Kalita Majhi: बीते दिन , बंगाल में BJP ने सरकार बनाई—यह एक ऐतिहासिक जीत है, उस राज्य में जहाँ ममता बनर्जी की पार्टी, TMC, पिछले 15 वर्षों से शासन कर रही थी। इस बीच, एक और कहानी सामने आई है, जिसमें एक दलित महिला—जो घरों में बर्तन धोने का काम करती थी. उन्होंने BJP के टिकट पर चुनाव लड़ा और ज़बरदस्त जीत हासिल कर विधानसभा सदस्य बन गई.
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घरो में बर्तन-चौका करने वाली महिला बनी विधायक
क्या आप यकीन करेंगे कि चार घरों में बर्तन-चौका करने वाली एक महिला अब पश्चिम बंगाल की विधायक बन गई हैं. जी हां, कल तक जो हाथ दूसरों के घरों में बर्तन साफ करते और फर्श साफ करते थे, आज उन्हीं हाथों में जनता ने अपनी किस्मत की चाबी सौंप दी है…कलिता, जो महीने के महज 2,500 कमाती हैं, आज लाखों लोगों के लिए उम्मीद की किरण बन गई हैं.. हम बात कर रहे हैं बीजेपी कलिता माझी की, जिन्होंने औसग्राम सीट (Ausgram Seat) से टीएमसी (TMC) के दिग्गज उम्मीदवार श्यामा प्रसन्ना को 12,500 से ज्यादा वोटों से हराकर इतिहास रच दिया है.
कलिता माझी को कुल 107,692 वोट मिले, जबकि श्यामा प्रसन्ना को सिर्फ़ 95,157 वोटों से ही संतोष करना पड़ा. इसके अलावा, CPI(M) के चंचल कुमार माझी को 16,478 वोट मिले, कांग्रेस के तापस बराल को 2,082 वोट मिले, और निर्दलीय उम्मीदवार निहार कुमार हाजरा को महज़ 994 वोट ही मिल पाए.
लोकतंत्र में आम आदमी की ताकत
सांसद पी. सी. मोहन (MP P. C. Mohan) ने भी कलिता (Kalita) की तारीफ करते हुए इसे बीजेपी और आम नागरिक की ताकत बताया है. संघर्षों से भरी जिंदगी और सीमित संसाधनों के बावजूद कलिता ने साबित कर दिया कि हौसले बुलंद हों तो जीत पक्की है…कलिता माझी की जीत ने यह साबित कर दिया कि लोकतंत्र में आम आदमी की ताकत क्या होती है. कलिता माझी का ये सफर आसान नहीं रह, रोज़मर्रा की ज़िंदगी की चुनौतियों से जूझते हुए उन्होंने कभी यह नहीं सोचा होगा कि एक दिन वे विधानसभा तक पहुंचेंगी..औसग्राम जैसे क्षेत्र में, जहां लंबे समय से पारंपरिक राजनीति का असर रहा है, वहां कलिता माझी की जीत सिर्फ एक सीट की जीत नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का संकेत भी मानी जा रही है.
कौन है कलिता माझी – Kalita Majhi
पश्चिम बंगाल की कलिता माझी, जिन्होंने 2026 के विधानसभा चुनावों में औसग्राम (SC) निर्वाचन क्षेत्र से BJP के टिकट पर जीत हासिल की, वह एक दलित समुदाय से आती हैं। पूर्वी बर्दवान ज़िले के काशेम नगर की रहने वाली कलिता का पारिवारिक पृष्ठभूमि बहुत ही साधारण है. वह पहले स्थानीय घरों में बर्तन धोने का काम करती थीं और गरीबी के कारण उन्हें अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी थी। BJP ने उन्हें 2021 के विधानसभा चुनावों में भी मैदान में उतारा था, लेकिन उस समय उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. हालाँकि 2026 में, उन्होंने एक बार फिर चुनाव लड़ा और एक ऐतिहासिक जीत दर्ज की. कलिता माझी को एक “ज़मीनी नेता” माना जाता है, जिन्हें आम आदमी के संघर्षों की गहरी समझ है.



