Top 5 Dalit news: दलित मुद्दों पर देशभर में हलचल मांझी का बयान, तमिलनाडु की बदहाली और आजाद का बड़ा ऐलान

Caste Discrimination, Sonbhadra News
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Top 5 Dalit news: जब तक कोई मुद्दा केवल जाति तक सिमित करके देखा जायेगा तब तक वो इंसानियत की कसौटी पर तौला ही नहीं जायेगा.. और जहां जातिवाद आ गया, वहां कभी भी पूरा और सच्चा न्याय हो सकता है.. जैसी स्थिति अभी है, उसे देखकर तो नहीं लगता। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बतायेंगे जो सबूत है कि कैसे जाति को बीच में लाकर किसी मामले को अलग रंग दे दिया जाता है।

पूर्व बिहार सीएम ने भरत तिवारी एनकाउंटर पर दिया बड़ा बयान

1, दलितो से जुड़ा पहला मामला बिहार के भोजपुर से है, जहां एक ब्राह्मण युवक भरत तिवारी के एनकाउंटर को लेकर दिये जा रहे है जातिगत रंग पर अब बिहार के पूर्व सीएम जीतनराम मांझी ने जमकर हल्ला बोला है। मांझी ने बिहार में चल रही कास्ट पॉलिटिक्स पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि इस वक्त जहां बहस इस बात पर होनी चाहिए थी कि भरत तिवारी को अवैध पिस्टल और हथियार कौन दे रहा था, लेकिन यहां तो जाति और धर्म के चश्मे से देखा जा रहा है.. उन्होंने पूछा कि अगर किसी दलित का एनकाउंटर होता तो उसे नक्सली करार दे देते औऱ किसी मुसलमान को मारा होता उसे आंतकी करार दे देते, फिर भरत तिवारी का इतना महिमामंडन क्यों किया जा रहा है।

आखिर भरत तिवारी को क्रांतिकारी क्यों कहा जा रहा है, जबकि किसी का समर्थन करना है या विरोध वो उसके कर्मों को देखकर तय होना चाहिए न कि जाति देख कर, लेकिन जिस तरह का माहौल इस वक्त है वो बेहद खतरनाक प्रवृत्ति को दर्शा रहे है। यहां कानून पर भी दोहरे मापदंड वाली व्यवस्था के आधार पर सवाल नहीं उठने चाहिए। जीतनराम मांझी के इस बयान ने वाकई में सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर लोगों की सोच जाति की सहूलियत पर टिक गई है.. दलित और पिछड़ा हो तो कानून के खिलाफ ही होगा.. भले ही सच कुछ और ही हो।

तमिलनाडु में दलितो की स्थिति दयनीय

2, दलितो से जुड़ा अगला मामला तमिलनाडु के पुदुक्कोट्टई जिले से है, जहां पिछले 40 सालों से दलित बस्ती में सड़क न होने के कारण वहां रहने वाले दलित समुदाय के लोग अपने परिजनो के शवों को खेतो के बीच से ले जाने पर मजबूर है। खेतो के बीच से शव ले जाने का एक सनसनीखेज वीडियो भी अब सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। जिसमें एक दलित महिला के शव को धान के खेतों के बीच से ले जाया जा रहा है। जिसके बाद से सरकार की दलितो के लिए नीतियों पर भी कड़े सवाल उठने लगे है।

ये सनसनीखेज मामला अवुदैयारकोइल तालुक के थीयाथुर गांव का है, अंबेडकर नगर बस्ती में रहने वाले दलित आजादी के इतने साल बीतने के बाद भी विकास और बेसिक सुविधाओं से इस कदर वंचित है कि उनके पास गांव से बाहर निकलने के लिए पक्की तो छोड़िये कच्ची सड़क भी नहीं है। ये वीडियो 18 जून को सोशल मीडिया पर डाली गई थी, जिसमें ए देवी की बिमारी के कारण मौत हो गई थी, लेकिन सड़क न होने के कारण महिला की शव यात्रा खेतो से निकाली गई और द्रविड़ कब्रिस्तान तक ले गए।

इस घटना के सामने आने के बाद से जातिगत सौहार्द बढ़ाने और भेदभाव मिटाने की कोशिश की सारे दावों की मिट्टी पलीत हो गई है। अब देखना ये होगा कि प्रशासन इस पर क्या एक्शन लेता है.. क्या पीड़ितो को अब भी सड़क मिलेगी या नहीं। ये तो आने वाला समय ही बतायेगा, लेकिन वायरल वीडियो ने तमिलनाडु में जातिगत उत्पीड़न की पोल जरूर खोल दी है।

भीम आर्मी के अध्यक्ष ने विपक्षियों का सपना तोड़ा

3, दलितो से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ और आजाद समाज पार्टी में फूट डालने की कोशिश करने वाले के खिलाफ करारा जवाब है, और ये जवाब दिया है भीम आर्मी के अध्यक्ष विनय रतन सिंह ने.. जिन्हें लेकर लगातार अटकले उठ रही ही थी वो 2027 के चुनाव में खड़ा होना चाहते है, लेकिन चंद्र शेखर आजाद उनकी अवहेलना कर रहे है, इसलिए विनय रतन काफी नाराज है, वो आजाद का साथ छोड़ सकते है औऱ न जाने क्या क्या अफवाहे उठ रही थी, लेकिन अब विनय रतन ने खुद मीडिया के सामने आकर ऐलान किया कि जनता को किसी भी अफवाह पर ध्यान नहीं देना चाहिए, आजाद की बढ़ती लोकप्रियता प्रतिद्वंदियों से बर्दाश्त नहीं हो रही है।

उन्होंने ऐलान किया है वह चुनाव नहीं लड़ेंगे और अपने संगठन और आजाद समाज पार्टी को आगे बढ़ाएंगे और उसका नेत्रत्व करेंगे.. आजाद उनके भाई है और वो अपने भाई का साथ कभी नहीं छोड़ेगे। विनय रतन का मीडिया के सामने इस तरह का बयान साफ बता रहे है कि आजाद को बदनाम करने वालों को तीखी मिर्ची लगने वाली है.. अब देखना ये होगा कि भीम आर्मी चीफ को बदनाम करने के लिए, आसपा को तोड़ने के लिए अब कौन सी नई चाल चलते है उनके दुश्मन.. लेकिन आसपा की एकता बताती है कि इस बार आसपा सब पर भारी पड़ने वाली है।

मारपीट और अपमान करने के मामले में दलित महिला को मिला न्याय

4, दलितो से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के हमीरपुर से है, जहां एक एक दलित महिला को अपने साथ हुए अन्याय के मामले में 25 सालो के बाद न्याय मिला है। ये बेहद हास्यस्पद ही लगता है कि दलित महिला को अपने साथ हुए मारपीट के मामले में आरोपी पिता पुत्र को सजा दिलवाने में 25 सालों का लंबा समय लग गया। ये मामला हमीरपुर के राठ कोतवाली के सरसई गांव का है, जब पीड़िता सुदामा ने 28 सितंबर 2001 को पुलिस को एक प्रार्थना पत्र दिया था, जिसके अनुसार पीड़िता के पति मोतीलाल को आवासीय पट्टा मिली था, जिसपर पीड़िता मवेशियों को बांधती थी, और जरूरी सामान रखा करती थी, बगल में ही आरोपी सोहनलाल की जमीन थी।

21 सितंबर 2001 को आरोपी ने अपने तीन बेटो के साथ मिलकर उसकी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की , जिसका पीड़िता औऱ उसके पति ने विरोध किया था, लेकिन आऱोपी भड़क गया औऱ उसने जातिसूचक गालियां देते हुए दंपत्ति के साथ मारपीट की। पीड़िता ने इस मामले में पहले पुलिस से मदद मांगी लेकिन पुलिस वालों ने मामले को रफा दफा करने की कोशिश की, जिसके बाद उसने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने जांच शुरु की.. हैरानी की बात कि इस मामले में न्याय आने में 25 साल लग गए। विशेष न्यायधीश एससी एसटी रणवीर सिंह ने चारो आरोपियों को दोषी करार दिया औऱ 3-3 साल की सजा सुनाई है, साथ ही 38 हजार रूपय का जुर्माना भी लगाया है। सुना था न्याय धीरे मिलते है, लेकिन इतना धीरे भी हो सकता है, ये बेहद हैरान करने वाला है।

भीम आर्मी चीफ की सत्ता परिवर्तन यात्रा मेरठ पहुंची

5, दलितो से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को लेकर है, जिनकी सत्ता परिवर्तन की यात्रा मेरठ पहुंची और वहां उन्होंने गाय पर होने वाली राजनीति और गौ रक्षा के नाम पर दलितों और अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने की बात को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि वो चाहते है कि गाय को राष्ट्रमाता या राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाना चाहिए ताकि गाय के नाम पर दलितो और पिछड़ो के खिलाफ जो राजनीति होती है वो बंद हो जाये। उन्होंने सरकार को घेरते हुए कहा कि सीएम योगी आदित्यनाथ अपने चुनावी रैलियों में काफी जोर देकर कहा था कि वो गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलायेंगे.. लेकिन आज तक ये नहीं हुआ।

क्योंकि सच तो ये है कि गाय का नाम पर बांटने की राजनीति जो खत्म हो जायेगी। गौ रक्षा करने के नाम पर दलित और पिछड़े समाज के लोगो को निशाना बनाना बंद हो जायेगा.. और राजनैतिक रोटियां नही सिकेंगी। आजाद ने सीधे पर राज्य सरकार को घेरा है.. वैसे आजाद की बात पूरी तरह से सही भी है.. क्योंकि गौ रक्षा के नाम पर कोई उंची जाति का कभी कोई शिकार नहीं बनाया जा जाता है बल्कि हमेशा बहुजन और अल्पसंख्यक समुदाय के लोग ही निशाना बनाये जाते है। मॉब लिंचिग की जाती है.. अपमानित किये जाते है। अब सवाल ये है कि क्या राष्ट्रमाता घोषित होने से ये भद्दी राजनीति बंद हो जायेगी।

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