BNS Section 345: संपत्ति के निशान से छेड़छाड़ पड़ेगी भारी, जानें क्या कहता है नया कानून

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345 BNS in Hindi: अक्सर चल संपत्ति के बारे में खबरें आती हैं कि उस पर लगा निशान नकली है, या उस निशान का इस्तेमाल धोखाधड़ी से किया गया है। तो क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसे मामले में BNS का कौन सा सेक्शन लागू होता है और ऐसे मामले में किस तरह की सज़ा होगी? तो चलिए हम आपको बताते हैं, अगर ऐसा किया जाता है तो भारतीय न्याय संहिता (BNS) का सेक्शन 345 लागू होता है। तो चलिए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सज़ा का प्रावधान है और BNS में इसके बारे में क्या कहा गया है।

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धारा 345 क्या कहती है? BNS Section 345 in Hindi

आज के समय में, टेक्नोलॉजी का दुरूपयोग इतना ज्यादा बढ़ गया है कि ऑनलाइन धोखाधड़ी से लेकर नकली सर्टिफिकेट बनान मिटाना तो बाएं हाथ का खेल बन गया है। लेकिन पकडे जाने पर कड़ी सजा भी होती है… वही जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस (BNS) की धारा 345 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं।

भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 345 यह सेक्शन उस व्यक्ति पर लागू होता है जो कोई व्यक्ति जान-बूझकर और धोखा देने के इरादे से किसी की चल संपत्ति पर बने निशान का इस्तेमाल किसी और की संपत्ति पर नकली निशान के तौर पर करता है।

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BNS section 345 important points 

  • यह सेक्शन पुराने कानून के सेक्शन 479 से 482 से जुड़ा है, जिन्हें नए नियमों के साथ BNS एक्ट के तहत लागू किया गया है।
  • एक निशान जो बताता है कि चल संपत्ति (माल, पैकेजिंग, बक्से) किसी खास व्यक्ति की है, उसे प्रॉपर्टी मार्क कहते हैं।

BNS section 345 Example

मान लीजिए श्याम नाम का कोई युवक नकली प्रॉपर्टी मार्क का इस्तेमाल करता है, तो उसे एक साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं, जब तक कि वह यह साबित न कर दे कि उसका इरादा धोखा देने का नहीं था।

बीएनएस धारा 345 की और सजा

इसके अलावा, BNS की धारा 345 यह तब लागू होती है, जब कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी के प्रॉपर्टी मार्क के साथ छेड़छाड़ करता है या गलत जानकारी देता है। तो इस सेक्शन के तहत दोषी पाए जाने पर आरोपी को crime करने पर 1 साल की कैद और जुर्माना होता है। आपको बता दें, यह एक गैर-संज्ञेय (non-cognizable) अपराध है, इसलिए पुलिस को जाँच के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति चाहिए होती है। इस अपराध में जमानत मिलना भी काफी मुश्किल हैं। वही पुलिस इस अपराध के लिए बिना वारंट के भी आरोपी को गिरफ्तार कर लेती है।

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