Extraterritorial Jurisdiction: अक्सर भारत में अरबो रूपय का भ्रष्टाचार करके विदेश भाग जाने वालों के बारे में सुना होगा। वहीं कई ऐसे अपराधी भी है, जिन्होंने भारत के खिलाफ अपराध किया, या ऐसी साजिश की जिससे भारत को नुकसान पहुंचाया जा सकें। या फिर वो अपराध न केवल भारत के लिए बल्कि जिस देश में रहकर अपराध किया गया है, वहां भी अपराधिक मामला हो, तो ऐसे में पहले उस देश कानून के अनुसार ही भारत को व्यावहार करना पड़ता है, लेकिन 1 जुलाई 2024 को इंडियन पीनल कोड की धाराओं को हमेशा के लिए खत्म करके भारतीय न्याय संहिता 2023 लागू किया गया, तब से न्याय प्रक्रिया में काफी पारदर्शिता आई है।
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Extraterritorial Jurisdiction कब लागू होता है?
यहां तक कि पुलिस की कार्रवाई और कोर्ट की सुनवाई के लिए भी एक फिक्स टाइम लागू किया गया ताकि न्याय प्रकिया को तेजी से पूरा किया जा सकें, भारत के खिलाफ विदेश में रह कर अपराध करने वालों पर भी शिकंजा कसने के लिए बीएनएस की धारा 1 की(4)(5) लागू की गई है। ऐसे अपराधों को क्षेत्रातीत क्षेत्राधिकार यानि की Extraterritorial Jurisdiction लागू होता है।
आईपीसी की धारा 4 अनुसार कोई भी भारतीय नागरिक जो भारत के बाहर रहता हो, और किसी अपराध को करता हो, तो ऐसे में उसका अपराध भारत में भी अपराध माना जायेगा और अगर वो भारत में गिरफ्तार होता है, तो उसपर भारतीय कानून के अनुसार ही मुकदमा चलेगा।
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Extraterritorial Jurisdiction के प्रावधान
वहीं 2024 में बीएनएस की धारा लागू करने के बाद इसमें कुछ बदलाव किये गए। भारतीय न्याय संहिता की धारा 1 की उपधारा 4 और 5 में Extraterritorial Jurisdiction के प्रावधान दिये गए है। जिसके मुताबिक अगर कोई भारतीय विदेशी धरती पर अपराध करता है जो भले ही उस विदेशी धरती पर अपराध न माना जाता हो, लेकिन भारत के कानून के अनुसार अपराध है तो उस पर भारत में मुकदमा चलाया जा सकता है।
साथ ही कोई जहाज या एयरक्राप्ट जो भारत के नाम से पंजीकृत है, उस पर कोई भी व्यक्ति अपराध करता है, भले ही वो भारतीय हो या विदेशी, उस पर अपराध के बदले भारत में ही मुकदमा चलेगा और यहीं सजा भी होगी। वहीं कोई अपराधी जो विदेश में अपराध करके भारत में छिपा हो, तो भारत सरकार को ये अधिकार है कि वो उसे गिरफ्तार करके प्रत्यर्पित कर सकता है। इन अपराधों में हत्या, चोरी, धोखाधड़ी करने के साथ साथ विदेशी धरती पर बैठ कर कंप्यूटर संसाधन को लक्ष्य बना तक साइबर अपराध करने को भी शामिल किया गया है।
अपराध भारत में करें या विदेश में सजा बराबर मिलेगी
हालांकि Extra territorial Jurisdiction के प्रावधानो में भारत में किये गए अपराधों में जो मुकदमा चलेगा, वो भारत में किये गए अपराधो के अनुसार कही चलाया जायेगा, यानि की जो सजा भारत में रहने पर अपराधी को दी जाती वहीं सजा विदेश में रह कर अपराध करने के बाद भी मिलेगी। बीएनएस में बनाये गए ये कानून लागू होने के बाद अपराध करके विदेशों में खुद को सुरक्षित समझने की गलती करने वालों पर शिकंजा और मजबूती से कसा गया है। इससे विदेशों में अपराद करने से पहले भी वो भारतीय कानूनों के बारे में सोचेंगें। क्योंकि अब से अपराध भारत में करें या विदेश में, सजां बराबर ही मिलेगी और कानून की नजरो से कोई बच नहीं सकेगा।



