिकेशन (CCTNS) के तहत भारत के हर पुलिस स्टेशन में लागू किया गया है।
जीरो एफआईआर की प्रक्रिया
जीरो एफआईआर करने से कई फायदे होते है। जिसमें पुलिस को आसानी से जल्दी घटना की जानकारी मिल जाती है, और सबूतो के खत्म होने से पहले ही पुलिस के हाथों में वो सबूत लग जाता है, जीरो एफआईआर होने से मामला अधिकारिक क्षेत्र का न होने के बाद भी पुलिस को बिना बहस के जांच शुरु करना ही होता है, इससे पीड़ित को इंसाफ के लिए भटकना नहीं पड़ता। वहीं हत्या, रेप, जानलेवा हमले जैसे संगीन अपराध संज्ञेय की श्रैणी में रखा जाता है, और इन मुद्दों को पुलिस बिना किसी देरी के जांच शुरु करती है। इससे न्याय व्यवस्था तेज हो गई है और पीड़ित को जल्द न्याय मिलने के चांसेस बढ़ गए है।
ई एफआईआर क्या है
ई एफआईआर यानि की ऐसी First Information Report जिसे पीड़ित ऑनलाइन दर्ज करता है। हालांकि अभी सभी पुलिस स्टेशन में ऑनलाइन सुविधा नहीं है लेकिन ई एफआईआर की सबसे पहले सुविधा दिल्ली पुलिस ने मुहैया कराई थी.. उन्होंने अपनी वेबसाइट पर ऑनलाइन FIR दर्ज करवाने की सुविधा दी है, जिसके तहत कहीं भी बैठकर दिल्ली पुलिस की वेबसाइट पर पीड़ित जीरो एफआईआर दर्ज कर सकता है। ई-एफआईआर होने के बाद तुरंत कार्यवाई करने के बजाये जांच अधिकारी को एफआईआर को लेकर शुरुआती वेरिफिकेशन के लिए पीड़ित के पास भेजा जाता है.. इसके बाद वो अधिकारी तय करता है कि मामला प्रथम दृष्यता बनता भी है या नहीं।
3 दिन में ई-मेल पर जानकारी भेज FIR दर्ज
उसके बाद 3 दिन में ई-मेल पर जानकारी भेज FIR दर्ज करनी होती है। इसके लिए e-Crime पुलिस स्टेशन को ई एफआईआर होने के बाद घटनास्थल के नजदीकी साइबर थाने में ट्रांसफर करने की जिम्मेदारी दी गई है। पीड़ित इसके लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) और राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करा सकते है। वहीं e-FIR में पीड़ित को एक ट्रैकिंग नंबर भी दिया जाता है जिससे पीड़ित खुद केस की प्रगति को ट्रैक कर सकते है।
इससे मामले की जांच पूरी तरह से पारदर्शी हो गई है। साथ ही साइबर फ्रोड के मामले में जल्द कार्यवाई और धोखाधड़ी से लिए गए पैसे को जल्द से जल्द भुगतान होता है। इससे साइबर ठगी के शिकार लोगो को जल्द से जल्द न्याय मिलने के चांसेस बढ़ गए है। सरकार की इस पहल से कानून मामलों में पारदर्शिता बढ़ गई है, जिससे न्याय प्रणाली और आसान और सुचारू हो रही है। और जल्द से जल्द न्याय मिलने की उम्मीद भी बढ़ गई है।



