BNS Section 348: संपत्ति का नकली मार्क बनाने या उपकरण रखने पर होगी जेल, जानिए कानून और सजा

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348 BNS in Hindi: हम अक्सर किसी प्रोडक्ट पर लगे निशान को देखकर यह पता लगाते हैं कि वह नकली है या असली निशान? या फिर असली निशान की हूबहू नकल करने के डाई, प्लेट, या कोई मशीन बनता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि किसी के असली मार्क की नक़ल मार्क को अपने पास रखना या उसका इस्तेमाल करना सज़ा का कारण बन सकता है?  तो क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसे मामले में BNS का कौन सा सेक्शन लागू होता है और ऐसे मामले में किस तरह की सज़ा होगी? तो चलिए हम आपको बताते हैं, अगर ऐसा किया जाता है तो भारतीय न्याय संहिता (BNS) का सेक्शन 348 लागू होता है। तो चलिए इस लेख में आपको बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सज़ा का प्रावधान है और BNS में इसके बारे में क्या कहा गया है।

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धारा 348 क्या कहती है? BNS Section 348 in Hindi

आज के समय में, टेक्नोलॉजी का दुरूपयोग इतना ज्यादा बढ़ गया है कि ऑनलाइन धोखाधड़ी से लेकर नकली सर्टिफिकेट बनान मिटाना तो बाएं हाथ का खेल बन गया है। लेकिन पकडे जाने पर कड़ी सजा भी होती है… वही जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस (BNS) की धारा 348 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 348 यह सेक्शन उस व्यक्ति पर लागू होता है, जो  प्रॉपर्टी मार्क की नक़ल करने के उद्देश्य से कोई डाई, प्लेट, या अन्य उपकरण बनाता है या अपने कब्ज़े में रखता है, या किसी प्रॉपर्टी मार्क को इस उद्देश्य से अपने कब्ज़े में रखता है कि यह दर्शाया जा सके कि कोई सामान किसी ऐसे व्यक्ति का है जिसका वह असल में नहीं है।

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BNS section 348 important points 

  • आपको बता दें, कि इस धारा का उद्देश्य ब्रांड या संपत्ति की पहचान की नकल को रोकना है।
  • धोखा देने के इरादे से कोई जाली संपत्ति चिह्न बनाना, या उसका उपयोग करने के उद्देश्य से कोई मशीन या उपकरण अपने पास रखना।

बीएनएस धारा 348 की और सजा

इसके अलावा, BNS की धारा 348 यह तब लागू होती है, जब कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी के प्रॉपर्टी मार्क की नक़ल करता है और जालसाजी करके उसे अपने पास में रखता है, जबकि वो उसका नहीं है। तो इस सेक्शन के तहत दोषी पाए जाने पर आरोपी को crime करने पर 3 साल की कैद और जुर्माना होता है। या फिर दोनों होते है…आपको बता दें, यह एक गैर-संज्ञेय (non-cognizable) अपराध है, इसलिए पुलिस को जाँच के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति चाहिए होती है। इस अपराध में जमानत मिलना भी काफी मुश्किल हैं। वही पुलिस इस अपराध के लिए बिना वारंट के भी आरोपी को गिरफ्तार कर लेती है।

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