नाबालिगों के खिलाफ अपराध पर सख्त हुई सरकार, धारा 65 और 70 के तहत मिलेगी कठोर सजा

BNS Law and Order, BNS section 65-67
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Bns section 65,70: भारतीय न्याय संहिता 2023 में कई ऐसी धाराओं को जोड़ा गया जो कि आईपीसी में या तो शामिल नहीं थे या फिर उसमें दिये गए प्रावधान सख्स या क्लियर नहीं थे.. मगर बीएनएस में बच्चों और महिलाओ के साथ होने वाले अपराधों के कानून को बेहद सख्त बना दिया गया है.. यहां तक की इन अपराधों में अब से मिलने वाली सजा को भी बढ़ा दिया गया, ताकि नाबालिग और महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों में कमी आये.. इस वीडियो में हम जानेंगे बीएनएस की धारा 65 नाबालिकों के खिलाफ अपराध और गैंगरेप जैसे अपराध के लिए लगाए जा रहे धारा 70 के बारे में…क्या कहती है बीएनएस की धारा 65 और धारा 70।

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क्या कहती है Bns section 65,70

भारतीय न्याय संहिता 2023 के अनुसार जब दो या उससे ज्यादा लोग किसी महिला का जबरन यौन शोषण करते है तो उसे सामूहिक दुष्कर्म के रूप में परिभाषित किया गया है। धारा 70 में दो उपधारायें जोड़ी गई है। पहली उपधारा के अनुसार सामूहिक दुष्कर्म के अपराध में जितने भी लोग शामिल है, वो बराबर के आरोपी माने जायेंगे, और आरोप के सिद्ध होने के बाद आरोपी को 20 साल की सजा या आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा सकती है, और भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही

आजीवन कारावास की सजा मिलने का मतलब है कि व्यक्ति के शेष प्राकृतिक जीवन के लिए कारावास की सजा होगी.. और मृत्यु तक अपराधी जेल में ही रहेगा। दूसरी उपधारा कहती है कि गैंगरेप की पीड़िता अगर कोई नाबालिग है तो ऐसे मामलों में आरोपी के खिलाफ और सख्ती से सजा का फैसला होगा। उपधारा 2 में प्रत्येक आरोपी को अपराध की संगीनता और पीड़िता की स्थिति को देख कर आजीवन कारावास या फिर सजा ए मौत की सजा सुनाई जा सकती है। इसके अलावा पीड़िता के चिकित्सा व्यय और पुनर्वास के लिए आरोपियों पर जुर्माना लगा कर वसूला जायेगा और उसे पीड़िता की मदद के लिए दिये जाने का प्रावधान है।

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छोटी बच्चियों के साथ होने वाले यौन शोषण

वहीं धारा 65 में बताया गया है 16 साल से कम उम्र की लड़कियों जिसे नाबालिग के रूप में परिभाषित किया जाता है, उनके साथ होने वाले बलात्कार के अपराधों में अब से बीएनएस की धारा 65 के अनुसार सजा की कार्यवाही की जायेगी। इसमे 12 साल की कम उम्र की बच्चियों के साथ अपराध तो औऱ संगीन माने जाते है। कोर्ट मानता है कि छोटी बच्चियों के साथ होने वाले यौन शोषण के मामले ज्यादा संवेदनशील है। धारा 65 एक गैर-जमानती धारा है। यानि कि इस अपराध के आरोपी को जमानत  नहीं मिल सकती है। वहीं इसमे भी दो अपधाराओ को शामिल किया गया है।

क्या कहती है उपधाराए

पहली उपधारा के अनुसार 16 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ दुष्कर्म होता है तो कम से कम 20 साल की सजा से लेकर आजीवन कारावास की कठोर कारावास की सजा सुनाई जा सकती है, औऱ दोषी को भारी जुर्माना देना होगा।

दूसरी उपधारा कहती है कि अगर पीड़िता 12 साल से कम्र उम्र की है तो अपराधी को आजीवन कारावास से लेकर मृत्युदंड तक की सजा सुनाई जा सकती है, और भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।

धारा 65 जिस भी अपराधी पर लगाया जाता है, तब पुलिस के पास ये अधिकार होता है कि वो बिना वारंट के आरोपी को गिरफ्तार कर सकते है। गैर जमानती अपराध होने के कारण अगर पीड़िता ने आरोपी की शिनाख्त कर ली है तो कार्यवाही पूरी होने तक अपराधी को जेल में ही रहना होगा। नई कानूनी प्रक्रिया से सजा के प्रावधानों में पारदर्शिता आई है, जिससे पीड़िता को जल्द से जल्द न्याय मिलने के चांसेस बढ़ गए है।

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