Bihar news: बिहार में भरत तिवारी का मामला काफी समय से चर्चा का विषय रहा है और इसने काफी राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। हाल ही में, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि एनकाउंटर के मामले में जाति और धर्म को क्यों घसीटा जा रहा है, और उन्होंने भरत तिवारी मामले को लेकर गंभीर सवाल उठाए।
मांझी ने भरत तिवारी एनकाउंटर पर दिया बड़ा बयान
बिहार के भोजपुर में 28 साल के भरत भूषण तिवारी की पुलिस मुठभेड़ में मौत के मामले ने पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया है। बिहार पुलिस ने खुद माना है कि इस पूरे ऑपरेशन को ठीक से हैंडल नहीं किया गया और लापरवाही हुई है। ADG के इस बयान के बाद अब यह मामला एक बड़ी राजनीतिक और सामाजिक बहस का रूप ले चुका है। जहां एक ब्राह्मण युवक भरत तिवारी के एनकाउंटर को लेकर दिये जा रहे है जातिगत रंग पर अब बिहार के पूर्व सीएम जीतनराम मांझी (Former CM Jitan Ram Manjhi) ने जमकर हल्ला बोला है।
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दलित का एनकाउंटर होता तो उसे नक्सली करार दे देते
जीतनराम मांझी (Jitan Ram Manjhi) ने बिहार में चल रही कास्ट पॉलिटिक्स पर सोशल मीडिया पोस्ट में तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि इस वक्त जहां बहस इस बात पर होनी चाहिए थी कि भरत तिवारी को अवैध पिस्टल और हथियार कौन दे रहा था, लेकिन यहां तो जाति और धर्म के चश्मे से देखा जा रहा है.. उन्होंने पूछा कि अगर किसी दलित का एनकाउंटर होता तो उसे नक्सली करार दे देते औऱ किसी मुसलमान को मारा होता उसे आंतकी करार दे देते, फिर भरत तिवारी का इतना महिमामंडन क्यों किया जा रहा है।
आखिर भरत तिवारी को क्रांतिकारी क्यों कहा जा रहा है, जबकि किसी का समर्थन करना है या विरोध वो उसके कर्मों को देखकर तय होना चाहिए न कि जाति देख कर, लेकिन जिस तरह का माहौल इस वक्त है वो बेहद खतरनाक प्रवृत्ति को दर्शा रहे है। यहां कानून पर भी दोहरे मापदंड वाली व्यवस्था के आधार पर सवाल नहीं उठने चाहिए। जीतनराम मांझी के इस बयान ने वाकई में सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर लोगों की सोच जाति की सहूलियत पर टिक गई है.. दलित और पिछड़ा हो तो कानून के खिलाफ ही होगा.. भले ही सच कुछ और ही हो।



