शिक्षित संगठित और आंदोलित,बाबा साहब के वो तीन शब्द जिन्होंने बदली करोड़ों की तकदीर

Ambedkar Gatha, Dr. B.R. Ambedkar's Gurus
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बाबा साहब अंबेडकर ने समाजिक सुधार और जातिवाद को खत्म करने के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाये थे, पूना पैक्ट हो, महार आंदोलन हो या फिर हिंदू धर्म छोड़ने की घोषणा.. सबकु भारतीय समाज में फैली जातिवादि मानसिकता और समाजिक भेदभाव के खिलाफ लड़ने वाली लड़ाई का ही हिस्सा था… उन्होंने अपने जीवन में सबसे ज्यादा शिक्षा को महत्व दिया,, भले ही उन्हें बचपन से हीन, नीच औहर अछूत समजा जाता हो, उन्हें अपनी कक्षा से अलग बैठना पड़ता, सुबह से शाम कर पानी की एक बूंद के लिए तरसते रहते लेकिन कोई दया नहीं करता।

संविधान निर्माता भारत रत्न कैसे बने

मगर बाबा साहब ने हार नहीं मानी.. वो तपते रहे.. और इसी तपन ने उन्हें कुंदन बनाया.. वो संविधान निर्माता भारत रत्न बन पाये..लेकिन हर कोई बाबा साहब जैसै ढृढ़ निश्चयी तो नहीं हो सकता है..लेकिन बाबा साहब की प्रेरणा जरूर लोगो में आत्मविश्वास पैदा कर सकती है.. और इसी लिए उन्होंने दलित पिछड़े अछूत समाज के लिए तीन प्रमुख संदेश दिया था। जिसपर चल कर ही दलितों की स्थित बदली जा सकती है। अपने इस लेख में हम जानेंगे कि क्या थे बाबा साहब के वो नारे.. क्या था वो दलितों के लिए संदेश।

क्या था बाबा साहब का –Three keys principles

बाबा साहब ने जिस तरह से सदैव शिक्षा को महत्व दिया.. उनका नारा भी पिछड़ो की शिक्षित करने की दिशा में ही था। शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो।।.. ये बाबा साहब के Three keys principles कहलाते है। बाबा साहब ने इन नारो के जरिये पिछड़े और शोषित समाज को सबसे पहले शिक्षा का महत्म समझने की सीख दी है, क्योंकि शिक्षा ही आपको सभ्य और सामाजिक बनाती है।

शिक्षा के आधार पर ही आपको सही गलत का फर्क समज आयेगा, आप किसी के बरगलाने पर चलने के बजाय खुद के हितो के लिए संगठित होने लगेंगे। आपकी संगठित होना ही आपको ताकतवर बनायेगा, आपकी शिक्षा आपको आत्मसम्मान का सही अर्थ समझायेगी।

बाबा साहब की प्रेरणा आज दुनिया भर में

बाबा साहब की ये प्रेरणा आज दुनिया भर में केवल दलित और पिछड़ो के लिए ही नहीं बल्कि अन्य शोषित वर्गो के लिए भी हौसला देने वाला काम करती है। बाबा साहब ये भी मानते थे कि अगर आपको हक चाहिए तो मांगने से नही मिलने वाला बल्कि उसके लिए आपको संघर्ष करना ही होगा.. लड़ना ही होगा..

लेकिन जिस तरह से अकेला चमा भाड़ नहीं फोड़ सकता है वैसे ही चाहे वो अकेले बाबा साहब की क्यों न होते, वो दलितो के लिए अकेले संघर्ष नही कर पाते.. एक सदियों पुरानी कुरीती एक या दो दिन के संघर्ष से नहीं बदलने वाली है।

बाबा साहब का नारा दलित पिछड़े युवाओं को प्रेरित करेगा

लेकिन हां, सहीं शिक्षा, संगठित होकर संघर्ष करने से एक न एक दिन बदलाव जरूर आयेगा। बाबा साहब का ये नारा दलित पिछड़े युवाओं को प्रेरित करेगा न्याय, शिक्षा और सकारात्मक बदलाव लाने के लिए..बाबा साहब ने केवल दलित पुरुषों को ही नहीं उनकी महिलाओं के लिए भी आगे बढ़ने, उन्हें शिक्षित करने के लिए प्रेरित करने को कहा है। बाबा साहब ने खुद एक बार कहा कि वो किसी भी समाज की प्रगति का मापतोल उस समाज की महिलाओ की स्थिति देखकर करते है।

महिलाओं को भी शिक्षित करों

किसी समाज में महिलाएं कितना आजाद, कितना शिक्षित है, उनकी भागीदारी कितनी अहम है, महिलाओं की प्रगति ही उस समाज की सही प्रगति को बता देती है। इसलिए अगल दलित समाज वाकई में चाहता है कि वो आगे बढ़े, मजबूत हो, तो जरूरी है कि वो अपनी महिलाओं को भी शिक्षित करों। संघर्ष और आंदोलन के जरिए आप सत्ता, ताकत और सम्मान पा सकते है। आपका आत्मनविर्भर होना ही आपको आत्मविश्वासी बनाता है..

बाबा साहब की प्रेरणामयी बातें

आज जो दलितो की स्थिति है, उसके लिए भीले ही हम जिम्मेदारा न हो, लेकिन अगर हमने अब समाज में बदलाव लाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया, हम भी हमारी पिछली पीढ़ियो की तरह उदासीन बने रहे.. तो ये संघर्ष कभी खत्म नहीं होगा.. सभी ऐसा ही सोचते रहेंगे, और संघर्ष जारी रहेगा। बाबा साहब की प्रेरणामयी बातों ने ही आज के समय में दलितो के प्रति सामाजिक सोच को बदलने में अहम भूमिका निभाई है, ऐसे में अगर वाकई में सभी दलित पिछड़े संगठित हो जायें तो वो बड़े बदलाव को जन्म दे सकते है।

 

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