350 BNS in Hindi: अक्सर हम किसी उत्पाद पर बने निशानों को देखकर ही यह तय नहीं कर पाते कि वह असली है या नकली; हालाँकि, आज के बाज़ार में, सामान वाले कंटेनर (कार्टन, पैकेज) पर गलत निशान लगाना या गलत मार्किंग के साथ बेचे जा रहे हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि किसी के असली मार्क की नक़ल करके या उसका इस्तेमाल करके अगर सामान बेचा तो क्या होगा? और ऐसे मामले में BNS का कौन सा सेक्शन लागू होता है और ऐसे मामले में किस तरह की सज़ा होगी? तो चलिए हम आपको बताते हैं, अगर ऐसा किया जाता है तो भारतीय न्याय संहिता (BNS) का सेक्शन 350 लागू होता है। तो चलिए इस लेख में आपको बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सज़ा का प्रावधान है और BNS में इसके बारे में क्या कहा गया है।
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धारा 350 क्या कहती है? BNS Section 350 in Hindi
आज के समय में, टेक्नोलॉजी का दुरूपयोग इतना ज्यादा बढ़ गया है कि ऑनलाइन धोखाधड़ी से लेकर नकली सर्टिफिकेट, मार्क बनान मिटाना तो बाएं हाथ का खेल बन गया है। लेकिन पकडे जाने पर कड़ी सजा भी होती है… वही जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस (BNS) की धारा 350 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं।
भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 350 यह सेक्शन उस व्यक्ति पर लागू होता है, जो जानबुझकर ऐसे माल को बेचता है या फिर बेचने के बिक्री के लिए दिखता है, जिस पर कोई जाली संपत्ति चिह्न लगा हो। जिससे किसी भी सरकारी कर्मचारी या व्यक्ति को यह विश्वास हो जाता है कि कंटेनर में रखा सामान असल में वह नहीं है (या उसकी क्वालिटी अलग है)।
BNS section 350 important points
- अगर आरोपी यह साबित कर देता है कि उसने धोखा देने के इरादे से काम नहीं किया, तो वह इस सेक्शन के तहत दोषी नहीं होगा।
BNS section 350 example
मान लीजिए आप बाज़ार जाते हैं, और कोई दुकानदार आपको एक ऐसी चीज़ दिखाता है जिस पर किसी कंपनी का नकली निशान बना होता है, और वह उसे आपको असली बताकर बेच देता है; अगर बाद में आपको पता चलता है कि वह चीज़ असल में नकली है—तो फिर मामले की जाँच होती है और दोषी पाए जाने पर उस दूकानदार को इस धारा के तहत सजा सकती है।
बीएनएस धारा 350 की और सजा
इसके अलावा, BNS की धारा 350 यह तब लागू होती है, जब कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी ऐसे सामना को बेचता जिस पर नकली मार्क लगा होता है। तो इस सेक्शन के तहत दोषी पाए जाने पर आरोपी को crime करने पर 3 साल की कैद और जुर्माना होता है। या फिर दोनों होते है…आपको बता दें, यह एक गैर-संज्ञेय (non-cognizable) अपराध है, इसलिए पुलिस को जाँच के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति चाहिए होती है। इस अपराध में जमानत मिलना भी काफी मुश्किल हैं। वही पुलिस इस अपराध के लिए बिना वारंट के भी आरोपी को गिरफ्तार कर लेती है।



