Andhra Pradesh news: दलित महिला की कस्टोडियल डेथ पर हंगामा, मानवाधिकार संगठन ने खोला मोर्चा जांच की मांग

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Andhra Pradesh news: हाल ही में आंध्र प्रदेश के कुरनूल से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां एक दलित महिला की गंभीर पुलिस यातना के बाद मौत हो गई। इसके अलावा, आरोप है कि पुलिस उस पर यह कबूल करने के लिए दबाव डाल रही थी कि उसने अपने ही बेटे की हत्या की है।

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दलितों के साथ पुलिस की बर्बरता की नई कहानी

आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh)  के कुरनूल (Kurnool) से खबर सामने आई है, जहां अब तक केवल दलित पुरुषों को जबरन अपराध स्वीकार करने के लिए पुलिस टॉर्चर से मरने की खबरे सुनी जाती थी वहीं पुलिस वालो ने महिला को भी नही छोड़ा। एक महिला को पुलिस ने जबरन उसके ही बेटे की हत्या कर गायब करने की बात कूबूल करवाने के लिए इतना टॉर्चर किया, महिला की मौत ही हो गई। ये मामला कुरनूल (Kurnool) के कोवथलम थाना क्षेत्र (Kovathalam police station area) के बदिनेहाल गांव की है। मृतक माला गंगम्मा की 31 मई को पुलिस कस्टडी में मौत हो गई थी।

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मानवाधिकार संगठन ने उठाया सवाल

वहीं उसका एक साथी मल्ला दुर्गाय्या अभी भी अस्पताल में है, लेकिन हैरानी की बात है कि पुलिस ने माला के शव को उसके परिजनों को देखने भी नहीं दिया और आनन फानन में 1 जून को उनके पैतृक गांव बदीनेहाल में दफना भी दिया।पुलिस की भूमिका को लेकर अब मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स फोरम (Organization Human Rights Forum) और इंडियन फेडरेशन ऑफ ट्रेड यूनियंस (Indian Federation of Trade Unions) ने सवाल उठाने शुरु कर दिये। उन्होंने कहा कि नवंबर 2024 में माला का बेटा वीरेंद्र अचानक लापता हो गया था। माला ने बेटे की तलाश के लिए पुलिस से मदद भी मांगी थी।

लेकिन पुलिस वालों ने अनसुना कर दिया जिसके बाद उसने  आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय से मदद मांगी कोर्ट के आदेश पर गुंटूर एएसपी सुप्रजा के नेतृत्व में जांच टीम ने विरेंद्र की तलाश शुरु की, लेकिन वो लोग माला और उसके साथी को ही विरेंद्र की हत्या करने और उसे गायब करने के आरोप में पकड़ ले गए। जिसके बाद उन्हें ये अपराध कूबूल करवाने के लिए इतना टॉर्चर किया गया कि माला की मौत हो गई, जबकि पुलिस कह रही है कि बाइक से गिरने से ये चोटे आई थी। संगठन ने सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग की है, और संदिग्ध पुलिस वालों के खिलाफ कार्यवाई करने की मांग की है। अब देखना ये होगा कि क्या सरकार इस मामले में कोई फैसला लेती है, या ये मामला भी महीनों कोर्ट में पड़ा रहेगा।

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