343 BNS in Hindi: कई बार ऐसे भी मामले सामने आते हैं, जिनमें यह पता चलता है कि किसी ने जान-बूझकर आपको परेशान करने के लिए दस्तावेज़ छिपा दिए हैं, या शायद वसीयत से जुड़े कागज़ात छिपाकर रखे हैं। तो क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसे मामले में BNS का कौन सा सेक्शन लागू होता है और ऐसे मामले में किस तरह की सज़ा होगी? तो चलिए हम आपको बताते हैं, अगर ऐसा किया जाता है तो इंडियन पीनल कोड (BNS) का सेक्शन 343 लागू होता है। तो चलिए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सज़ा का प्रावधान है और BNS में इसके बारे में क्या कहा गया है।
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धारा 343 क्या कहती है? BNS Section 343 in Hindi
आज के समय में, टेक्नोलॉजी का दुरूपयोग इतना ज्यादा बढ़ गया है कि ऑनलाइन धोखाधड़ी से लेकर नकली सर्टिफिकेट बनाने तो बाएं हाथ का खेल बन गया है। लेकिन पकडे जाने पर कड़ी सजा भी होती है… वही जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस (BNS) की धारा 344 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं।
भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 343 यह सेक्शन उस व्यक्ति पर लागू होता है जो कोई व्यक्ति जान-बूझकर किसी जो कोई भी वसीयत, या बच्चे गोद लेने के कोर्ट आर्डर, या किसी मूल्यवान प्रतिभूति, या ऐसे किसी भी दस्तावेज़ के शरारत करता है या फिर उसे डैमेज कर देता है।
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BNS section 343 important points
- आपको बता दें, यह धारा पहले IPC 477 के समान थी जिसे अब नए नियमो के साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 343 के तहत लागू किया गया हैं।
- यह ध्यान देने योग्य है कि इसमें किसी वसीयत या मूल्यवान दस्तावेज़ को जान-बूझकर नष्ट करना, मिटाना या छिपाना शामिल है।
BNS section 343 example
मान लीजिए पुनीत किसी बच्चे को गोद लेना चाहता है; लेकिन, जब उसकी माँ को इस बात का पता चलता है, तो वह जान-बूझकर गोद लेने से जुड़े कागज़ातों को नष्ट कर देती है या छिपा देती है। यदि बाद में हुई जाँच के दौरान यह तथ्य सामने आता है और वह दोषी पाई जाती है, तो उसके विरुद्ध BNS की धारा 343 लागू होगी।
बीएनएस धारा 343 की और सजा
इसके अलावा, BNS की धारा 343 यह तब लागू होती है, जब कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी की वसीयत, कीमती दस्तावेज़ों, या अदालत द्वारा पारित आदेशों वाले दस्तावेज़ों को छिपाता है या नष्ट कर देता है। तो इस सेक्शन के तहत दोषी पाए जाने पर आरोपी को crime करने पर 7 साल की कैद और जुर्माना होता है। आपको बता दें, यह एक गैर-संज्ञेय (non-cognizable) अपराध है, इसलिए पुलिस को जाँच के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति चाहिए होती है। इस अपराध में जमानत मिलना भी काफी मुश्किल हैं। वही पुलिस इस अपराध के लिए बिना वारंट के भी आरोपी को गिरफ्तार कर लेती है।



