Chandrashekhar Azad news: चंद्रशेखर आज़ाद पिछले कुछ दिनों से लगातार सुर्खियों में रहे हैं—कभी विवादों की वजह से तो कभी अपनी पार्टी के अंदरूनी झगड़ों के कारण—लेकिन इस बार मामला कुछ अलग है; आज़ाद ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि हरियाणा में अंबेडकर लाइब्रेरी का नाम न बदला जाए। उन्होंने सरकार को भी निशाना बनाया है।
भीम आर्मी चीफ ने राष्ट्रपति को लिखी चिट्ठी
भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद को लेकर एक खबर सामने आई है, जिन्होंने हरियाणा में डॉ. बी.आर. अंबेडकर ( Dr. B.R. Ambedkar) लाइब्रेरी का नाम बदल कर अटल पुस्तकालय किए जाने के फैसले के खिलाफ देश को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु (President Draupadi Murmu) को पत्र लिख कर नाम। बदलने के फैसले को निरस्त करने की मांग की है। आजाद ने अपनी चिट्ठी में लिखा कि बाबा साहब के नाम से चलने वाली लाइब्रेरी केवल नाम तक सीमित नहीं है बल्कि वो करोड़ों वंचितों, गरीबों, शोषित और पिछड़ों की भावनाओं से जुड़ा है।
बाबासाहेब का अपमान,बिल्कुल बर्दाश्त नहीं!
हरियाणा में ‘डॉ. बी.आर. अंबेडकर लाइब्रेरी’ का नाम बदलने का तानाशाही फैसला बेहद शर्मनाक है। यह केवल एक नाम बदलना नहीं, बल्कि शोषितों-वंचितों की अस्मिता और बाबासाहेब की गौरवशाली विरासत को मिटाने का सुनियोजित प्रयास है।
इस अन्याय के खिलाफ… pic.twitter.com/vCNsIKVFkB
— प्रीतम कुमार बौद्ध (@Pritamkrbauddh) June 11, 2026
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बाबा साहब के राज्य में सैकड़ों ई लाइब्रेरी
वहीं बाबा साहब का नाम शामिल होना ही उनकी विरासत का हिस्सा है, लेकिन इस तरह नाम से बदलाव करने के पीछे का क्या कारण है। आजाद ने कहा कि बाबा साहब के सम्मान में राज्य में सैकड़ों ई लाइब्रेरी बाबा साहब के नाम से शुरू किए गए थे, जो को सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक सम्मान का प्रतीक है लेकिन इनका नाम बदलना केवल इशारा है कि बाबा साहब (Baba Saheb) की विरासत को खत्म करने की बड़ी साजिश चल रही है ।
मगर वो ऐसा नहीं होने देंगे, इसलिए लिए उन्होंने चिट्ठी लिख कर राष्ट्रपति से अर्जी की है। अब देखन ये होगा कि राष्ट्रपति का इसपर क्या फैसला आता है वहीं सवाल ये भी उठता है कि आखिर बाबा साहब के नाम से बने लाइब्रेरी को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है। आखिर सरकार करना क्या चाहती है।



