Top 5 Dalit news: गुजरात के अमरेली में दलित युवक की हत्या, मुफ्त का खाना बर्बाद करने पर लगाया था जुर्माना

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Top 5 Dalit news: बाबा साहब ने दलितो के सम्मान के लिए ऐसे संविधान का निर्माण किया, जहां आर्थिक और सामाजिक तौर पर मजबूती दें, लेकिन तब भी दलितों की स्थिति बहुत दयनीय है, वहीं पड़ोसी देश में दलितों के सम्मान के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाये गए है। हैरानी की बात है कि करीब 33 प्रतिशत दलित वोटर्स होते हुए भी उनकी स्थिति में कोई सुधार लाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया जाता। तो चलिए आपको इस लेख में  पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बतायेंगे, जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है।

नेपाल की सरकार ने दलितो के लिए लागू किया बिल

1, दलितों से जुड़ा पहला मामला भारत के ही पड़ोसी देश नेपाल से है. जहां दलितों के अधिकारों के लिए जो भी ऐतिहासिक बदलाव हो रहा है उसके लिए भारत में भी बहस जारी है। दलितों से माफी मांगने की घोषणा करके पहले ही भारत सरकार की किरकिरी करने वाले नेपाल के पीएम बालेन शाह ने अब नेपाल के लुंबिनी में दलित समुदाय की आजीविका और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए एक बिल पास कर दिया है.. जिससे दलित समुदाय में खुशी की माहौल है, दलितों को समान अधिकार मिले, और भेदभाव करने वालों को सख्त सजा।

नेपाल की सरकार ने पूरी तरह से इस कानून को सख्ती से पास करने के लिए कमर कस ली है.. लेकिन हैरानी की बात है कि भारत में एससी एसटी एक्ट बना हुआ है, दलितो के साथ भेदभाव करना गैर जमानती अपराध की श्रैणी में डाला गया है लेकिन क्या इससे दलितों की स्थिति में सुधार हुआ.. नहीं… यहां तक कि उनकी स्थिति तो आये दिन और बद से बदतर होती जा रही है… तो क्या अब जरूरी नहीं कि सरकार को इस मुद्दे पर नेपाल की ही तरह मंथन करना चाहिए कि आखिर कमी कहां रह रही है.. क्यों नहीं रोक पा रहे है दलितो के खिलाफ अपराध। जब तक दलितों को उनकी ही समुदाय के खिलाफ इस्तेमाल किया जायेगा.. तब तक न तो उत्पीड़न रूकेगा न ही अपराध।

हजारीबाग में दलित महिला को 38 घंटे तक थाने में रखा

2, दलितों से जुड़ा अगला मामला झारखंड के हजारी बाग से है, जहां एक दलित महिला को पहले सादी वर्दी में पहुंच कर सरकारी नोटिस का डर दिखा कर गाली गलौच की गई, लेकिन जब महिला ने इसका विरोध किया तो उसे और उसके 2 साल के मासूम बच्चे को थाने में बंद करके 38 घंटो तक प्रताड़ित किया गया। ये घटना हजारीबाग के  मुफ्फसिल थाना क्षेत्र का है, पीड़िता ने पुलिस की इस बर्बरता की कहानी को सांसद मनीष जायसवाल के सामने सुनाई है।

पीड़िता के साथ कई ग्रामीण भी थे। पीड़िता ने बताया कि केवल नोटिस देने आये पुलिस कर्मियों ने अपनी वर्दी का रसूख दिखाने के लिए दलित महिला के साथ अमानवीय व्यवहार किया.. जब कि अभी हाल ही में नए एसपी अमन कुमार की नियुक्ति हुई है।  ऐस में अब उनके द्वारा संचालित पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे है।

सांसद मनीष जायसवाल ने पीड़िता को आश्वासन दिया है कि आरोपी पुलिस वालो को बख्शा नहीं जायेगा.. इतनी ही नहीं उन्होंने खुद डीआईजी अंजनी झा से मुलाकात करके मामले मे सख्त से सख्त कार्यवाई करने की मांग की है। हैरानी की बात है दलित महिला को 38 घंटे तक थाने में रखा जाता है, उसे टॉर्चर किया जाता है.. वो भी एक नोटिक का विरोध करने पर.. आखिर कहां है कानून औऱ किस काम के है कानून के रखवाले।

लखनऊ में शिक्षक भर्ती घोटाला की आग बढ़ी

3, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के लखनऊ से है, जहां दलित पिछड़ा समाज अब हाथों में झाड़ू और गले में मटका लेकर विरोध करने में लगा है.. और इस विरोध का कारण है 69000 शिक्षक भर्ती आरक्षण घोटाला। यूपी में शिक्षक भर्ती घोटाला में OBC,SC के 18000 सीटों का घोटाला करने की खबर सामने आने के बाद से ही दलितों औऱ पिछड़े समाज के लोगो में काफी रोष है। लोगो ने दलितों की सदियों पुरानी स्थिति को कॉपी करते हुए विरोध प्रदर्शन करना शुरु कर दिया है।

इस विरोध प्रदर्शन का एक वीडियो भी काफी वायरल हो रहा है, जिसमें पीड़ित अभ्यर्थी अपने गले में मटका टांगकर और हाथ में झाड़ू लेकर.. अपनी व्यथा कहते हुए कहा रहा है कि यहीं उनका भविष्य है। वो आगे यहीं करेंगे। यहां तक की सीएम योगी आदित्यानाथ पर भी निशाना साधते हुए कहा कि योगी सरकार में यही दलितों पिछड़ों का भविष्य है।

बता दें कि 2024 में शिक्षक भर्ती घोटाले का भंडाफोड़ होने के बाद से इलाहाबाद हाईकोर्ट की डबल बेंच ने अगस्त 2024 में इस भर्ती की पुरानी मेरिट लिस्ट को रद्द कर नई लिस्ट बनाने के आदेश तो दिये थे लेकिन अभी तक OBC,SC के लिए कोई फैसला न होने पर उनका गुस्सा फूट पड़ा है, अब देखना ये होगा कि क्या सरकार वाकई में दलितो को इस स्थिति में देखना चाहती है या फिर उनके लिए कोई न्याय करेगा। वैसे 2 साल तो गुजर गए.. अब और कितना इंतजार करना होगा।

गुजरात के अमरेली में दलित युवक की हत्या

4, दलितों से जुड़ा अगला गुजरात के अमरेली से है, जहां मुप्त का खाना बर्बाद करने पर जातिवादी दबंगो ने दलित युवक को इतनी बुरी तरह से पीटा की उस युवक की मौत ही हो गई। ये घटना 17 अप्रैल की है, जब दलित युवक महेश प्रेमजी राठौड़ अपने बुजुर्ग चाचा की देखभाल करने के लिए शांताबा जनरल अस्पताल गया हुआ था, जहां अस्पताल के पीछ एक संस्था द्वारा चलाई जा रही एक चैरिटी किचन में में खाना खाने गया लेकिन उसकी तबियत खराब होने लगी जिससे उससे खाना पूरा नहीं खाया, मगर संस्था के प्रमुख भरत आचार्य ने महेश पर दवाब बनाया कि वो पूरा खाना खाये नही तो 50 रूपय जुर्माना दें, महेश ने 500 रूपय आगे बढ़ा दिये तो आचार्य ने महेश के जाति और गांव के बारे में पूछा, लेकिन जब महेश ने बताया कि वो दलित जाति से है।

तो आचार्य भड़क गये औऱ उनके लोगो ने महेश पर पाइप से हमला कर दिया… गंभीर हालात में उसे ट्रामा सेंटर भर्ती कराया गया .. इलाज के बाद वो 20 अप्रैल को डिस्चार्ज होने वाला था, लेकिन सिर में लगी चोट के कारण उसे बार बार चक्कर आ रहे थे.. इसी दौरान वो गिर पड़ा और उसकी मौत हो गई। इस घटना में 7 लोगो के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है लेकिन पुलिस ने अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया है।

वहीं मुकेश परिवार वालो ने शव लेने से इंकार करते हुए जल्द  से जल्द आरोपियो की गिरफ्तारी की मांग की है, वहीं पुलिस आगे की कार्यवाई के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। जिसके बाद आरोपियों पर हत्या की धारा भी जोड़ी जायेगी। हैरानी की बात है जो संस्था सबके लिए है वहां एक दलित जाति का व्यक्ति खाने गया तो उसके साथ आखिर ये बर्बरता क्यों?

आगरा में दलित परिवारों को मिला 18 साल बाद न्याय

5, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के आगरा से है, जहां आखिरकार 18 साल पुराने मामले में कोर्ट ने एक आरोपी को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है, वैसे भारत की कानून व्यवस्था कितनी लचर औऱ सुस्त है ये उसका भी अच्छा नमूना है। बता दें कि ये मामला साल 2008 का है, जब करकल्ली  नाम के एक दलित पीड़ित ने तहरीर दी थी कि प्रधानी के चुनाव में खड़ा होने के कारण गांव के कुछ लोगो ने उसके साथ जातिगत दुश्मनी रख ली थी, 29 अप्रैल 2008 को  गांव के ही कुछ लोगो ने पीड़ित पर लाठी, डंडे और तमंचे से हमला कर दिया था, ताकि वो गांव से भाग जाये, साथ कई दलित परिवारों के घरों में आग लगा दी गई।

जातिवादी आतंकियों के डर से गांव के कई दलित परवारों ने गांव ही छोड़ दिया.. वहीं ये मामला तब से कोर्ट में लंबित था, लेकिन आखिरकार 18 साल बाद विशेष न्यायालय एससी-एसटी एक्ट शिव कुमार ने मलपुरा निवासी भोला  को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 25 हजार रूपय का जुर्माना भी लगाया है। और एक की मौत हो गई साथ ही बाकि के आरोपियों को बरी कर दिया गया। शायद इसे ही कहते है देर आये दुरुस्त आये।

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