Dalai Lama Controversy: दलाई लामा का वो विवादित बयान, क्या बुद्ध धर्म में सुंदरता मायने रखती है?

Dalai Lama, Grammy Award
Source: Google

Dalai Lama Controversy: बौद्ध धर्म के लिए सबसे अहम माने जाने वाले तिब्बत के धर्म गुरु दलाई लामा… जो चीन के कारण काफी लंबे समय से अपने ही देश से दूर है, शांति का दूत कहलाने वाले दलाई लामा करुणा के बोधिसत्व अवलोकितेश्वर के पुनर्जन्म माने जाते हैं। दलाई लामा, जिसका शाब्दिक अर्थ होता है  ‘ज्ञान का महासागर’। इस वक्त 14वें दलाई लामा है, जिनका जन्म का नाम तेनज़िन ग्यात्सो है जो 1935 में जन्में थे। और मात्र 5 साल की उम्र में ही वो दलाई लामा चुने गए थे।

दलाई लामा विवादों में छायें

उनके दिये गए शांति के संदेश के कारण ही उन्हें 1989 में शांतिपूर्ण संघर्ष के लिए नोबेल शांति पुरस्कार मिला, लेकिन दलाई लामा के एक बयान ने उनकी छवि को काफी खराब कर दिया… हालांकि उनके अनुयायियो ने उसे उनके मजाकिया स्वाभाव का हिस्सा बताया था, लेकिन दलाई लामा के इस बयान के बाद एक सवाल उठने लगा कि क्या बौद्ध धर्म में सुंदरता मायने रखती है। सबसे पहले ये जानते है कि आखिर वो कौन सा बयान था जिसके कारण दलाई लामा विवादों में छायें।

दरअसल 2015 और 2019 में दलाई लामा ने एक इंटरव्यू में अपने आने वाले वारिस को लेकर एक बात कहीं थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर वाकई में उनका उत्तराधिकारी कोई महिला होती है तो उसे सुंदर होना चाहिए, उसे ज्यादा आकर्षक होना चाहिए, नहीं तो वो फिर ज्यादा काम की नहीं होगी। दलाई लामा , जो कि बौद्ध धर्म में सबसे अहम माने जाते है, जो कि वैराग्य को बढ़ावा देने के लिए जाने जाते है, उनका ऐसा बयान जंगल की आग की तरह काम कर गया।

लैंगिक भेदभाव और महिलाओं का वस्तुकरण

काफी विवाद उठा.. लोगो ने दलाई लामा के कैरेक्टर और महिलाओं के बौद्ध धर्म में शामिल होकर भिक्षुणी बन कर वैरागी होने पर भी सवाल खड़े हो गए, साथ ही लैंगिक भेदभाव और महिलाओं का वस्तुकरण करना बताया था..  जिसके बाद उनके कार्यलय से सफाई पेश की गई थी कि उनके बयान को सांस्कृतिक अनुवाद में गलत तरीके से बताया गया, ये किसी भी रूप में महिलाओं का अपमान करने के लिए नहीं था। बल्कि एक आध्यत्मिक गुरु के रूप में महिला के होने की सूरत में किस तरह से देखा जा सकता है उसके बारे में था।

तिब्बत में थेरवाद परंपरा को माना जाता

लेकिन ये केवल एक मजाक भर था..हालांकि उसके लिए माफी भी मांगी गई और इस जवाब को दलाई लामा का मजाकिया स्वाभाव का हिस्सा बताया था। अब सवाल ये है कि बौद्ध धर्म में बाहरी सुंधरता कितनी मायने रखती है। चुंकि दलाई लामा तिब्बत से है और तिब्बत में थेरवाद परंपरा को माना जाता है। इसलिए सबसे पहले ये जानना जरूरी है कि थेरवाद में सौंदर्य का क्या महत्व है। दऱअसल बौद्ध धर्म में महिला हो या पुरुष, जो भी भिक्षु बन रहे है, उनके लिए कुछ नियम बनाये गए है।

जिसमें सबसे पहले सिर का मुंडवाना है। क्योंकि बाहरी सुंदरता से आसक्ति होना जरूरी है। बौद्ध धर्म में बाहरी सुंदरता से ज्यादा आंतरिक सुंदरता को महत्व दिया जाता है। जिसमें हर एक भिक्षु के लिए दया, करूणा और प्रज्ञा जिसे ज्ञान कहा जाता है, अहम है।

अनुशासन का होना ही सबसे बड़ी सुंदरता

शारीरिक रूप, बाहरी सुंदरता पूरी तरह से महत्वहीन है, आत्मा का अतिम पड़ाव मुक्ति है, ज्ञान है, मोक्ष है, जो केवल ध्यान के बल पर ही प्राप्त किया जा सकता है। बौद्ध धर्म का कोई भी समुदाय हो, महायान या थेरवाद, सभी में बाहरी आडंबर और बाहरी सुंदरता को मिट्टी के बराबर समझा जाता है। आत्म अनुशासन का होना ही सबसे बड़ी सुंदरता है। बौद्ध धर्म में माना जाता है हमारा शरीर जिससे हम इतना मोह करते है वो समय से साथ खत्म हो जाता है, लेकिन जो करूणा, दया और सद्भाव आप दिखाते है वो आपके न होने पर भी जीवित रहता है।

इसलिए बाहरी शरीर की सुंदरता से मोह व्यर्थ है। जब तक इस शरीर से मोह रहेगा, तब तक कोई बौद्ध भिक्षु नहीं बन सकता, तब तक परिनिर्वाण नहीं पा सकता है। मनुष्य को अपने पांचो अवगुणों से मुक्ति मिलने पर ही बुद्ध की प्राप्ति होती है। यानि की दलाई लामा के बयानों से भले ही विवाद हुआ हो, लेकिन इसने दो सवाल खड़े किये है।   पहला आखिर क्यों कोई महिला दलाई लामा नहीं बन सकती है, जैसा कि अब तक नहीं हुआ है, वहीं क्या दलाई लामा के महिला उत्तराधिकारी को लेकर जो विचार थे, तो वो किस आधार पर उत्तराधिकारी चुनी जानी चाहिए। आप स्वयं विचार कीजिये।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *