Top 5 Dalit news: दलितों को परेशान करने के लिए, उनका उत्पीड़न करने के लिए अकसर जातिवादी मानसिकता के लोग उनके मसीहा बाबा साहब आंबेडकर को निशाना बनाने की कोशिश करते है, लेकिन अब समय आ गया है कि उन्हें ये समझा दिया जाए कि जब तक एक भी दलित भारत की धरती पर है तब तक बाबा साहब के नाम की चमक कम नहीं होगी। तो चलिए आपको पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाले घटनाओं के बारे में बतायेंगे, जो जागरूक कर रही है समाज के हर दबे कुचले लोगों को, जिन्हें अपनी ताकत का आज भी अंदाजा नहीं है।
भीम आर्मी चीफ ने राष्ट्रपति को लिखी चिट्ठी
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को लेकर है, जिन्होंने हरियाणा में डॉ. बी.आर. अंबेडकर लाइब्रेरी का नाम बदल कर अटल पुस्तकालय किए जाने के फैसले के खिलाफ देश को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र लिख कर नाम।बदलने के फैसले को निरस्त करने की मांग की है। आजाद ने अपनी चिट्ठी में लिखा कि बाबा साहब के नाम से चलने वाली लाइब्रेरी केवल नाम तक सीमित नहीं है बल्कि वो करोड़ों वंचितों, गरीबों, शोषित और पिछड़ों की भावनाओं से जुड़ा है। वहीं बाबा साहब का नाम शामिल होना ही उनकी विरासत का हिस्सा है, लेकिन इस तरह नाम से बदलाव करने के पीछे का क्या कारण है।
आजाद ने कहा कि बाबा साहब के सम्मान में राज्य में सैकड़ों ई लाइब्रेरी बाबा साहब के नाम से शुरू किए गए थे, जो को सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक सम्मान का प्रतीक है लेकिन इनका नाम बदलना केवल इशारा है कि बाबा साहब की विरासत को खत्म करने की बड़ी साजिश चल रही है । मगर वो ऐसा नहीं होने देंगे, इसलिए लिए उन्होंने चिट्ठी लिख कर राष्ट्रपति से अर्जी की है। अब देखन ये होगा कि राष्ट्रपति का इसपर क्या फैसला आता है वहीं सवाल ये भी उठता है कि आखिर बाबा साहब के नाम से बने लाइब्रेरी को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है। आखिर सरकार करना क्या चाहती है।
अमरोहा में दूसरी कक्षा में पढ़ने वाली बच्ची के साथ दुष्कर्म
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के अमरोहा से है, जहां एक दूसरी कक्षा में पढ़ने वाली मासूम दलित छात्रा के साथ उसके घर के बाहर से ही बहला फुसला कर पहले अगवा किया गया और फिर आरोपी ने बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाया था। लेकिन जैसे ही इस घटना की खबर सामने आई, पुलिस के कान खड़े हो गये। पुलिस ने मात्र 3 दिनों के अंदर आरोप पत्र दायर कर दिया है। वहीं आरोपी दूसरे समुदाय का था, इसलिए आरोपी के खिलाफ कार्यवाही करते हुए देर रात उसके घर पर बुलडोजर चलवा दिया गया, अब आरोपी भी पुलिस की गिरफ्त में है। बता दें कि ये घटना अमरोहा के हसनपुर के रहरा थाना क्षेत्र के एक गांव की है।
पीड़िता अपने घर के बाहर खेल रही थी तभी आरोपी बच्ची को बहला फुसला कर खेतों में ले गया, जहां उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। जब बच्ची बुरी तरह से लहूलुहान हो गई तो वो बच्ची को खेतो में ही छोड़कर फरार हो गया। वहीं पीड़िता किसी तरह अपने घर पहुंची, और घर वालों को आपबीती सुनाई।
परिवार पीड़िता की हालत देखकर सीएचसी अस्पताल में भर्ती कराया था लेकिन उसकी हालत बिगड़ने लगी तो उसे हायर अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस ने इस मामले ने कोई लापरवाही नहीं बरती, और तुरंत कार्यवाही करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और 72 घंटे के अंदर आरोपपत्र भी दाखिल कर दिया। फिलहाल आरोपी जेल में है, अब देखना ये होगा कि कोर्ट उनके खिलाफ सजा का ऐलान कब करेगी।
बिहार में दलित बच्चियों की तस्करी का पर्दाफाश
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला बिहार से है जहां से गरीब और दलित महिलाओं को तस्करी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। दरअसल पिछले दो सालों में बिहार से नौकरियों, शादी ,दोस्ती या अच्छी जिंदगी जीने के झूठे वादे करके बहला फुसला कर उन्हें दूसरे राज्यों में लाया जाता है और फिर या तो उन्हें बेच दिया जाता है या फिर उनकी इच्छा के विरुद्ध बंधुआ मजदूरी करने, जबरन शादी करने के लिए मजबूर किया जाता है। इसमें सबसे ज्यादा शिकार ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों की गरीब और दलित परिवारों की बच्चियों को बनाया जा रहा है। इस मामले में अब बिहार पुलिस और सामाजिक संगठनों ने बच्चों को बचाने के मुहिम तेज कर दी है, लेकिन जो आकड़े सामने आए है वो बेहद चौंकाने वाले है।
पुलिस ने बताया कि इस वक्त बिहार में एक संगठित त्रिस्तरीय मानव तस्करी नेटवर्क काफी सक्रिय है। जो 18 साल से कम उम्र के बच्चों को अपना निशाना बना रहे है। जिसमें 60 प्रतिशत तो 18 साल से कम उम्र की लड़कियां शामिल है। सरकारी आंकड़े बताते है हर साल बिहार से 12 हजार से 14 हज़ार बच्चे गायब हो रहे है। इन सनसनीखेज आंकड़ों के सामने आने के बाद अब बिहार में दलित और पिछड़े वर्ग की बच्चियों की सुरक्षा पर लगने वाली सेंध का भी पर्दाफाश हो गया है ऐसे में देखन ये होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है या दलितों की जिंदगी की सच में कोई कीमत नहीं है।
भीम आर्मी चीफ की एक्स गर्लफ्रेंड का बड़ा खुलासा
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद की तथाकथित एक्स प्रेमिका रोहिणी घावरी के इस खुलासे को लेकर है, जिसमें उन्होंने आजाद और विनय रतन सिंह के बीच चल रही खटपट की असली वजह बताई है। एक तरफ आजाद विनय रतन से अपने रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहे है तो वहीं रतन ने सीधा कहा कि आजाद ने उनका मंचों पर इतना अपमान किया कि उन्हें खुदकुशी करने की इच्छा होने लगी है, तो वहीं भीम आर्मी किसी तरह चुनावी माहौल में इस मामले में शांत करने की कोशिश कर रही थी मगर अब आग में घी डालने का काम किया है रोहिणी घावरी ने।
दरअसल घावरी ने एक वीडियो जारी कर बताया कि विनय रतन और आजाद के बीच इस लड़ाई की वजह पुरकाजी सीट है। विनय रतन इस सीट से लड़ना चाहते है लेकिन आजाद तैयार नहीं है क्योंकि ये सीट राष्ट्रीय लोक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी की है। और जयंत चौधरी ही चंद्रशेखर को BJP में लेकर गए और लोकसभा सीट जीताने और सांसद बनने में बहुत मदद की थी तो चंद्रशेखर जयंत चौधरी के खिलाफ कभी नहीं जाएंगे भले विनय रतन भाड़ में जायें।
घावरी के इस खुलासे के बाद अब आजाद पर सवाल उठने लगे है कि क्या वाकई में आजाद ने बीजेपी से मिलीभगत की है जीत के लिए। और विनय रतन की नाराजगी का वजह क्या है। घावरी के आरोपों में कितनी सच्चाई है ये तो चुनाव होने के बाद साफ हो ही जाएगा, लेकिन इस तरह के खुलासों के बाद क्या विनय रतन घावरी की बातों की पुष्टि करते है या नहीं ये देखने वाली बात होगी, या फिर वो भी आजाद की तरह चुप ही रहने वाले है। वैसे आपको क्या लगता है क्या विनय रतन को इसका जवाब देना चाहिए।
शिवपुरी में दलित नाबालिग बच्ची पर जानलेवा हमला
5, दलितों से जुड़ा अगला मामला मध्य प्रदेश के शिवपुरी से है जहां एक 15 साल की नाबालिग बच्ची पर जातिगत दुश्मनी निकालने के लिए दिनदहाड़े जानलेवा हमला किया जाता है, लेकिन पुलिस अब भी नींद से नहीं जागी। ये मामला शिवपुरी जिले की पिछोर तहसील का है, जब 5 जून 2026 को पीड़िता पर हमला किया गया था जिससे वो गंभीर रूप से घायल हो गई थी, पीड़िता अब भी ग्वालियर के अस्पताल में भर्ती है। लेकिन हैरानी की बात है कि घटना के इतने दिन बीतने के बाद भी पुलिस ने अब तक आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है,
पुलिस के इस लचर रवैये से अखिल भारतीय कोली समाज और अन्य सामाजिक संगठनों ने अपना गुस्सा जाहिर किया और सीएम के नाम कलेक्टर को ज्ञापन दिया है। उन्होंने पीड़ित परिवार के लिए न्याय की मांग करते हुए सुरक्षा की मांग की है। साथ ही पीड़िता के लिए उचित इलाज की मांग की है। वहीं इस मामले में लापरवाही बरतने वाले पुलिस के खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही करने की मांग की है। बता दें दलित बच्ची पर हुए हमले को एक सफ्ताह हो चुका है लेकिन अब तक आरोपियों के नाम तक सामने नहीं आए है। जिसने राज्य की पुलिस का कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। वहीं अगर पीड़ित दलित न होते तो अब तक तो आरोपी जेल के सलाखों के पीछे होते।



