क्या है सीआरपीसी (CRPC)? जानिए इसका इतिहास और बुनियादी ढांचा

CRPC, What is Crpc
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CRPC section: सीआरपीसी (CRPC) अधिनियम यानि की कोड ऑफ क्रिमीनल प्रोसीजर 1973 अथवा दंड प्रक्रिया सहिंता कहते है। जो कि संविधान निर्माण के समय नहीं बल्कि सन 1973 में इसका प्रस्ताव लाया गया था और 25 जनवरी 1974 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद सीआरपीसी को 1 अप्रैल 1974 को पूरे देश में लागू किया गया था। इसमें कुल अपराध की 2 दो सूची और फार्म संख्या 56 है। सीआरपीसी (CRPC) में कुल 37 अध्याय है और 484 धाराओं को शामिल किया गया था।

इसे संविधान की धारा 21 के तहत तैयार किया गया था। सीआरपीसी में अपराधिक मामलों और जातिय मामलों की प्रक्रिया का विवरण है। इसमें किये गए अपराधों के लिए अपराधियों की गिरफ्तारी करने का प्रोसीजर, इंन्वेस्टिगेशन, सबूत को जुटाने की प्रक्रिया, कोर्ट के ट्रायल का प्रोसीजर को विस्तारपूर्वक बताया है।

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CRPC में कितनी धारा है?

हालांकि 1 जुलाई 2024 के बाद अब इसे सीआरपीसी की धाराये कहने के बजाये बीएनएसएस यानि की भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के नाम से जाना जाता है। जिसमें कुछ बड़े बदलाव भी किए गए है, इसके तहत अब से जिन अपराधों में 7 साल या उससे ज्यादा समय की सजा का प्रावधान है, उन अपराधों में साक्ष्य फॉरेंसिंक विश्षज्ञों द्वारा अपराध स्थल पर जांच की जायेगी और उनकी वीडियोग्राफी भी की जायेगी। अब से कार्यवाही और पूछताछ इलेक्ट्रोनिक्स माध्यम से भी की जा सकेगी..साथ ही पुलिस की घटनास्थल पर कार्यवाई की जांच की ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य कर दी गई।

किसी भी पुलिस स्टेशन में जीरो एफआईआर

पीड़ित देश के किसी भी पुलिस स्टेशन में जीरो एफआईआर दर्ज करा सकता है, वहीं पुलिस को 90 दिनों के अंदर पुलिस को मजिस्ट्रेट के सामने रिपोर्ट देनी होगी.. वहीं बीएनएसएस के नए नियमों के कारण अब से अपराधी गिरफ्तार हो या न हो, उसकी अनुपस्थिति में भी कोर्ट को ये अधिकार दिया गया कि वो उस पर सुनवाई कर सकते है, और सुनवाई के बाद सजा का फैसला भी सुना सकते है। वहीं इलेक्ट्रोनिक्स या डिजिटल रिकॉर्ड जिसमें ईमेल, ऑडियो वीडियो फाइल्स, जैसे दस्तावेजों को भी साक्ष्य के तौर पर स्वीकार किया जायेगा।

सीआरपीसी की तुलना में बीएनएसएस में 39 अध्याय, 2 अनूसूचियां और 531 खंड है। यानि की सीआरपीसी में जहां 484 धारायें हुआ करती थी वहीं बीएनएसएस को पुनर्गठित करते इसकी 177 प्रावधानों में बदलाव किया गया और इसमें अब कुछ 531 धारायें है। बीएनएसएस में 9 नई धाराओं को जोड़ा गया और 39 नई उपधाराओं को जोड़ा गया है। औपनिवेशिक काल से चली आ रही सीआरपीसी को और ज्यादा कड़ा और मजबूत करने के लिए भारत सरकार ने जो बदलाव किए, उससे इसकी पहचान बदल गई है। जहां ये धीरे चलने वाली प्रक्रिया थी वहीं बीएनएसएस एक आधुनिक और भारत की न्याय प्रक्रिया में ज्यादा तेजी लाने के लिए तैयार की गई प्रणाली है।

हालांकि सरकार ने ये भी साफ कर दिया है कि 1 जुलाई 2024 के बाद हुए अपराधों में ही नई बीएनएसएस की धारायें जोड़ी जायेगी, उससे पहले के हुए अपराधों में सीआरपीसी की धाराओ के आधार पर ही कानूनी प्रक्रिया चलेगी, और सजा भी उसके आधार पर ही होगी.. इसलिए फिलहाल वकीलो को दोनो धाराओं को ध्यान में रख कर काम करना है। लेकिन बीएनएसएस कई सरकार का उठाया क्रांतिकारी कदम है, जो देश में सुस्त हो चुकी न्याय व्यवस्था को जरूर गति देगा।

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