Chandrashekhar Azad news: हाल ही में उत्तराखंड के शंकराचार्य चौक से एक चौंकाने वाली और परेशान करने वाली खबर सामने आई है, जहाँ पुलिस ने एक बार फिर चंद्रशेखर आज़ाद के काफिले को आगे बढ़ने से रोक दिया, जिससे वे केतन लाल मर्डर केस के पीड़ित परिवार से नहीं मिल पाए। इतना ही नहीं विवाद इतना बढ़ा की आजाद पर पुलिस ने जानलेवा हमला भी कर दिया।
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भीम आर्मी चीफ और पुलिस में तनातनी
भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद (Bhim Army Chief Chandrashekhar Azad) को लेकर खबर सामने आई है, जो दलित युवक केतन लाल की एक उंची जाति की लड़की से दोस्ती के कारण बहाने से घर बुला कर बुरी तरह से टॉर्चर कर हत्या करने के बाद उत्तराखंड के टिहरी में पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे थे, लेकिन जैसा कि उनके साथ यूपी में किया जाता है, वैसी ही हरकत उत्तराखंड (Uttarakhand) में भी दोहराई गई, उन्हें पीड़ित परिवार से मिलने से रोकने के लिए भारी संख्या में पुलिस व पैरामिलिट्री फोर्स (Paramilitary force) को तैनात कर दिया गया।
उन लोगों ने आजाद के कारवां को न केवल रोकने की कोशिश की बल्कि जानलेवा व्यवहार किया गया। इतना ही नहीं इस बीच, चंद्रशेखर ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उनके साथ बदतमीजी की और अपशब्द कहे; उन्होंने दावा किया कि सरकार के दबाव के कारण उन्हें पीड़ित परिवार से मिलने से रोका जा रहा था।
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पैदल आगे बढ़े भीम आर्मी चीफ
उनके काफिले को शंकराचार्य चौक (Shankaracharya Chowk) पर रोक दिया गया जिसके बाद आजाद पैदल ही हाइवे पर कड़ी धूप में निकल पड़े, जिसके बाद उन्हें रोकने के लिए धक्का मुक्की भी की गई.. जिसमें उनकी शर्ट फट गई। जिसका एक विडियो सोशल मीडिया काफी वायरल हो रहा है, वही इन सब के बावजूद आजाद ने सरकार के इस रवैये के खिलाफ हाइवे पर ही मोर्चा खोल दिया है।
मौके पर मौजूद SP सिटी अभय सिंह और CO सिटी शिशुपाल सिंह नेगी ने काफी देर तक दोनों नेताओं को समझाने और उन्हें आगे न बढ़ने के लिए मनाने की कोशिश की। बता दें कि टिहरी जिले (Tehri district) के लंबगांव थाना क्षेत्र (Lambgaon police station area) के देवल गांव (Deval Village) में बीते 7–8 जून की रात 18 साल के केतनलाल की बेरहमी के हत्या कर दी गई थी, क्योंकि उनकी दोस्ती एक ऊंची जाति वाली लड़की से हो गई थी।
सवाल सिर्फ़ एक फटी हुई शर्ट का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों का है।
अगर एक निर्वाचित सांसद को पीड़ित परिवार से मिलने से रोका जाता है, तो जवाबदेही बनती है। जनता जवाब चाहती है।
शर्ट फट सकती है, आवाज़ नहीं। संघर्ष जारी रहेगा।@narendramodi @AmitShah#ChandrashekharAzad pic.twitter.com/xTAXcIjSTS
— Nishu Aazad (@Nishuazad11) June 28, 2026
आजाद की बढ़ती ताकत उत्तराखंड सरकार को चुभने लगी
खुद लड़की ने उसे फोन करके बुलाया था और जिसके बाद लड़की के परिवार वालो ने केतन को रात भर टॉर्चर कर मरने के लिए छोड़ दिया था। इस मामले में खुद पीड़ित परिवार ने इच्छा जाहिर की थी कि आजाद उनसे जा कर मिले, लेकिन शायद आजाद की बढ़ती ताकत उत्तराखंड सरकार को चुभने लगी..उन्हें पीड़ित परिवार ने नहीं मिलना दिया गया। एक जनता का प्रतिनीधि अगर अपनी जनता से ही नहीं मिल पाता है तो अंदाजा लगा सकते है कि सरकार की मनमानी किस हद तक हो चुकी है।



