Mahayana Buddhism: बौद्ध धर्म का एक प्रमुख केंद्र चीन.. जो आज के समय में एक तेजी से विकास करने वाला देश है। तरक्की करने की रफ्तार भी कही अधिक है। चीन की जनसंख्या का करीब 4 प्रतिशत जनसंख्या बौदध धर्म को मानती है. जबकि 93 प्रतिशत जनता ऐसी है जो किसी धर्म में विश्वास नहीं करती है और पूरी तरह से नास्तिक है। 1949 में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना के बाद यहां माओं की चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का आधिकारिक दबदबा बढ़ने लगा।
जिन्होंने चीन में होने वाले धार्मिक गतिविधियों और आंदोलन को दमनकारी तरीके से दबा दिये थे.. हैरानी की बात है कि आज चीन एशिया के एक ऐसे देश में गिना जाता है जहां बौद्ध धर्म का सबसे ज्यादा प्रभाव है, लेकिन फिर भी यहां पूजा करने पर रोक लगी हुई है। भारत जैसे देश में बुद्ध जहां भगवान की तरह पूजे जाते है वहीं चीन में उस पर रोक क्यों है। अपने इस वीडियो में हम जानेंगे कि आखिर क्यों चीन में नास्तिक लोग ज्यादा है।
चीन की संस्कृति किसे सिनिसाइजेशन कहा जाता है?
दरअसल 1949 में जब चीन का तख्तापलट हुआ तब कम्युनिस्ट सरकार ने चीन की धार्मिक और धर्म से जुड़ी गतिविधियो पर नियंत्रण करना शुरू कर दिया। चीन की साम्यवाद सरकार ये मानती है कि धर्म साम्यवादी विचारधारा के खिलाफ है। धर्म असल में अँधविश्वास को जन्म देता है, और ये एक विदेशी सांस्कृतिक साम्राज्यवाद की नीति का हिस्सा है। सीसीपी पार्टी आधिकारिक रूप से नास्तिक है। उनका मानना है कि धर्म के कारण लोगो की निष्ठा सीसीपी की विचारधारा से भटक सकती है।
सरकार धार्मिक गतिविधियों पर खुद कंट्रोल करती है। जिसमें खासकर इसाई, इस्लाम, के साथ बाकि के विदेशी धर्म शामिल है। सीसीपी का मानना है कि वहां रहने वाले हर व्यक्ति चीनी संस्कृति के अनुसार की फॉलो होने चाहिए। जैसे वहां मुसलमानों को बुरका पहनने और पुरुषो को दाढ़ी बढ़ाने की इजाजत नहीं है। चीन की संस्कृति जिसे सिनिसाइजेशन कहा जाता है, चीन का हर व्यक्ति इसी संस्कृति को फॉलो करें। चीन की सरकार की आज्ञा के बिना कोई धार्मिक कार्यक्रम या स्थल का निर्माण नहीं कर सकता है। और जो धार्मिक कार्यक्रम करता भी है जो उस पर पूरी नजर रखी जाती है। जिसे सरकार मान्यता देगी वहां धार्मिक गतिविधियों को मान्यता मिलेगी। सभी धार्मिक गुरुओ और उनकी धार्मिक प्रथाओं को पहले चीन की सरकार से अनुमति लेनी होगी तभी वो धर्म का पालन कर सकते है।
नही होती बुद्ध की पूजा
एक बौद्ध देश होते हुए भी चीन में बुद्ध को पूजा नहीं जाता है बल्कि चीन के लोग बुद्ध की उस विचारधारा को फॉलो करते है जिसके अनुसार बुद्ध के साधारण व्यक्ति थे जिन्होंने तप के बल पर बुद्धत्व को प्राप्त किया था, वो कोई देवता नहीं थे। बुद्ध ने खुद को कभी भगवान या देवता नही माना. वो खुद के ऐसा व्यक्ति मानते थे जिन्होंने अज्ञानता को हरा कर सत्य को जान लिया है, जो लोगो को सत्य के मार्ग दिखाते है. वो असल में व्यक्ति को जागरूक करने वाले एक दूत थे। जिसके कारण लोग बुध्द की विचारधारा को तो फॉलो करते है, उनके आगे नतमस्तक होते है लेकिन वो भक्ति भाव से ज्यादा सम्मान भाव से होता है। इसलिए वहां बुद्ध को भगवान नहीं बल्कि एक राह प्रशस्त करने वाले दिव्य आत्मा की तरह ही समझा जाता है।
परंपरा में जमीन आसमान का अंतर
वहीं भारत हो या चीन दोन देशों में महायान परंपरा को फॉलो किया जाता है, लेकिन दोनो परंपरा में जमीन आसमान का अंतर है। भारतीय महायान दार्शनिक और तात्विक विचारों पर चलता है तो वहीं चीन में प्रेक्टिकल एक्टिवीटिज और स्थानीय परंपराओं को साथ लेकर चलते है। भारत में बुद्ध के बताये शून्यता के विश्लेशन पर क्रेदित है, जहां तर्क और दर्शन महात्वपूर्ण माना गया है तो वहीं चीन में भारतीय नीतियो में स्थानीय चीनी परंपरा को भी जोड़ा गया है। जिसमें कन्फ्यूशियसवाद (Confucianism) और दाओवाद (Daoism) मुख्य रूप से जुड़ा हुआ है। चीन में धार्मिक कर्म कांड और भक्ति की राह पकड़ कर बुद्दधत्व को प्राप्त करने के बजाय व्यावहारिक रूप से ध्यान केंद्र करके ही साधना करने की सीख दी जाती है।
चीन में आज भी भिक्षुणियों को बहुत सम्मान दिया जाता है लेकिन भारत में महिला भिक्षुणियों के सम्मान में कमी के कारण महिलाओ ने भिक्षुणी बनना छोड़ दिया। चीन का महायान व्यक्ति को दया और भक्ति के एक साथ चलने के व्यावहारिक ज्ञान और मार्ग पर बेस्ड है तो वहीं भारत का महायान शून्यता के दार्शनिक रास्ते पर ले जाने का काम करता है। जो आपको लोगो से मोह माया से मुक्त कराता है। चीन में बौद्ध धर्म को लोग पूजते नहीं है बल्कि उनकी विचारधारा का सम्मान करते है। बौद्ध धर्म के प्रभाव के कारण चीन में बौद्ध धर्म को प्रमाणिक धर्म माना गया है. जिसे सरकार भी पूरी मान्यता देती है।
चीन में धर्म न मानने का कारण?
लेकिन उसके भी अपने नियन है। चीन में धर्म न मानने के कारण ही शायद आज वो इतनी तेजी से विकसित होने वाला देश है. क्योंकि जहां धर्म नहीं है वहां भेदभाव भी नही है। सबको सामाजिक सम्मान मिलता है.. जो काबिल है उन्हें मौका मिलता है.. जिसे सरकार भी पूरा समर्थन देती है। देश को एक धारे में पिरोने के लिए राष्ट्रपति शी जिन पिंग ने न केवल धार्मिक विचारधारा पर बल्कि अस्थिरता न हो इसलिए तीनो प्रुखख सेना के पद भी राष्ट्रपति के पास ही है। जिससे सेना भी पूरी तरह से उनके कंट्रोल में है। इससे चीन की हर एक गतिविधि पर उनकी नजर है। धर्म हो या राजनीति.. सभी जगह सरकार नियंत्रण करती है। आपको हमारी ये वीडियो कैसी लगी हमें कमेंट करके जरूर बतायें।



