संघर्ष की मिसाल कलिता मांझी, दूसरों के घरों में बर्तन मांजने वाली महिला कैसे बनी राजनीति की धुरंधर?

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Kalita Majhi BJP:  पश्चिम बंगाल के इतिहास में 4 मई का तारीख हमेशा एक ऐतिहासिक दिवस के तौर पर दर्ज किया जाएगा। जब करीब 15 सालों से ममता बनर्जी की पार्टी का जंगल राज का सफाया करके आखिरकार बीजेपी ने बंगाल में सत्ता पर सेंध लगा ही दी। बीजेपी ने यहां भी दलित, पिछड़ा कार्ड खेला, और ये काम भी कर गया, टीएमसी का सूपड़ा साफ हो गया, लेकिन सवाल ये है कि आखिर हर बार tmc से करारी शिकस्त खाने वाली बीजेपी ने इतनी बड़ी जीत कैसे हासिल कर ली।। तो जवाब है कुछ ऐसे लोग, जिन्हें कल तक कोई जानता तक नहीं था इलाकों बीजेपी ने उन्हें हीरो बना दिया।

बीजेपी की विराट जीत का एक सूत्रधार बनी दलित जाति से आने वाले , घर घर काम करके अपना और परिवार का पेट पालने वाली, कलिता मांझी। जिन्होंने न केवल बीजेपी के लिए चुनाव लड़ा बल्कि एक बड़ी जीत भी दर्ज की। अपने इस लेख में हम कलिता मांझी के बारे में जानेंगे , कैसे घर घर नौकरानी का काम करने वाली कलिता मांझी बन गई जनता के दिलों की महारानी। और किसे दी इन्होंने मुंह तोड़ पटखनी।

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सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को करारी शिकस्त दी

4 मई को बंगाल में बहुत बड़ा बदलाव हुआ और करीब 15 सालों के संघर्ष और इंतजार के बाद टीएमसी के अभेद किले में बीजेपी ने सेंध लगाते हुए बंगाल के  294 सदस्यीय विधानसभा सीटों में से 206 सीटें जीतकर दो-तिहाई से ज्यादा बहुमत हासिल कर विराट जीत दर्ज की, वहीं टीएमसी 79 सीटों पर सिमट कर रह गईं। हैरानी की बात है कि इस बार खुद बंगाल की सीएम ममता बनर्जी भी अपनी सीट नहीं बचा पाई और भावानीपुर सीट से बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 15,105 वोटों से करारी शिकस्त दी। 1972 के बाद पहली बार हुआ है जब केंद्र औऱ राज्य मे एक ही पार्टी की सरकार बनेगी… बीजेपी जो हर चुनाव में काफी संघर्ष करती रही थी।

कलिता मांझी के राजनीति में आने के पीछे का संघर्ष

इस बार उसने अपने कैंडीडेट्स में उन गरीब पिछड़े कमजोर लोगो को उम्मीदवार बनाया, जिनकी लोकप्रियता उन इलाकों में थी.. कलिता मांझी भी एक ऐसी ही उम्मीदवार थी, जिन्होंने बीजेपी के लिए औसग्राम सीट से न केवल चुनाव लड़ा बल्कि टीएमसी के उम्मीदवार को 12,500 से ज्यादा वोटों से हराकर एक नया इतिहास रच दिया है। कलिता मांझी जो कल तक घर घर में झाड़ू पोछा करती थी.. जिनका सपना केवल इतना था कि वो अपने घर को संवारे, अपने बच्चों को एक बेहतर भविष्य दें.. उनकी जिंदगी वैसे ही चल रही थी लेकिन बीजेपी ने उनकी जिंदगी ही बदल दी।

बीजेपी ने उन्हें न केवल टिकट दिया बल्कि उन्हें कॉमन से खास भी बना दिया। कलिता मांझी की कहानी वैसे तो आम है, जो गुस्कारा नगर पालिका की रहने वाली है और दूसरों के घरों में बर्तन मांजकर महीने के महज 2,500 से 4500 कमाती थीं.. कलिता माझी की शादी साल 2006 में हुई थी उन के पति सुब्रत माझी पेशे से एक प्लंबर हैं और दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करते हैं।

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बीजेपी ने दिया योगदान दिया पति ने दी हिम्मत

उनका एक बेटा है पार्थ.. दोनो पति पत्नि अपने बच्चे को एक बेहतर भविष्य देने के लिए दिन रात एक करके काम करते है। कलिता के पति ने कलिता के राजनीति में आने के फैसले का समर्थन किया और बीजेपी पर भरोसा दिखाया.. उन्होंने अभावों के बाद भी चुनाव प्रचार में दिन रात एक कर दिया.. कलिता के सर जीत का ताज पहनाने में जितनी बीजेपी ने योगदान दिया उतना ही उनके पति की हिम्मत ने। जनता ने कलिता की सच्चाई देखी.. उनके इरादे को सलाम किया औऱ उन्हें औसग्राम जैसे क्षेत्र, जहां टीएमसी का राजनीतिक प्रभाव काफी रहा है.. मांझी ने 1,07,692 वोट हासिल कर अपने प्रतिद्वंदी श्यामा प्रसन्ना लोहार को 12,535 वोटों के अंतर से हराया है।

जनता के वोट ने बनाया खास

हालांकि कलिता 2021 में भी बीजेपी के लिए चुनाव लड़ा था लेकिन तब तृणमूल कांग्रेस के अभेदानंद थंडर से 11,815 वोटों से हार गई थी मगर बीजेपी ने उन पर से अपना विश्वास नही खोया.. बीजेपी जानती थी कि कलिता ही इस अभेद किले में सेंध लगा सकती है.. और आखिरकार यहीं हुआ..  वहां से कलिता को जिता कर साबित कर दिया कि चाहे कोई कितना भी गुंडा राज स्थापित कर लें, लेकिन भारत आज भी लोकतंत्र देश है और यहां जीत लोकतंत्र की ही होगी। जनता के वोट की ताकत ने आखिरकार कलिता मांझी जैसी आम औरत को भी खास बना दिया। बंगाल में कलिता माझी की जीत.. बंगाल में आने वाले बड़े सामाजिक बदलाव का संकेत है।

हालांकि विधायक बनने के बाद भी कलिता ने अपनी सादगी नहीं छोड़ी .. वो रोज की तरह घर आकर अपने कामों में जुट गई.. कलिता को राजनीति में आने की प्रेरणा पीएम नरेंद्र मोदी से मिली.. वो उनके भाषणों से काफी प्रभावित हुई बीजेपी से जुड़ने का सपना देखने लगी थी.. जिसे खुद बीजेपी ने पूरा किया। आपको जानकर हैरानी होगी कि कलिता के पास शपथ ग्रहण समारोह में जाने के लिए एक अच्छी साड़ी तक नहीं है.. जिसे उन्हें उनकी मालकिन  कृष्णा पात्रा ने उपहार में दिया जहां वो पिछले 20 सालो से काम करती है।

कलिता की जीत पर बेंगलुरु से बीजेपी सांसद पी. सी. मोहन ने भी कलिता को बधाई देते हुए कहा कि यह बीजेपी की शक्ति है, जहाँ एक साधारण नागरिक भी आगे बढ़कर ऐसी प्रेरणादायक कहानी लिख सकता है। कलिता जैसी आम महिला की जीत इस बात का सबूत है कि लोकतंत्र की ताकत आज भी बरकरार है। कलिता के हौंसले को हम सलाम करते है।

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