Top 5 Dalit news: जब बात न्याय की होती है तो कई बार भले ही न्याय में देरी हो, लेकिन कानून सबके लिए एक बराबर है। जो कानून को तोड़ेगा उसे आज नहीं तो कल सजा भुगतनी होगी। लेकिन हैरानी की बात तो ये है दलितों के मामले में न्याय भी हार मान लेता है। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बतायेंगे जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है।
रोहिणी घावरी ने पहली बार जातिवाद का दर्द किया बयां
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला भीम आर्मी चीफ की उस सच्चाई को लेकर है, जब उनकी कथित एक्स गर्लफ्रेंड रोहिणी घावरी ने पहली बार आजाद को नहीं बल्कि उनके धोखे का कारण जातिवादी मानसिकता को बताया है। दरअसल रोहिणी घावरी ने फिर से एक ट्वीट किया है जिसमें वो आजाद से दूर होने का और जाति के कारण कैसे आजाद के समाज वाले दोनों के रिश्ते को लेकर नहीं माने। जिसके कारण आजाद ने उनसे शादी करने से इनकार कर दिया था। घावरी ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि चंद्रशेखर मुझसे शादी करना चाहता था उसने चामर समाज के मुखियाओं से इस पर बात की तो उन्होंने कहा भंगी की लड़की से शादी करेगा तो सब तेरा साथ छोड़ देंगे राजनीति खत्म हो जाएगी !! बस फिर क्या था काबिलियत जातिवाद के आगे हार गई ओर आजाद ने उन्हें राजनीति में जगह बनाने के लिए छोड़ दिया।
घावरी ने कहा कि उन्हें ये बात खुद चंद्रशेखर ने इटली आ बताई थी। अब तक आजाद पर संगीन आरोप लगाने वाली घावरी ने आजाद से सहानुभूति जताई और कहा कि आजाद कभी घावरी के खिलाफ कुछ नहीं कहेंगे क्योंकि उन्हें भी पता है कि गलती आजाद की है।। सच तो ये है दलितों के बीच भी बहुत ज्यादा जातिवाद होता है और वो एक दूसरे से बेहद भेदभाव करते है तो भला वो किस हक से सवर्णों पर जातिगत भेदभाव का आरोप लगा रहे है। घावरी का ये खुलासा अब दलित समाज के किस रूप को सामने लाने वाला है ये देखने वाली बात होगी। वैसे घावरी की बात से आप कितना सहमत है हमें कमेंट करके जरूर बताएं।
SC/ST वर्ग के मेधावी छात्राओं को हायर एजुकेशन के लिए बड़ी सौगात
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला बिहार से है, जहां नवनिर्वाचित सम्राट चौधरी सरकार ने बिहार के SC और ST वर्ग के मेधावी छात्राओं को उनकी हायर एजुकेशन के लिए बड़ी सौगात दी है। सरकार ने मुख्यमंत्री मेधावृत्ति योजना के तरह राज्य के अब तक दसवीं और बारहवीं के पिछड़े और दलित वर्ग के छात्रों को 941 करोड़ रूपय आर्थिक सहायता दी गई है। बच्चों को पढ़ाई के लिए पैसे सीधे बच्चों के ही खाते में भेजे जा रहे है, जिससे लाभ सीधा उन्हें मिले। सरकारी आकड़ो के मुताबिक साल 2025 में ही 1 लाख 63 हजार से ज्यादा बच्चों को इस योजना का लाभ दिया गया है।
हालांकि ये योजना पांच साल पुरानी है लेकिन नवनिर्वाचित सरकार ने इन योजनाओं में और मेधावी छात्रों को और ज्यादा लाभ बढ़ाने की योजना बना रही है। वहीं दलित छात्रों को दलवी और बारहवी में देने वाली राशि की बदौलत कोशिश की जा रही है कि दलित बच्चों की शिक्षा में आर्थिक तौर पर कोई रूकावट न आये.. ऐसे में देखना ये होगा कि क्या इससे राज्य में दलितों की शिक्षित होने का आकड़ा बढ़ेगा। या नहीं..
बैंगलुरु में दलित पुलिस कर्मियों के साथ जातिवाद भेदभाव
3 दलितो से जुड़ा अगला मामला कर्नाटक के बैंगलुरु से है, जहां पुलिस के कई निचले रैंक के दलित अधिकारियों ने उनकी जाति के कारण मकान न दिये जाने की समस्या सांझा की है। जिसके बाद ये मुद्दा उंचे स्तर पर पहुंच गया है। दलित अधिकारियों ने आपबीती बताते हुए कहा कि दलित जाति से होने के कारण मकान मालिक उन पर विश्वास ही नहीं करते है औऱ उन्हें जाति पूछ कर मकान देने से इंकार कर देते है। साथ ही मालिकों को ये भी डर सताता है कि किराए या बेदखली से विवाद में कहीं उन पर एससी एसटी एक्ट के तहत मामला न दर्ज करवा दें, जिसके कारण कर्मचारियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
हालांकि कर्मियों के इस मुद्दे के प्रकाश में लाने के बाद अब वरिष्ठ अधिकारी इस मामले को संज्ञान में लेकर जांच का आश्वासन दिया है और साथ ही गृह मंत्री जी परमेश्वर ने वादा किया है कि जल्द ही पुलिस गृह योजना के तहत पुलिस कर्मियों को उनका घर दिया जायेगा। हालांकि जाति के नाम पर पुलिस कर्मियों को भी घर न देना कहीं न कहीं जातिवादि मानसिकता को बढ़ावा दे रहा है और प्रशासन को इसके खिलाफ जरूर कोई टोस कदम उठाना चाहिए, आपको क्या लगता है हमें कमेंट करके बतायें।
पलाश मुच्छल पर जातिगत उत्पीड़न करने का आरोप
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला महाराष्ट्र के सांगली से है, जहां क्रिकेटर स्मृति मंधाना के बचपन के एक दोस्त विज्ञान प्रकाश माने ने उनके एक्स मंगेतर पलाश मुच्छल पर जातिगत उत्पीड़न करने का संगीन आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया है। माने ने बताया कि 22 नवंबर को सांगली-आष्टा रोड पर एक टोल प्लाजा पर 25 लाख रुपये के कर्ज को लेकर हुए झगड़े के दौरान जातिवादी टिप्पणी की थी, माने ने कहा कि पलाश ने उनसे 25 लाख रूपय उधार लिये थे।
लेकिन पैसे लौटाने में वो आनाकानी करने लगे, जिसके बाद दोनो की बहस हुई और पलाश ने उन्हें जातिसूचक टिप्पणी करके अपमानित किया। जिसके बाद उनके खिलाफ एससी एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरु कर दी गई है। हालांकि अभी तक पुलिस की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन जांच में आरोप सही पाये गए तो पलाश जेल जा सकते है।
मध्य प्रदेश एसडीएम के साथ जातिगत भेदभाव
दलितो से जुड़ा अगला मामला मध्य प्रदेश के कटनी से है, जहां एक दलित जाति की एसडीएम पर जातिसूचक टिप्पणी करने को लेकर एसडीएम ने अधिकारियों की जमकर लताड़ लगाई है। इस पूरी घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें महिला एसडीएम साफ तौर पर जातिवादी अधिकारी की क्लास लगाते हुए पूछ रही है कि उनके लिए अधिकारी होने के बजाये आदिवासी और दलित कह कर क्यों संबोधित किया गया। आखिर ये अपमान किय आधार पर किया गया।
एसडीएम की क्लास से घबराये अधिकारी के मुंह से एक आवाज नहीं निकली.. शायद इसे ही संविधान की ताकत कहा जाता है और शिक्षा की ताकत.. जहां जातिगत अपमान करने पर आपको ईनाम नहीं सजा मिलेगी। सोशल मीडिया पर एसडीएम की काफी तारीफ हो रही है। लेकिन हैरानी की बात है कि दलित आदिवासी कितने भी बड़े क्यों न हो जायें, उन्हें हमेंशा उनकी जाति से ही मापा जाता है। अब देखना ये होगा कि एसडीएम की इस लताड़ के बाद क्या कोई बदलाव होगा.. आपको क्या लगता है हमें कमेंट करके बतायें।



