Kannur news: हाल ही में केरल से एक दिल दहला देने वाली रिपोर्ट सामने आई है, जहाँ जाति-आधारित भेदभाव के कारण मानसिक रूप से परेशान होकर एक दलित छात्र ने आत्महत्या कर ली। इस दुखद घटना के बाद से, मृतक का परिवार गहरे सदमे में है और लगातार न्याय की मांग कर रहा है; वहीं दूसरी ओर, दलित संगठनों ने भी कॉलेज प्रशासन के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त किया है।
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दलित छात्र की मौत के बाद कॉलेज प्रशासन की ढिलाई
आज भी, यदि कोई दलित छात्र आगे बढ़ना चाहता है और उच्च शिक्षा प्राप्त करने की आकांक्षा रखता है। विशेष रूप से किसी प्रतिष्ठित कॉलेज में दाखिला लेकर तो यह मनुवादी मानसिकता रखने वालों की आँखों में खटकने लगता है। वे दलित समुदाय से आने वाले छात्रों को परेशान करना और सताना शुरू कर देते हैं; यह उत्पीड़न इतनी चरम सीमा तक पहुँच जाता है कि छात्र अपनी जान देने पर मजबूर हो जाते हैं। ऐसा ही मामला केरल के कन्नूर जिले (Kannur District) से है, जहां जातिगत भेदभाव से तंग आकर आत्महत्या करने वाले दलित छात्र की मौत के बाद भी कॉलेज प्रशासन की तरफ से होने वाली ढिलाई को लेकर आखिरकार दलित संगठन (Dalit Organizations) का गुस्सा फूट पड़ा।
दलित संगठन ने किया आन्दोलन
दलित संगठन और बसपा (BSP) के कार्यकर्ता ने अंचरककंदी डेंटल कॉलेज (Anjarakandy Integrated Campus) में विभागाध्यक्ष डॉ॰ राम द्वारा नितिन राज (Nitin Raj by Dr. Ram, Head of Department) का कथित रूप से जातीय आधार पर उत्पीड़न किये जाने के सबूत मिलने के बाद भी कोई कार्यवाई या गिरफ्तारी न किये जाने को लेकर कॉलेज के बाहर धरना प्रदर्शन किया।
बसपा का विरोध प्रदर्शन ->
केरल के कन्नूर जिले स्थित अंचरककंदी डेंटल कॉलेज में विभागाध्यक्ष डॉ॰ राम द्वारा छात्र नितिन राज का कथित रूप से जातीय आधार पर उत्पीड़न किए जाने के कारण छात्र ने आत्महत्या कर ली।
इस मामले में आरोपी डॉ॰ राम की अब तक गिरफ्तारी नहीं होने पर जिले की टीम ने… pic.twitter.com/VyGPkSAVrk
— BSP (@Bsp4u) April 19, 2026
इतना ही नहीं दलित संगठन ने ये भी ऐलान किया कि अगर आरोपी के खिलाफ जल्द से जल्द उचित कार्यवाई नहीं होती तो राजधानी तिरुवनंतपुरम में बड़े स्तर पर धरना-प्रदर्शन किया जायेगा। हैरानी की बात है कि दलित छात्र खुद अवसाद में था, लेकिन उसकी मदद करने के बजया उल्टा उसे अपमानित किया जा रहा था, और जब छात्र ने आत्महत्या जैसा संगीन कदम उठा लिया तो अब कॉलेज प्रशासन उल्टा उसे ही आरोपी बता रहा है. ऐसी संस्थाओं पर हर हाल में ताला लगना चाहिए।



