BNS Section 347: किसी और के प्रॉपर्टी मार्क का इस्तेमाल अब पड़ेगा भारी, जानें क्या है नया कानून

BNS Section 347 in Hindi, BNS Section 347
Source: Google

347 BNS in Hindi: अक्सर चल संपत्ति के बारे में खबरें आती हैं कि कोई व्यक्ति उस पर लगे निशान के साथ छेड़छाड़ करता है या उस पर लगे मार्क की सेम टू सेम कॉपी करके उसे नकली बना लेता है। तो क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसे मामले में BNS का कौन सा सेक्शन लागू होता है और ऐसे मामले में किस तरह की सज़ा होगी? तो चलिए हम आपको बताते हैं, अगर ऐसा किया जाता है तो भारतीय न्याय संहिता (BNS) का सेक्शन 347लागू होता है। तो चलिए इस लेख में आपको बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सज़ा का प्रावधान है और BNS में इसके बारे में क्या कहा गया है।

Also Read: BNS Section 342: जाली मुहर या नकली सील रखना अब पड़ेगा भारी, हो सकती है उम्रकैद

धारा 347 क्या कहती है? BNS Section 347 in Hindi

आज के समय में, टेक्नोलॉजी का दुरूपयोग इतना ज्यादा बढ़ गया है कि ऑनलाइन धोखाधड़ी से लेकर नकली सर्टिफिकेट बनान मिटाना तो बाएं हाथ का खेल बन गया है। लेकिन पकडे जाने पर कड़ी सजा भी होती है… वही जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस (BNS) की धारा 347 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 347 यह सेक्शन उस व्यक्ति पर लागू होता है, जो कोई व्यक्ति किसी ऐसे संपत्ति चिह्न की जालसाज़ी करता है, जिसका उपयोग वर्तमान में कोई अन्य व्यक्ति कर रहा है और उसकी नकली कॉपी बना कर उपयोग करता है।

Also Read: BNS Section 341: जालसाजी के लिए नकली मुहर या प्लेट बनाना अब पड़ेगा भारी, हो सकती है उम्रकैद

BNS section 347 important points 

  • यह ध्यान देने योग्य है कि इस अनुभाग का उद्देश्य उन चिह्नों के दुरुपयोग और जालसाज़ी को रोकना है, जो संपत्ति के स्वामित्व और गुणवत्ता को दर्शाते हैं।
  • जो कोई भी किसी लोक सेवक द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले किसी संपत्ति चिह्न, या किसी अन्य चिह्न की जालसाज़ी करेगा, उसे पकड़े जाने पर एक वर्ष के कारावास की सज़ा दी जाएगी।

बीएनएस धारा 347 की और सजा

इसके अलावा, BNS की धारा 347  यह तब लागू होती है, जब कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी के प्रॉपर्टी मार्क की नक़ल करता है और जालसाजी करता है। तो इस सेक्शन के तहत दोषी पाए जाने पर आरोपी को crime करने पर 1 साल की कैद और जुर्माना होता है। आपको बता दें, यह एक गैर-संज्ञेय (non-cognizable) अपराध है, इसलिए पुलिस को जाँच के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति चाहिए होती है। इस अपराध में जमानत मिलना भी काफी मुश्किल हैं। वही पुलिस इस अपराध के लिए बिना वारंट के भी आरोपी को गिरफ्तार कर लेती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *