Top 5 Dalit News: क्या जातिवादी मानसिकता किसी की जान से भी बढ़ कर हो सकती है, शायद हो सकती है अगर वो जान किसी दलित और पिछड़े की हो, भले ही सख्त कानून बना दिये गए हो, लेकिन आज भी उस मानसिकता के खिलाफ कोई कानून नहीं है जो जाति के नाम पर उन्हें अपनी बराबरी का तो छोड़िये, मानवो की श्रेणी में भी नहीं रखते है। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में जानेंगे जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है, जो साक्षी है कि दलित भले ही तरक्की कर लें लेकिन पहचान उनकी जाति से ही होगी।
टिहरी गढ़वाल में दलित युवक की हत्या का मामला गर्माया
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल से है, जहां एक दलित युवक अपनी प्रेमिका से क्या मिलने पहुंचा, लड़की के परिवार ने मानवता की सारी हदें पार कर दी थी.. युवक को इतनी बेरहमी से टॉर्चर किया कि अस्पताल जाने से पहले ही उसकी मौत हो गई थी, लेकिन अब इस मामले में कई सनसनीखेज खुलासे हुए है। पुलिस छानबीन में साफ हुआ है कि मृतक केतन को मिलने के लिए उसकी प्रेमिका ने भले ही बुलाया था लेकिन उसके पीछे साजिश उसके पिता की थी।
उसके पिता ने ही लड़की को धमकी देकर केतन को बुलाने के लिए कहा था, लड़की ने डर कर केतन को बुलाया तो वहां लड़की के परिवार वालों ने केतन को घेर लिया और उसे कमरे में बंद करके बुरी तरह से पीटा। इतना ही नहीं केतन के पैरों के नाखून उखाड़े गए, उसे पैरो में कील ठोक दी गई..उसके कमर, पीठ और पेट पर भी गंभीर चोटो के निशान मिले। वहीं केतन ने मरने से पहले पिता को सच्चाई बताई थी कि कैसे लड़की और उसके पिता ने साजिश की थी। किसी तरह केतन का पोस्टमार्टम हुआ लेकिन परिवार वालों ने साफ कहा है कि जब तक उनके बेटे के हत्यारें पकड़े नहीं जायेंगे तब तक वो अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।
हालांकि पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए लड़की के पिता विद्या सिंह पवार औऱ एक नामजद आरोपी यशवीर सिंह पवार को गिरफ्तार कर लिया है औऱ बाकियों की तलाश कर रहे है, लेकिन इस एक घटना ने कानून व्यवस्था की मिट्टी पलीत करके रख दी है। केवल दूसरी जाति से होने के कारण एक युवक के साथ ऐसी बर्बरता क्या एक 18 साल का लड़का डिजर्व करता था। आखिर दलित होने के कारण कब तक समाज के कुछ जातिवादी आतंकी उनका शोषण करते रहेंगे, और क्यों तब उन्हें कानून का डर नहीं होता.. क्या वाकई में इतना कमजोर है कानून।
धारवाड़ में लव जिहाद से तंग आकर दलित बच्ची ने की खुदकुशी
2, दलितो से जुड़ा अगला मामला कर्नाटक के धारवाड़ से है, जहां मुस्लिल लड़के द्वारा रोज रोज की छेड़छाड़, और प्रताड़ना से तंग आकर एक नाबालिग दलित बच्ची ने खुदकुशी कर ली.. लेकिन हैरानी की बात तो ये है कि एक मासूम की जिंदगी खत्म हो गई और पुलिस अभी भी हाथ पर हाथ धरे बैठी है। ये मामला धारवाड़ जिले के गराग पुलिस स्टेशन क्षेत्र का है। दरअसल दलित बच्ची ने पिछले महीने 8 मई को ही तब आत्महत्या कर ली जब आरोपी नईम बेग ने उसका बुर्का पहने हुए एक तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर कर दी थी।
पीड़िता लगातार हो रही प्रताड़ना से तंग आ गई थी, और पिक्चर के सामने आने के बाद उसने अपनी जीवन लीला ही समाप्त कर ली.. मृतका के माता पिता ने पुलिस को तहरीर दी कि उनकी बेटी को नईम बेग नाम के एक शख्स ने अपने प्रेम जाल में फसा रखा था, वो उसे इस्लाम धर्म के अनुसार रहने के लिए दवाब देता था, इसी दैरान वो लड़की को बुर्का पहना कर कहीं ले गया था, जहां लड़की के माता पिता ने उसे पहचान लिया था, जिसके बाद उन्होंने सलाह दी थी कि वो नईम बेग से दूर रहे। लड़की ने उनकी बात भी मान ली थी, लेकिन आरोपी लगातार उसे तंग कर रहा था.. जिससे उसे बदनाम होने का डर सताने लगा..।
और जब तस्वीर वायरल हुई तो उसने लव जिहाद होने के डर से आत्महत्या कर ली। करीब एक महीना हो गया है लेकिन पुलिस ने अब तक इस मामले में कोई कार्यवाई नहीं की है, और न ही युवक के खिलाफ कोई एक्शन लिया है जैसे खुद पुलिस आरोपी को बचाने की कोशिश कर रही है। अब पीड़ित परिवार ने दलित संगठन से मदद की गुहार लगाई है, अब देखना ये होगा कि क्या दलित संगठन के आगे आने के बाद पुलिस नींद से जागेगी.. और आखिर कब तक दलित बच्चियों की लव जिहाद के नाम पर बलि दी जायेगी।
बलरामपुर में अपने बच्चो को डांट कर उटाना पड़ा भारी
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के बलरामपुर से है, जहां एक दलित युवक का अपने ही बच्चे को जोर जोर से डांट कर उठाना, जातिवादियों आतंकियों को अपना अपमान लगा कि उन लोगो ने दलित मजदूर को लाठी डंडो और रॉड से पीट पीट कर अधमरा कर दिया। ये मामला बलरामपुर के हरैया थाना क्षेत्र के मोतीपुर गोसाईं का है। पीड़ित मजदूर अक्षय पासवान ने पुलिस को तहरीर दी कि 17 मई की सुबह करीब 7 बजे वो अपने बच्चों को डांट कर उठा रहा था, तभी वहां से जा रहे कुछ उंची जाति के लोगों ने उस पर आरोप लगाया कि वो उनके खिलाफ जोर जोर से बोल रहा है, और उन्हें गालियां दे रहा है, हालांकि अक्षय ने उन लोगो को समझाने की भी कोशिश की कि वो अपने बच्चों को बोल रहा था, लेकिन वो लोग नहीं माने और उसे जातिसूचक गालियां देते हुए उस पर हमला कर दिया।
इस हमले मे वो बुरी तरह से घायल हो गया था, शोर सुनकर जब गांव वाले जमा होने लगे तो आरोपी भाग खड़े हुए.. पीड़ित ने बताया कि ईलाज के बाद उसने पुलिस कंम्प्लेन की थी, जिसमें गांव के ही राम अचल यादव, लवकुश, कैलाश औऱ केशव के खिलाफ मामला दर्ज कराया था, लेकिन हैरानी की बात है कि इतने दिन बीतने के बाद भी पुलिस अब भी केवल जांच ही कर रही है, न तो किसी की गिरफ्तारी हुई है औऱ न ही किसी कार्यवाई की कोई रिपोर्ट पीड़ित को दिखाई गई है। अब देखना ये होगा कि वाकई में कोई कार्यवाई चल रही है या आरोपियों के फरार होने के बाद मामले को रफा दफा करने की प्लानिंग चल रही है।
भीम आर्मी चीफ ने यूपी की जनता को दी चेतावनी
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को लेकर है, जिन्होंने सत्ता परिवर्तन यात्रा के दौरान 33 ऐसे मुद्दों की चर्चा की है जो वो यूपी के जनता के लिए करना चाहते है.. जो उनकी प्रायोरिटी पर होने वाले है। आजाद ने यूपी की जनता से अपील की है कि अगर वो वाकई में यूपी में बदलाव चाहते है, रोजगार चाहते है, तो जरूरी है कि सरकार में बदलाव आये। क्योंकि अब भी अगर जनता नहीं जागेगी तो अगले पांच सालों में राज्य में संविधान के मायने के बदल जायेंगे। युवाओं के पास रोजगार नही होगा..शिक्षा नहीं होगी.. होगी तो केवल अरजकता।
उन्होंने कहा कि अभी मौका है सरकार बना लो वरना 5 साल “अन्य अत्याचार” सहना पड़ेगा। आजाद ने खुले तौर पर बीजेपी की सरकार को बदलने का आहवान जनता से कर दिया है। हालांकि आजाद की बढ़ती लोकप्रियता से तो ऐसा लग रहा है कि आजाद इस बार कोई बड़ा बदलाव करने वाले है, उनके वादें लोगो को उनकी तरफ आकर्षित कर रहे है, ऐसे में देखना ये होगा कि क्या आजाद की ये गूंज यूपी की जनता के कानों तक पहुंचेगी.. और क्या यूपी से बीजेपी का पत्ता साफ होने वाला है। वैसे आपको क्या लगता है.. क्या जनता इस बार आजाद को सिर आंखो पर बिठा कर सीएम की कुर्सी पर उन्हें काबिज करेगी।
सिहोर में भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष पर हमला
5, दलितों से जुड़ा अगला मामला मध्य प्रदेश के सिहोर से है, जहां जातिवादियों की हिम्मत इतनी बढ़ गई है कि सरेआम भीम आर्मी जिलाध्यक्ष मुकेश आजाद पर जानलेवा हमला किया गया है, लेकिन पुलिस से बार बार कार्यवाई करने की अपील करने के बाद भी उनकी कानो पर जूं नहीं रेंगी। ये मामला सिहोर के रहटी पुलिस थाना अंतर्गत आने वाले बनिया गांव का है। पुरानी रंजिश के तहत हुए इस हमले में मुकेश आजाद के हाथ पैर तोड़ दिये गए है, और उनके सिर पर भी गंभीर चोट आई है, वहीं जब भीम आर्मी के कार्यकर्ता सुनील आस्तेय ने पुलिस को इसकी जानकारी दी तो पुलिस की लचर रवैया का पर्दाफाश हो गया।
हमला होने के 2 घंटे बाद भी पुलिस घटनास्थल पर नहीं पहुंची.. पीड़ित मुकेश आजाद की हालात गंभीर बनी हुई है, सुनील आस्तेय ने सीधा पुलिस की कार्यवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या पुलिस जानबूझ कर इतनी लापरवाही कर रही है ताकि भीम आर्मी के एक अहम कार्यकर्ता की मौत हो जायें.. .ये सरासर पुलिस की लापरवाही का नतीजा है जो इस मामले में पल्ला झाड़ रही है.. या शायद आरोपियों के रसूख के कारण पुलिस भी इस मामले में हाथ नहीं डालना चाहती है, अब जो भी हो,, देखना ये होगा कि इस मामले में जब शुरु में लापरवाही हो रही है तो क्या मामले की निष्पक्ष जांच होगी।



