Top 5 Dalit news: नालंदा लिंचिंग से हैदराबाद दुष्कर्म तक, 24 घंटे में दलितों पर अत्याचार की 5 बड़ी घटनाएं

Caste Discrimination, Top 5 Dalit news in Hindi
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Top 5 Dalit news: जब आप गहीनता से विचार करते है तो ये समझना बेहद मुश्किल लगता है कि आखिर कैसे जाति के नाम पर किसी को इतना प्रताड़ित कर दिया जाता है कि उस व्यक्ति की जान ही चली जाती है। ऐसा क्यों है कि हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में रहचे है लेकिन जातिवाद की गुलामी से आज जकड़े हुए है। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बतायेंगे जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है.. जिसने समाज के उस रूप को उजागर किया है जो दलितों और पिछड़ों को केवल केवल हिंसा और क्रूरता की कसौटी पर नापता है।

नालंदा में दो दलित युवकों के साथ लिंचिग

1, दलितो से जुड़ा पहला मामला बिहार के नालंदा जिले  है, जहां मेले की खुशियां एक परिवार के लिए मातम में बदल गई.. जहां केवल चोरी का शक होने पर ही केवल दलित होने के कारण दो युवको को जातिवादियों ने इसना पीटा की दोनो ने दम तोड़ दिया। ये मामला नालंदा में राजगीर मेले का है। जहां मेला चल रहा है, लेकिन इसी बीच पिंटू पासवान और श्रवण पासवान भी  मलमास  मेला घूमने आये थे मगर झुंकिया बाबा मंदिर के पास किसी ने दोनो पर चोरी का आरोप लगा दिया, बस फिर क्या था, दोनो ने चोरी की भी या नहीं ये जानने के लिए प्रशासन की भी जरूरत नहीं थी, बस जाति पूछी और तय कर लिया कि चोरी उन दोनो ने ही की होगी।

वहां खड़े जातिवादियों ने दोनो को खुद को जज बना कर फैसला सुना दिया और बुरी तरह से पीटना शुरु कर दिया..दोनो मृतक दीपनगर थाना क्षेत्र के गंजपर गांव के रहने वाले थे। वहीं इस मामले में अखिल भारतीय महामंडलेश्वर महंत अंतर्यामी शरण की तरफ से बयान आया है कि पिछले कुछ समय से मंदिर में चोरी की घटनायें बढ़ रही थी, और घटना वाले दिन भी 4 युवक संदिग्ध गतिविधियों में शामिल दिखे थे, जिसमें से इन दोनो युवकों पर भी शक हुआ.. भीड़ ने दोनो युवकों को ही चोर समझ कर लाठी डंडो से पीटा था, हालांकि बाद में सुरक्षा कर्मियों  ने राजगीर पुलिस को सौंप दिया था।

जहां से पहले ईलाज के लिए दोनो को  सदर अस्पताल  ले गए थे लेकिन हालात गंभीर होने पर पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (PMCH) रेफर  कर दिया गया था, लेकिन दोनो को ही बचाया नही जा सका। हालांकि मामले को लेकर लोगो में जिस तरह का रोष है उसे देखते हुए राजगीर डीएसपी ने एसआईटी का गठन किया है, वहीं भारी पुलिस बल भी इलाके में तैनात कर दी गई। केवल दलित होने के कारण क्या दोनो युवक ऐसी बर्बरता डिजर्व करते थे.. क्या दोनो को सही न्याय मिलेगा।

मदुरै में आखिरकार 101 दिन बाद दलित का हुआ

2, दलितो से जुड़ा अगला मामला तमिलनाडु के मदुरै से है, जहां आखिरकार पुलिस कस्टडी में टॉर्चर के कारण मारे गए दलित युवक आकाश  का 101 दिन के बाद अंतिम संस्कार कर दिया गया। जिंदा रहते हुए जो दलित होने के कारण जो शारीरिक टॉर्चर झेलना पड़ा वो काफी नहीं था.. जो मरने के बाद भी एक शव को 101 दिनों तक केवल अंतिम संस्कार का इंतजार करना पड़ा।  दिल को झरझोर कर रख देने वाला ये दृश्य मदुरै के एक विद्युत शवदाह गृह  में देखने को मिला.. जब मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश के बाद आकाश के शव का अंतिम संस्कार किया गया।

बता दें कि इसी साल 6 मार्च को शिवगंगा जिले के मानामदुरै के रहने वाले आकाश को पुलिस ने  मारपीट के एक मामले में गिरफ्तार किया था, लेकिन पुलिस कस्टडी में टॉर्चर के कारण उसे गंभीर चोटे आई थी, जिसे खुद आकाश ने जिला मजिस्ट्रेट के सामने कबूल किया था, लेकिन 8 मार्च को  मदुरै के सरकारी राजाजी अस्पताल आकाश की मौत हो गई..जब पोस्टमार्टम हुआ तो शरीर पर लगभग 28 चोटों के निशान मिले, जिससे उससे परिजन काफी नाराज हो गए.. उन्होंने विरोध प्रदर्शन किया , जिसके बाद  9 मार्च को जांच सीबी-सीआईडी को सौँपा गया औऱ 6 पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया गया था।

लेकिन वहीं दूसरी तरफ परिवार वालों ने शव लेने से इंकार कर दिया था, जिसके बाद करीब 3 महीने से ज्यादा बीतने के बाद 15 जून को कोर्ट ने आदेश दिया कि अगर शव नहीं लिया जाता तो उसका अंतिम संस्कार कर दिया जाये। पुलिस प्रशासन की निगरानी में शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया लेकिन हैरानी की बात है कि अब तक आरोपी पुलिस वालों को सजा नहीं हुई। अब देखना ये होगा कि पीड़ित परिवार को आखिर कब तक न्याय मिलेगा।

सीतापुर में आजाद की रैली से पहले प्रशासन की चाल

3, दलितो से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को लेकर है, जिनकी बढ़ती लोकप्रियता के कारण पिछले कुछ समय से उन्हें जानबूज कर टारगेट किया जा रहा है। ताजा मामला सीतापुर के मझिगवां गांव का है, जहां 18 जून को  नगीना सांसद चन्द्रशेखर आजाद जिस “सम्राट अशोक गेट” का उद्घाटन करने जाने वाले थे, लेकिन उससे एक दिन पहले प्रशासन ने सम्राट अशोक गेट को ही अवैध बता कर आजाद के कार्यक्रम को ही रोक दिया, इतना ही नहीं रातों-रात उसे कपड़े से ढक भी दिया गया। सरकार की इस तुगलकी फरमान के खिलाफ भीम आर्मी व आजाद समाज पार्टी के लोगों में काफी रोष है और वो सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन पर बैठ गए है।

हैरानी की बात है कि “सम्राट अशोक गेट” का निर्माण पिछले कई महीनों से चल रहा था, लेकिन प्रशासन कोई आपत्ति नहीं थी, मगर जैसे ही ये खबर सामने आई कि इस गेट का उद्घाटन आजाद करने वाले है, ये निर्माण अवैध हो गया। वजह साफ है आजाद को जानबूझ कर टारगेट किया जा रहा है। पहले मंडल स्तरीय रैलियों पर रोक लगाई गई, अचानक रैलियों के स्थान को बदल देनासत्ता परिवर्तन यात्रा की परमिशन न देना, उन्हें हाउस अरेस्ट करना, फिर यात्रा का रास्ता बदलना, और अब सीतापुर दौरे से पहले ये नया ड्रामा.. साफ जाहिर है कि आजाद की बढ़ती लोकप्रियता सरकार की नींदे उड़ा रही है, और अब उन्हें डर सताने लगा है कि कहीं आजाद उनकी सत्ता की कुर्सी भी न उड़ा दें। लेकिन प्रतिद्वंदि कितनी भी कोशिश कर लें, आजाद अपनी रफ्तार से चलते ही रहेंगे। अब देखना ये होगी कि गेट के उद्घाटन पर रोक को लेकर क्या बहाना देता है प्रशासन।

एर्नाकुलम में 7 दलित परिवारों को मिला न्याय

4, दलितो से जुड़ा अगला मामला दलितो से जुड़ा अगला मामला केरल के कोच्चि से है, जहां 7 दलित परिवारो को आखिरकार 6 दशक के लंबे संघर्ष के बाद स्थाई पुर्नवास देने के मामले में सहमति पर हस्ताक्षर किया गया। बता दें कि एर्नाकुलम के किझाकंबलम के पास पड़ने वाले मलयिडोम थुरुथु के परियाथुकावु बस्ती में रहने वाले 7 दलित परिवारों और भू स्वामियों के बीच स्थाई पुर्नवास को लेकर संघर्ष चल रहा था, जिसे लेकर दलित परिवार लगातार न्याय की मांग कर रहे थे, मगर अब हाई कोर्ट के आदेश के बाद जिला कलैक्ट्रेट में एर्नाकुलम जिले के प्रभारी उच्च शिक्षा मंत्री रोजी एम जॉन के सामने समझौता किया गया है।

जिसके तहत अब सातों प्रभावित परिवारों को पांच पांच सेंट जमीने देने पर सहमति बनी है। वहीं सड़क के निर्माण के लिए भी 3 मीटर और जमीन भी देने का वादा दिया गया। राज्य सरकार सभी सातों परिवारों के लिए 1000 वर्ग फुट पर नए मकानो को बनवा कर भी देगी, ये मकान एक साल के अंदर दिये जायेंगे तब तक दलित परिवारो के उनके निवास स्थान से बेदखल नहीं किया जायेगा। भले ही 6 दशको का लंबा इंतजार करना पड़ा हो, संघर्ष लंबा था लेकिन आखिरकार दलित परिवारों को अपना घर मिलने वाला है। जिससे दलित परिवारों ने राहत की सांस ली है। अब देखना ये होगा कि दलित परिवारो को कब तक अपना घर मिलता है।

तेलंगाना के हैदराबाद में दलित नौकरानी से दुष्कर्म

5, दलितो से जुड़ा अगला मामला तेलंगाना के हैदराबाद से है, जहां एक दलित नौकरानी के साथ पहले दुष्कर्म किया गया और जब पीड़िता गर्भवति हो गई तो उसे जातिसूचक गालियां देकर काम से बाहर निकालने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। ये घटना नारायणपेट जिले के कोसगी कस्बे की है, जहां पीड़िता के परिवार ने पुलिस को तहरीर दी कि उनकी 20 साल की बेटी सोने के व्यापारी साई किरण नाम के युवक के यहां घरेलू सहायिका के रूप में काम करती थी, इस बीच आरोपी ने शादी का झांसा देकर पीड़िता की शारीरिक शोषण किया।

लेकिन जब वो गर्भवति हो गई तो उसने साई किरण से शादी करने की बात की, मगर आरोपी ने शादी से इंकार करने हुए उसे जातिसूचक गालियां देते हुए काम से बाहर निकाल दिया। पीड़ित परिवार ने पहले पंचायत से मदद मांगी थी लेकिन उन लोगों ने इस मामले को आपस मे सुलझा लेने और पुलिस के पास न जाने के ऐवज में पैसे देने की पेशकश रखी थी, लेकिन पीड़िता ने पंचायत के खिलाफ जाकर  नारायणपेट पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करा दी। पुलिस ने तुरंत मामले को दर्ज कर पीड़िता को मेडिकल के लिए भेज दिया और मामले की जांच शुरु कर दी है। हालांकि आरोपी फिलहाल फरार है। अब देखना ये होगा कि क्या कानून केवल आरोपी के खिलाफ कार्यवाही करेगा या फिर ऐसी पंचायत के खिलाफ भी कार्यवाई होगी, जो इतने संगीन मामले को भी दबाने की कोशिश कर रहे थे।

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