Top 5 Dalit news: भारत का कानून कहता है कि वो भले ही 100 आरोपी छूट जाए लेकिन किसी बेगुनाह को सजा नहीं होनी चाहिए। लेकिन जब बात दलितों और पिछड़ों को न्याय दिलाने की होती है तो यहां तो मामला दर्ज करने में ही महीनों थाने के चक्कर लगाने पड़ते है, और जब तक न्याय होता है, उसके मायने ही खत्म हो चुके होते है। तो चलिए पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाले घटनाओं के बारे में बतायेंगे जो सबूत है कि कैसे दलितों और पिछड़ों से जुड़े मामलों में पुलिस प्रशासन भी ढिलाई करती है।
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक का बड़ा ऐलान
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर से है। जहां शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और नीट के पेपर के लीक होने को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट में दलित इंफ्लूएंसर निशु आजाद के पिता पर हुआ सरिया से जानलेना हमला अब राष्ट्रीय मुद्दा बन है। इस प्रोटेस्ट को लीड कर रहे दलित जाति से आने वाले अभिजीत दिपके और प्रवक्ता सौरभ दास ने दिल्ली पुलिस से इस मामले में एससी एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज करने का मांग की है।
उन्होंने पुलिस की कार्यवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि हमले में 15 लोग शामिल थे लेकिन पुलिस ने केवल एक शख्स को गिरफ्तार करके पल्ला झाड़ने की अच्छी कोशिश की है। बता दें कि 14 साल की निशु आजाद भीम आर्मी की एक सदस्य है जो सोशल मीडिया पर दलितो से जुड़े मुद्दे को उठाती रहती है.. जिसके कारण उसके कई दुश्मन भी बन गए।
इसी दौरान जंतर मंतर पर प्रोटेस्ट के दौरान कुछ जातिवादि दबंगो ने उसे घेर लिया था, लेकिन उसे पिता बीच बचाव करने आ गए, जिससे आरोपियो ने उनके सिर पर रॉड से हमला कर दिया। घटना के करीब 24 घंटे में निशु के पिता ने खुद आपबीती बताई थी। प्रवक्ता सौरभ दास ने भी मीडिया के सामने खुलासा किया कि केवल आंदोलन को कमजोर करने के लिए इस तरह की अमानवीय घटना को अंजाम दिया गया है। अब देखना ये होगा कि पुलिस आखिर किसे बचाने की कोशिश कर रही है.. और जब सबूत और गवाह सब कुछ सामने है फिर भी गिरफ्तारी में ये लचरता आखिर किसकी शय पर.. वहीं क्या इस मामले में एससी एसटी एक्ट लगाया जायेगा।
दलितो वोटर्स को साधने के लिए कांग्रेस की नई चाल
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला यूपी विधानसभा चुनावों में दलित वोटर्स को लुभाने के लिए शुरु की गई बहुजन विचार अभियान को लेकर है। 2027 में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर अब कांग्रेस भी दलितों और पिछड़ो को लुभाने की जुगत में लग गई है। इतना ही राजर्षि छत्रपति शाहू महाराज की जयंती मनाने के बहाने, कांग्रेस के जितनी आबादी, उतना हक नारे को भी दोहरा कर बहुजन समाज का ध्यान अपनी ओर करने की कोशिश की है।
कांग्रेस ने कहा जनसंख्या के अनुपात के अनुसार ही सभी जातियों के प्रतिनीधित्व की मांग होनी चाहिए, तभी बहुजन और वंचित समुदाय को न्याय, शिक्षा और भागीदारी मिलेगी। वहीं राज्य स्तरीय पार्टी अध्यक्ष अजय राय ने लगे हाथो को बीजेपी को भी घेर लिया, एक तरफ उन्होंने बीजेपी पर जाति जनगणना, आरक्षण और आर्थिक शक्ति का कथित तौर पर केंद्रीकरण करने का आरोप लगाया तो वहीं राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर होने वाले विवाद पर भी बीजेपी और आरएसएस को घेरा।
बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी का दलित कार्ड काफी काम कर गया था , ऐसे में देखना ये होगा कि क्या यूपी में कांग्रेस का दलित कार्ड काम करेगा.. क्योंकि बहुजन समाज अब केवल जाति के आधार पर नहीं बल्कि विकास के आधार पर अपना प्रतिनिधि चुनना चाहता है.. क्या इस जागरूकता की कसौटी पर खरा उतर पायेगी कांग्रेस।
चैन्नई में दलित समाज के लोगों ने दिखाई प्रतीभा
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला तमिलनाडु के चैन्नई से है, जहां दलित समाज से आने वाले छोटे व्यापारियों ने दिखा दिया कि अगर उन्हें मौका मिले तो वो जातिवादि आतंकियों को पछाड़ने का दम रखते है। जी हां, इसका ताजा सबूत पेश किया है तमिलनाडु एससी/एसटी स्टार्टअप फंड ने, जिसे उनके सफल स्टार्टअप के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस श्रेणी में स्कोच सिल्वर अवार्ड दिया गया है।
बता दें तमिलनाडु स्टार्टअप एंड इनोवेशन मिशन के तहत एससी एसटी वर्ग के उधमियो को फंड मुहैया कराया जाता है। केवल 2025 से लेकर 2026 में 43 एससी एसटी वर्ग के लोगो के स्टार्टअप के लिए 60.80 करोड़ रुपये के निवेश किया गया है, वहीं निवेशकों से फॉलो-ऑन निवेश के तौर पर भी 21.66 करोड़ रुपये जुटायें है। मेंटरशिप, मार्केट एक्सेस और इन्वेस्टर कनेक्ट प्रोग्राम करके नए उधमियो को उनके क्षेत्र में काम करने के लिए और पारदर्शिता लाने का प्रयास किया जा रहा है।
राज्य में दलितों और वंचितो के लिए नए रोजगार के अवसर भी खोल रही है , ताकि वो आर्थिक रूप से मजबूत बने। ये अवार्ड गवाह है कि टैलंट किसी जाति की मोहताज नहीं होती, बस जरूरी है तो एक मौका देने की.. इसके लिए तमिलनाडु स्टार्टअप एंड इनोवेशन मिशन की जितना सराहना की जायें उतनी कम है।
हमीरपुर में 16 साल बाद दलित युवक को मिला न्याय
4, दलितो से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के हमीरपुर से है, जहां एक दलित युवक ने दबंगो के लिए शराब लाने के इंकार कर क्या कर दिया था, दबंगो को ये उनके सम्मान को ठेस पहुंचाने जैसा लगा और उन लोगो ने दलित को बुरी तरह से पीटा.. लेकिन आपको पता है सबसे हैरानी की बात क्या है कि इस मामलो को 16 साल बीत गए है.. और 16 सालों के बाद पीड़ित को न्याय मिला है औऱ आरोपियों को सजा हुई मात्र 4 साल औऱ जुर्माना 24 हजार रूपय।
भारत की लचर कानून व्यवस्था का एक और नमूना है ये मामला.. जहां कहने को तो एससीएसटी एक्ट में विशेष अदालत है, लेकिन न्याय मिलने में तब भी सालों का इंतजार ही नसीब होता है। ये घटना हमीरपुर के जरिया थाना क्षेत्र के परछां गांव का है.. दलित युवक के साथ मारपीट की ये घटना 19 जून 2010 को घटित हुई थी। जब पीड़ित राजेश गांव के ही एक दुकान पर सामान लाने गया था। जहां आरोपी जयप्रकाश लोधी और ठाकुरदास शराब पी रहे थे।
उन लोगो ने राजेश को औऱ शराब लाने के लिए कहा था, लेकिन राजेश ने इंकार कर दिया था, जिससे वो दोनो भड़क गए और राजेश को जातिसूचक गालियां देते हुए पीटना शुरु कर दिया। 20 जून को पीड़ित के पिता ने पुलिस को इस घटना की तहरीर दी थी। इस घटना के 16 सालो के बाद विशेष न्यायधीश एससी एसटी रणवीर सिंह ने दोनो आरोपियो को 4 साल का कठोर कारावास और 24 हजार का जुर्माना देने की सजा सुनाई है। अब सवाल ये है कि 16 सालों के बाद न्याय.. और इतनी कम सजा.. तो भला क्या वाकई में दलितों और पिछड़ो का कानून पर भरोसा बना रहेगा।
भिंड में दलित पीड़ितो पर पुलिस की बर्बरता
5, दलितों से जुड़ा अगला मामला मध्य प्रदेश भिंड से है, जहां पहले एक दलित की पुलिस प्रशासन की नाक के नीचे संतोष बघेल नाम के युवक की संदिग्ध हालात में सड़क हादसे में मौत होती है, लेकिन जब भी पुलिस नहीं जागती, जिसके बाद न्याय के लिए पीड़ित परिवार सड़क पर उतर गया तो ये पुलिस को अपनी बेज्जती लगी, उन लोगो ने पीड़ितो को वहां से हटाने के लिए लाठियां चलानी शुरू कर दी। ये घटना भिंड जिले के मेहगांव थाना क्षेत्र का है।
सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है जिसमें पुलिस का बर्बरता को देख कर किसी की भी रूंह कांप जायेगी। इस मुद्दे पर भीम आर्मी कार्यकर्ता सुनील आस्तेय ने पुलिस प्रशासन को घेरते हुए सीएम मोहन यादव से मांग की है कि केवल न्याय की उम्मीद लेकर वो सड़क पर बैठे थे तो फिर उनके साथ पेशेवर अपराधियों जैसा सलूक क्यों किया गया है।
उन्होंने मांग की है कि संतोष बघेल की मौत के बाद भी पुलिस ने अभी तक कोई कार्यवाई नहीं की.. कौन है उसके अपराधी पुलिस ने कोई जानकारी नहीं दी है उल्टा पीड़ित परिवार के साथ ही बर्बरता करना, वहां की फेल कानून व्यवस्था को दर्शा रहा है। उन्होंने अपील की है कि आरोपी पुलिस वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाई हो, ताकि दलितों का न्याय पर भरोसा बना रहें। हैरानी की बात तो ये है कि आखिर क्यों बिना आंदोलन के दलितों, पिछडो की आवाज तक नहीं सुनी जाती है। कानून उनके लिए बराबरी क्यों नहीं है। अब देखना ये होगा कि सरकार का इसपर क्या रवैया होगा।



