BNS Explained: धोखे से संबंध से लेकर मॉब लिंचिंग तक, क्या-क्या बदला?

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BNS Explained:  1 जुलाई 2024 को जब से भारत में 3 नए अपराध कानून को लागू किया गया है, तब से भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) के अनुसार कानूनी प्रक्रिया चलनी शुरु हो गई थी, इसके अनुसार कई बड़े बदलाव भी किये गए, जिसमें कई धाराओं को बदला गया और कई ऐसे कानून को भी अपराध की श्रैणी में रखा गया जो इंडियन पीनल कोड (IPC) 1860, क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (CrPC) 1973 और इंडियन एविडेंस एक्ट 1872 में शामिल नहीं थे।

धोखे से शारीरिक संबंध बनाना

जिसमें सबसे पहला नंबर है- धोखे से शारीरिक संबंध बनाना- भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 के अनुसार अब से छल से किसी को धोखे में रख कर शारीरिक संबंध बनाता है तो वो कानून की दृष्टि में अपराध कहलायेगा। इसमें आरोपी शादी का झांसा देकर महिला से शारीरिक संबंध बनाता है और आगे भविष्य में शादी से इंकार कर देता है तो पीड़िता को ये अधिकार होगा कि वो आरोपी के खिलाफ न्याय के लिए कानून का सहारा ले सकती है।

इसी के साथ नौकरी दिलाने और पद उन्नति देने का झांसा देकर यौन उत्पीड़न किया जाता है, तो भी आरोपी के खिलाफ कानून का सहारा लिया जा सकता है, वहीं असली पहचान छिपा कर शादी करने, भी धोखा करने के कैटेगरी में रखा जाता है। ऐसे मामले में आरोपी को दस साल तक की सजा और जुर्माने से दंडित किया जा सकता है।

वहीं भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 304(1) में पहली बार स्नेचिंग (Snatching) को भी अलग से अपराध की श्रैणी में रखा गया है। इस धारा में कहा गया कि अगर कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति की वस्तु या संपत्ति को चोरी के इरादे से हथिया लेता है, छीन लेता है या पकड़ लेता है औऱ उसे देने से इंकार करता है, तो वो धारा 304(1) के दायरे में आता है। चोरी और स्नेचिंग के मामले में आरोपी को 3-3 साल की सजा का प्रावधान है।

बीएनएस की धाराओं में लिंचिग के लिए सख्त कानून

इसके बाद बात करेंगे भारतीय न्याय संहिता (BNS), की धारा 103 (2) की, जिसे लिंचिग के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। बीएनएस की नये नियमों में जाति, नस्ल या समुदाय के आधार पर भीड़ द्वारा की गई किसी के साथ मारपीट औऱ हत्या को भी अपराध की श्रैणी में शामिल किया गया है। आपको जानकार हैरानी होगी कि पहले लिंचिग को लेकर कोई सख्त कानून नहीं थे, और भीड़ के रूप में हत्या किये जाने के बाद भी पहचान न होने के कारण अक्सर ऐसे मामले में पीड़ित को न्याय नहीं मिलता था।

और उसका परिवार कोर्ट के चक्कर लगाता रहता था, लेकिन साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया था कि वो लिंचिग द्वारा मारपीट और हत्या करने के मामले में सख्त कानून बनायें औऱ उसे अपराध की श्रैणी में रखा जायें, जिसके बाद जब सरकार ने बीएनएस की धाराओं को लागू किया तब धारा 103(2) लिंचिग के लिए लागू किया गया।

धारा 103 हत्या के लिए इस्तेमाल

जो ये बताता है कि लिंचिग अब से अपराध होगा। वहीं धारा 103 हत्या के लिए इस्तेमाल किया जाने लगा है, लिचिंग में की गई हत्या के बाद अब से उस हत्या में शामिल हर एक शख्स को बराबर का दोषी करार दिया जायेगा। इसमें 5 या उससे ज्यादा आरोपी शामिल होते है। वहीं समूह के सभी लोगो का एक उद्देश्य होना चाहिए, उक्त व्यक्ति की हत्या का..ऐसे में अगर किसी जाति नस्ल या धर्म के भेदभाव के आधार पर हत्या की गई हो तो आरोपियों को सजा ए मौत और उम्रकैद की सजा का प्रावधान है साथ ही आरोपियों पर भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

इसके अलावा धारा 103 की श्रैणी में किये गए अपराध में आरोपी को जमानत नहीं दी जाती है।  साक्ष्यों के आधार पर आरोपी का अपराध साबित होने के बाद सीधा सजा सुनाई जाती है। हालांकि आईपीसी में लिंचिग के लिए कोई बड़ी सजा नहीं थी लेकिन बीएनएस में बड़ा बदलाव हुआ जिसे सभी ने काफी सराहा। सरकार की इस बदलाव से हाल के समय में लिंचिग की घटनाओं में कमी आई है।

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