Top 5 Dalit news: बाबा साहब ने हमेशा कहा कि हिंदू धर्म से कभी जातिगत भेदभाव नहीं जायेगा, लेकिन जब आप आकड़े उठा कर देखेंगे तो ये बेहद अफसोस की बात है कि दलितों का उत्पीड़न केवल हिंदू ही नहीं कर रहे बल्कि सभी धर्मों के लोग उनका अच्छा खासा फायदा उठा रहे है..तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बताएंगे, जिसने उस समाज की भी सच्चाई को उजागर कर दिया है जो दावा करते है कि उनके समाज में तो जातिगत भेदभाव होता ही नहीं है।
यूपी में दलित उत्पीड़न में यादव औऱ मुसलमान सबसे आगे
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला उत्तर प्रदेश से है, जहां दलितों के उत्पीड़न में शामिल आरोपियों के बारे में पुलिस की एक सनसनीखेज रिपोर्ट सामने आई है.. इस एक रिपोर्ट ने कई दावों की सच्चाई को भी उजागर कर दिया है। दरअसल उत्तर प्रदेश पुलिस ने दलित उत्पीड़न को लेकर जनवरी 2026 से लेकर अप्रैल 2026 तक में एससीएसटी एक्ट में दर्ज हुए मामलों की एक रिपोर्ट जारी की है। आपको जानकर हैरानी होगी कि केवल यूपी में ही बीते 4 महीनों में 4,741 मामले दर्ज हुए, और 14672 लोगों को आरोपी बनाया गया।
लेकिन इसमे सबसे हैरान करने वाले आकड़े ये है कि इन आरोपियों में सबसे ज्यादा 2,160 यादव समाज के लोग है. जबकि जहां मौका पड़ता है वहां उनके नेता खुद को दलित कहने से बाज नहीं आते, फिर भला वो दलित उत्पीड़न में कैसे शामिल हो गए,,, दूसरा स्थान तो और चौंकाने वाला है, जिसमें मुस्लिम समुदाय के 1983 आरोपी बनाये गए, इसके बाद ब्राहमणों और क्षत्रियों का नंबर आता है। वहीं यूपी का वाराणसी दलित उत्पीड़न करने के मामले में पहले नंबर पर आने वाला जिला है, और यहां भी यादव और मुसलमान ही दलित उत्पीड़न में अव्वल है। इन आकड़ो के आने के बाद जमकर इसपर राजनीति शुरु हो गई है।
बीजेपी नेता आलोक अवस्थी ने सपा मुखिया अखिलेश यादव को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सपा का पीडीए असल में पिछड़ा और अल्पसंख्यक द्वारा दलितों का उत्पीड़न” है। वहीं दलितो संगठनों को अब चिंता सताने लगी है कि यूपी में फिर से 2012 से लेकर 2017 तक फैली अराजकता आ रही है। जिसमें दलितो को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया था। जो भी हो, लेकिन इन आकडों से ये तो तय है कि दलितों का उत्पीड़न करने के मामले में केवल एक धर्म शामिल नहीं है बल्कि सभी बहती गंगा में हाथ धो रहे है।
बूंदी में 20 साल कर्ज का ब्याज मांग रहे दबंग
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला राजस्थान के बूंदी से है, जहां एक दलित के लिए कर्ज का बोझ कितना भारी होता है, वो उसे 20 सालो के बाद भी ढोना पड़ा रहा है। 20 साल पहले लिये हुए कर्ज को चुकाने के बाद भी आज दबंग पीड़ित से 3 लाख रूपय जबरन मांग रहे है, ये मामला बूंदी गेंडौली थाना क्षेत्र के मंडोली गांव का है, पीड़ित बजरंगलाल मेघवाल ने अपनी अर्जी को पहले पुलिस थाने में देने की कोशिश की, लेकिन जब वहां से उन्हें भगा दिया गया तो वो कोर्ट के दरवाजे पर पहुंचे।
उन्होंने बताया कि साल 2006 में झालीजी का बराना के रहने वाले सूदखोर बाबूलाल कीर से 90 हजार रुपए, ढाई रुपए प्रति सैकड़ा ब्याज पर उधार लिए थे। जिसे उन्होंने एक साल के बाद ही सूद समेत 1 लाख 78 हजार रुपए लौटा दिए थे। इस बात को बीस साल बीत गए है लेकिन 13 मई 2026 को अचानक सूदखोर बाबूलाल, सत्यनारायण, दिनेश और कुछ अज्ञात लोग के साथ जबरन उसके घर में घुस गया और फिर से उन पर दवाब बना रहा है कि पीड़ित उसे 3 लाख रूपय दें नहीं तो वो उसकी जमीन हथिया लेंगे।
उसे जातिसूचक शब्द कहेंष पीड़ित ने इस मामले में जब पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करानी चाही तो पुलिस ने मामले को रफा दफा करवा दिया जिसके बाद उसने कोर्ट में अर्जी लगाई। इस मामले की जांच डीएसपी लाखेरी कर रहे है। मगर कोर्ट के आदेश के इतने दिन बीतने के बाद भी अब तक आरोपियों पर कोई कार्यवाई नहीं हुई है.. पीड़ित को डर है कि कहीं कोई अनहोनी न हो.. हैरानी की बात है कि जब कानून ही उनकी सुरक्षा नहीं करेगी तो वो मदद के लिए जायें तो कहां जायें।
जालंधर में अवैध खनन के कारण दलित की मौत
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला पंजाब के जालंधर से है, जहां अवैध खनन और ओवरलोड टिप्पर की चपेट में आने से एक दलित युवक की जान चली गई.. जिसे लेकर एक तरफ ग्रामीणों ने न्याय के लिए लगातार धरना प्रर्दशन शुरु कर दिया है तो वहीं पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग (SC) कमीशन भी अब इस मुद्दे पर काफी सख्त नजर आ रहा है।
ये मामला जालंधर के फिल्लौर हलके के म्योंवाल गांव की है.. इतना ही नहीं इस मौत से इलाके में चल रहे अवैध माइनिंग का भी भंडा फूट सकता है, आयोग के चेयरमैन जसवीर सिंह गढ़ी ने एसएसपी जालंधर ग्रामीण को आदेश दिये है कि वो इस मामले की पूरी जांच रिपोर्ट 17 जून तक आयोग को दें। वहीं चपेट में आये दलित युवक के परिवार वालें अभी भी न्याय की मांग करते हुए पिछले 3 दिनो से धरना पर बैठे है औऱ उन्होंने शव का अंतिम संस्कार तक नहीं किया है।
जिसे लेकर 19 जून को आयोग के अध्यक्ष पीड़ित परिवार से मिलेंग। वहीं आप नेता प्रिंसिपल प्रेम कुमार ने बयान जारी किया है कि पिछले कुछ हफ्तों से फिल्लौर में अवैध खनन बढ़ गया है, लेकिन प्रशासन को इसकी खबर नहीं है.. वहीं ऑवरलॉड टिप्पर अँधाधुंद चल रहे है जिसके कारण ही दलित परिवार का चिराग बुझ गया। अब देखना ये होगा कि ये एक मौत सरकार की कौन कौन सी नाकामी को सामने लाती है। फिलहाल इसकी जांच चल रही है।
झारखंड में दलित विस्थापन को रोकने की मुहीम
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला झारखंड के हजारीबाग से है, पिछले कुछ समय से झारखंड में दलितो के अधिकारों पर लगाई जा रही सेँध को लेकर आखिरकार दलितो के सब्र का बांध टूट गया है और उन्होंने दलित अधिकार मंच के बैनर तले एक सम्मेलन आयोजित करके भीम संदेश यात्रा निकालने का फैसला किया है। ये सम्मेलन नवाबगंज के मंजूर भवन में किया गया, जहां मौजूद सभी लोगो को समाज्क भागीदारी और समान न्याय पाने का संकल्प दोहराया गया।
इस मौके पर राष्ट्रीय अध्यक्ष जैनेंद्र कुमार त्यागत भी मौजूद थे। उन्होंने दलित समाज को जागरूक करने और उन्हें अपने अधिकारों की रक्षा करने के लिए भीम संदेश यात्रा निकालने का भी आहवान किया जो बाबा साहब अंबेडकर और बुद्ध के विचारों को लोगो तक पहुंचाने का काम करेंगे। उन्होंने सरकार की नाकामी को उजागर करते हुए कहा कि यहां एक भी अनूसूचित जाति आयोग का न होना दर्शाता है कि राज्य में दलितों ऐप पिछड़ो की स्थिति कितनी दयनीय है।
वहीं 30 जून को हूलू कार्यक्रम बड़े स्तर पर किया जायेगा जिसमें दलित समाज के सैकड़ो लोग अपने अधिकारों के लिए आवाज उठायेंगे। दलितों को विस्थापित करने की योजना बनाने वालों के लिए ये यात्रा करार जवाब होगी। अब देखना ये होगा कि इससे दलितों का विस्थापन रूकता है या नहीं।
भीम आर्मी चीफ ने किया बड़ा ऐलान
5, दलितों से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को लेकर है, पिछले 3 दिनो ने लखनऊ में प्रत्याशियों का इंटरव्यू ले रहे आजाद ने जनता से बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि अगर उनकी सरकार बनती है तो वो बहुजन महापुरुषों के नाम पर बने जिलों के पुराने नाम फिर से बहाल कर देंगे, आजाद ने संदेश दिया कि वे नाम बदलने की राजनीति के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन बहुजन महापुरुषों का अपमान भी बर्दाश्त नहीं करेंगे।
ये इशारा कहीं न कहीं 2012 से 2017 में सपा के कार्य़काल में बहुजन नेता के नाम पर बसे शहरो के नामों को बदलने को लेकर हो सकता है। पंचशील नगर, प्रबुद्ध नगर, भीमराव नगर के नाम बदल दिये गए थे। आजाद का अंदाज सबसे हटके है, इसलिए उनकी लोकप्रियता शायद किसी और नेता से ज्यादा बढ़ी है, ऐसे में उनका अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कहीं बसपा की तरह अब सपा के अस्तित्व के खतरे में न डाल दें। वैसे आपको क्या लगता है, क्या आसपा के आने से सपा खतरें में पड़ सकती है।



