Top 5 Dalit news: कहते है कि न्याय सबके लिए समान होता है, कानून सबके लिए एक जैसा है, लेकिन ऐसा क्यों है कि जब अन्याय दलितों और पिछड़ों के साथ होता है तो उन्हें न्याय ही नहीं बल्कि कानून तक अपनी बात पहुंचाने के लिए भी आंदोलन का सहारा लेना पड़ता है। आखिर क्यों उनकी खामोशी को उनकी कमजोरी माना जाता है। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बतायेंगे, जिसने उस व्यवस्था की मिट्टी पलीत कर दी है, जहां दलितों के साथ कानून भी अन्याय करने से बाज नहीं आता है।
आंध्र प्रदेश में पुलिस की बर्बरता की नई कहानी
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला आंध्र प्रदेश के कुरनूल से है, जहां अब तक केवल दलित पुरुषों को जबरन अपराध स्वीकार करने के लिए पुलिस टॉर्चर से मरने की खबरे सुनी जाती थी वहीं पुलिस वालो ने महिला को भी नही छोड़ा। एक महिला को पुलिस ने जबरन उसके ही बेटे की हत्या कर गायब करने की बात कूबूल करवाने के लिए इतना टॉर्चर किया, महिला की मौत ही हो गई। ये मामला कुरनूल के कोवथलम थाना क्षेत्र के बदिनेहाल गांव की है। मृतक माला गंगम्मा की 31 मई को पुलिस कस्टडी में मौत हो गई थी।
वहीं उसका एक साथी मल्ला दुर्गाय्या अभी भी अस्पताल में है, लेकिन हैरानी की बात है कि पुलिस ने माला के शव को उसके परिजनों को देखने भी नहीं दिया और आनन फानन में 1 जून को उनके पैतृक गांव बदीनेहाल में दफना भी दिया।पुलिस की भूमिका को लेकर अब मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स फोरम और इंडियन फेडरेशन ऑफ ट्रेड यूनियंस ने सवाल उठाने शुरु कर दिये। उन्होंने कहा कि नवंबर 2024 में माला का बेटा वीरेंद्र अचानक लापता हो गया था। माला ने बेटे की तलाश के लिए पुलिस से मदद भी मांगी थी।
लेकिन पुलिस वालों ने अनसुना कर दिया जिसके बाद उसने आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय से मदद मांगी कोर्ट के आदेश पर गुंटूर एएसपी सुप्रजा के नेतृत्व में जांच टीम ने विरेंद्र की तलाश शुरु की, लेकिन वो लोग माला और उसके साथी को ही विरेंद्र की हत्या करने और उसे गायब करने के आरोप में पकड़ ले गए। जिसके बाद उन्हें ये अपराध कूबूल करवाने के लिए इतना टॉर्चर किया गया कि माला की मौत हो गई, जबकि पुलिस कह रही है कि बाइक से गिरने से ये चोटे आई थी। संगठन ने सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग की है, और संदिग्ध पुलिस वालों के खिलाफ कार्यवाई करने की मांग की है। अब देखना ये होगा कि क्या सरकार इस मामले में कोई फैसला लेती है, या ये मामला भी महीनों कोर्ट में पड़ा रहेगा।
यूपी में दलित युवक की मारपीट के बाद मौत
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के फार्रूखाबाद से है, जहां पुरानी रंजिश के चलते जातिवादियों ने एक दलित युवक को इतनी बुरी तरह से पीटा की 7 दिनो तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद भी युवक की जान चली गई। ये मामला फार्रूखाबाद के राजेपुर थात्रा क्षेत्र के उजरामऊ गांव की है। मृतक के भाई उदय प्रताप सिंह ने 19 जून को पुलिस को तहरीर दी थी कि उसका छोटा भाई श्यामवीर गांव के ही एक व्यापारी बादल के य़हां काम करता था, और वहीं रहता था, लेकिन 18 जून की रात को जब वो सोया हुआ था तब श्यामवीर से पुरानी रंजिश रखने वाला सौरभ कुछ अज्ञात लोगो के साथ वहां आया औऱ उस पर हमला कर दिया।
इस दौरान उन लोगो ने श्य़ामवीर को जातिसूचक गालिंया भी दी। आरोपी उसके बाद फरार हो गए। श्यामवीर को पहले राजेपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया था, लेकिन उसकी हालत बिगड़ने लगी तो उसे कानपुर के हैलेट अस्पताल भेज दिया गया। करीब एक हफ्ते तक जिंदगी के लड़ने वाला श्यामवीर ये जंग हार गया और उसकी मौत हो गई। हैरानी की बात है कि इस मामले को एक हफ्ता हो चुका है लेकिन पुलिस ने अभी तक आरोपियों के बारे में कोई जानकारी तक नहीं जुटाई है.. ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या दलित युवक की मौत के बाद उसे कानून न्याय देगा, क्योंकि पुलिस का लापरवाही देखकर तो उम्मीद कम ही लगती है।
अलवर में भागवत कथा में जातिवादियों का हमला
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला राजस्थान के अलवर से है, जहां दलितों और पिछड़ों के लिए किये जा रहे है भागवत कथा में जातिवादि आतंकियों ने जमकर उत्पात मचाया, जातिसूचक गालियां दी.. और लाठी डंडो से बुरी तरह से श्रद्धालुओं को पीटा.. इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। ये मामला अलवर के लक्ष्मणगढ़ थाना क्षेत्र के तिलकपुर गांव का है,जहां श्रीश्री 1008 महाराज हरचंददास आश्रम में श्रीमद्भागवत कथा चल रही थी, जो कि हर जाति के लिए खुला था।
लेकिन अचानक 25 जून को कथा के दौरान करीब 12-14 लोग, जिसमें महिलायें भी शामिल थी, लाछी डंडा लेकर कथा स्थल पर आ गई और कथा सुन रहे लोगो पर हमला कर दिया।इतना ही नहीं न लोगो ने पीड़ितो को जातिसूचक गालियां देते हुए काफी बुरी तरह से अपमानित किया। वहीं टेंट-मंडप और मंदिर में तोड़फोड़ भी की। इस मारपीट में एक ढाई साल की बच्ची समेत 14 लोग घायल हो गए है जिसमें दो लोगो की हालत गंभीर बनी हुई है।
वहीं लक्ष्मणगढ़ एसएचओ नेकी राम ने बताया कि पीड़ितो के तहरीर पर आरोपियो के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है और जातिगत अपमान के कारण ये मामला एससीएसटी एक्ट के तहत चलेगा। हालांकि अभी तक किसी भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। अभी भी भगवान पर उंची जाति वालो का कॉपीराइट है ये सोच गई नहीं है.. और पता नहीं कब तक ये सोच चलती रहेगी। देखना होगा कि कानून कैसे पीड़ितों को न्याय दिलाती है।
बोकारो में ताजिया मेले के दौरान दो दलित युवक की पिटाई
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला झारखंड के बोकारो जिले से है, जहां ताजिया मेला देखने गए दो दलित युवक को अल्पसंख्यक समुदाय की महिला के साथ छेड़छाड़ करने के शक में भीड़ ने बुरी तरह से पीटा। ये घटा पेंक-नारायणपुर थाना क्षेत्र के हरलाडीह गांव की है, जहां मुहर्रम के दौरान जुरामना मेला टांड़ ताजिया मिलन समारोह हो रहा था, वहीं हरलाडीह के दो दलित युवक मेला देखने गए थे, लेकिन तभी दूसरे समुदाय की महिला से किसी बात को लेकर कहा सुनी हो गई थी।
महिला ने दोनो युवको पर छेड़छाड़ का आरोप लगा दिया, जिससे आपपास खड़े लोगो ने दोनो युवको को लाठु डंडो से पीटना शुरु कर दिया।इतना ही नहीं जब घायल हालत में दोनो को अस्पताल लाया गया तो वहां भी हमलावर पहुंच गए और वहां भी दोनो से मारपीट की गई.. शोर सुनकर जब लोग जमा होने लगे तो हमलावर फरार हो गए, वहीं पीड़ितो के साथ पहुंची पुलिस को लेकर ग्रामीणों ने रोष जताते हुए कहा कि पुलिस वालों ने जानबूझकर इस घटना को होने दिया और आरोपियों की भागने में मदद की।
जिसके कारण उन लोगो ने पुलिसवालों को ही घेरे रखा था, जिसके बाद नावाडीह के बीडीओ प्रशांत कुमार हेमरम वहां पहुंचे और उन्होंने किसी तरह से गांववालों को शांत कराया। वहीं पेंक-नारायणपुर थाना प्रभारी नीतिश कुमार ने जानकारी देते हुए कहा कि पुलिस ने जांच शुरु कर दी है और दोनो पीड़ित युवक फिलहाल ठीक है। जांच के बाद ही आगे की कार्यवाई की जायेगी। हैरानी का बात है कि जिस मामले में अगर कोई दलित शामिल हो जाता है उस मामले में अपने आप ही दलित ही आरोपी कैसे बन जाता है, और जनता जज क्यों बन जाती है, ऐसे में कैसे दलित सुरक्षित रहेंगे, ये सबसे बड़ा सवाल है।
भीम आर्मी चीफ का कद फिर से बढ़ा
5, दलितो से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को लेकर है। जो इस वक्त पूरी यूपी की राजनीति में छायें हुए है, उनका क्रेज ऐसा है कि बड़े बड़े विपक्षी दल के नेता अपनी पुरानी पार्टी को छोड़ कर आजाद का हाथ थाम रहे है.. इसी कड़ी में उत्तराखंड में भी आजाद की लहर गूंजने लगी है और वहां आजाद के प्रभाव में आकर झबरेड़ा विधानसभा से सैकड़ो राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने अपने अपने दलों को छोड़ कर सहारनपुर आकर आजाद का हाथ पकड़ कर आजाद समाज पार्टी की सदस्यता ले ली है।
झबरेड़ा विधानसभा सीट के आजाद समाज पार्टी के प्रत्याशी महक सिंह की दावेदारी पक्की कर दी गई है।अगले साल यूपी के विधानसभा चुनावों से पहले आजाद का तेजी से बढ़ता कद अब विपक्षियों की नींदे उड़ा चुका है, और उनके इस कारवां को रोकने की काफी कोशिशे भी की जा रही है.. लेकिन जैसे जैसे आजाद की लोकप्रियता बढ़ रही है, वैसे वैसे उनकी सेना भी बढ़ रही है… ऐसे में अब सभी को आगामी विधानसभा चुनाव का इंतजार है, जो शायद एक स्वर्णिम इतिहास को लिखने वाला होगा।



