353 BNS in Hindi: कई बार हम अपने आस-पास ऐसी खबरें या अफवाहें सुनते हैं जो झूठी होती हैं और लोगों को परेशान करने या उनमें डर पैदा करने के लिए होती हैं, जिससे आस-पास रहने वाले लोगों की शांति भंग होती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा करने पर सज़ा भी हो सकती है और ऐसे में BNS का कौन सा सेक्शन लागू होता है और किस तरह की सज़ा दी जाएगी? तो चलिए हम आपको बताते हैं, अगर ऐसा किया जाता है तो भारतीय न्याय सहिंता (BNS) का सेक्शन 353′ लागू होता है। तो चलिए इस आर्टिकल में जानते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सज़ा का प्रावधान है और BNS में इसके बारे में क्या कहा गया है।
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धारा 353 क्या कहती है? BNS Section 353 in Hindi
आज के समय में, टेक्नोलॉजी का दुरूपयोग इतना ज्यादा बढ़ गया है कि ऑनलाइन मेसेज करके लोगो को धमकाया, डराया जाता है लेकिन पकडे जाने पर कड़ी सजा भी होती है… वही जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस (BNS) की धारा 353 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं।भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 353 यह सेक्शन उस व्यक्ति पर लागू होता है, जो जान-बूझकर किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के ज़रिए झूठी खबरें फैलता हैं, जिससे लोगों में तनाव, गुस्सा और नफ़रत पैदा होती है।
BNS section 353 important points
- आपको बता दें, भारतीय न्याय सहिंता (BNS) 2023 का सेक्शन 353 पहले IPC सेक्शन 505 था।
- यह सेक्शन मुख्य रूप से “क्रिमिनल इंटिमिडेशन” के अपराध और उसकी सज़ा से जुड़ा है।
BNS section 353 example
यह सेक्शन उन लोगों पर भी लागू होता है जो ऐसे बयान देते हैं या खबरें फैलाते हैं जिनसे जनता में डर पैदा होता है या अलग-अलग समुदायों के बीच दुश्मनी/नफरत बढ़ती है। साथ ही, ऐसे बयान जो सेना के लोगों को बगावत करने या अपनी ड्यूटी से बचने के लिए उकसाते हैं, वे भी लागू होते हैं। ऐसी स्थिति में, जब मामले की जाँच की जाती है, यदि व्यक्ति दोषी पाया जाता है, तो उसे इस धारा के तहत सज़ा मिल सकती है।
बीएनएस धारा 353 की और सजा
इसके अलावा, BNS की धारा 353 यह तब लागू होती है, जब कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी को शांति भंग करने के लिए झूठी खबरें फैलता हैं। तो इस सेक्शन के तहत दोषी पाए जाने पर आरोपी को crime करने पर 3 साल की कैद और जुर्माना होता है। या फिर दोनों होते है…इतना ही नहीं, अगर ऐसा काम किसी पूजा की जगह पर किया जाता है तो सज़ा 5 साल तक बढ़ सकती है। आपको बता दें, यह एक गैर-संज्ञेय (non-cognizable) अपराध है, इसलिए पुलिस को जाँच के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति चाहिए होती है। इस अपराध में जमानत मिलना भी काफी मुश्किल हैं। वही पुलिस इस अपराध के लिए बिना वारंट के भी आरोपी को गिरफ्तार कर लेती है।



