Tamil Nadu news: हाल ही में तमिलनाडु से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ पुलिस हिरासत में लिए गए एक दलित युवक को इतनी बेरहमी से प्रताड़ित किया गया कि उसकी मौत हो गई; तब से ही मृतक के लिए न्याय की मांग की जा रही है। इतना ही नहीं लगभग 101 दिन बीत जाने के युवक का अंतिम संस्कार किया गया है। जिसके बाद से प्रशासन पर न्याय को लेकर सवाल उठ रागे है।
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101 दिन बाद दलित युवक का हुआ अंतिम संस्कार
जब दलितों को न्याय दिलाने की बात आती है, तो इसमें सालों लग जाते हैं और अक्सर उन्हें सही न्याय नहीं मिल पाता; प्रशासन भी खामोश रहता है। ऐसा ही कुछ मामला तमिलनाडु (Tamil Nadu) के मदुरै (Madurai) से है, जहां आखिरकार पुलिस कस्टडी में टॉर्चर के कारण मारे गए दलित युवक आकाश का 101 दिन के बाद अंतिम संस्कार कर दिया गया।
जिंदा रहते हुए जो दलित होने के कारण जो शारीरिक टॉर्चर झेलना पड़ा वो काफी नहीं था.. जो मरने के बाद भी एक शव को 101 दिनों तक केवल अंतिम संस्कार का इंतजार करना पड़ा। दिल को झरझोर कर रख देने वाला ये दृश्य मदुरै के एक विद्युत शवदाह गृह में देखने को मिला.. जब मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश के बाद आकाश के शव का अंतिम संस्कार किया गया।
पुलिस ने मारपीट के मामले में गिरफ्तार किया
बता दें कि इसी साल 6 मार्च को शिवगंगा जिले (Sivaganga district) के मानामदुरै (Manamadurai) के रहने वाले आकाश को पुलिस ने मारपीट के एक मामले में गिरफ्तार किया था, लेकिन पुलिस कस्टडी में टॉर्चर के कारण उसे गंभीर चोटे आई थी, जिसे खुद आकाश ने जिला मजिस्ट्रेट के सामने कबूल किया था, लेकिन 8 मार्च को मदुरै के सरकारी राजाजी अस्पताल आकाश की मौत हो गई..जब पोस्टमार्टम हुआ तो शरीर पर लगभग 28 चोटों के निशान मिले, जिससे उससे परिजन काफी नाराज हो गए.. उन्होंने विरोध प्रदर्शन किया।
मामले की जांच सीबी-सीआईडी को सौंपी
जिसके बाद 9 मार्च को जांच सीबी-सीआईडी (CB-CID) को सौँपा गया औऱ 6 पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया गया था। लेकिन वहीं दूसरी तरफ परिवार वालों ने शव लेने से इंकार कर दिया था, जिसके बाद करीब 3 महीने से ज्यादा बीतने के बाद 15 जून को कोर्ट ने आदेश दिया कि अगर शव नहीं लिया जाता तो उसका अंतिम संस्कार कर दिया जाये। पुलिस प्रशासन की निगरानी में शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया लेकिन हैरानी की बात है कि अब तक आरोपी पुलिस वालों को सजा नहीं हुई। अब देखना ये होगा कि पीड़ित परिवार को आखिर कब तक न्याय मिलेगा।



