Karnataka news: हाल ही में कर्नाटक से BJP MP तेजस्वी सूर्या को लेकर एक खबर सामने आई है, जिसमें उन्होंने दलित समुदाय के साथ हो रहे भेदभाव को लेकर कर्नाटक सरकार सिद्धारमैया पर निशाना साधा है।
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तेजस्वी सूर्या सरकार ने पर साधा निशाना
पिछले कुछ समय से विपक्षी पार्टी के नेता कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार पर निशाना साध रहे हैं, कभी दलितों को लेकर, कभी दलितों को दी गई ज़मीन को लेकर, तो कभी किसी योजना को लेकर। तो वही एक बार कर्नाटक से खबर आ रही है, जहां सरकार पर फिर से दलितो और पिछड़ो की अनदेखी करने का संगीन आरोप लगा है।
दरअसल कर्नाटक सरकार ने अल्पसंख्यक बस्तियों के विकास से लिए 600 करोड़ रुपये के योजना की स्वीकृति दी है लेकिन इस मामले में बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या (BJP MP Tejasvi Surya) सरकार पर निशाना साधते हुए पूछा कि आखिर सरकार ने किस आधार पर गरीब और वंचितो के लिए आवंटित करने वाले फंड को केवल धर्म पर आधारित अल्पसंख्यक बस्तियों के लिए आवंटित कर दिया है।
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धर्म के आधार पर भेदभाव कानूनन अपराध
आखिर जमीनी स्तर का विकास धर्म से कब से जुड़ने लगा। सड़के, नालियां, गलियां मोहल्ले तो सबका है। लेकिन केवल कुछ विशेष क्षेत्रों को चुन कर उनके विकास के लिए फंड देना कहां का न्याय है। ये धर्म आधारिक पैकेज क्या संविधान के अनुच्छेद 14 औऱ 15 का अपमान नहीं है। जिसके अनुसार धर्म के आधार पर भेदभाव कानूनन अपराध है तो क्या कर्नाटक की सरकार संविधान से भी बढ़ कर है। इतना ही नहीं उन्होंने आगे कहा, “अगर असली मकसद पिछड़े इलाकों का विकास करना है, तो गरीब हिंदुओं, दलितों, SC/ST, OBC और दूसरी कम विकसित बस्तियों को एक ही फ्रेमवर्क में बराबर कवर करने के बजाय धर्म के हिसाब से स्कीम क्यों बनाई गईं?”
क्या इसमें कमजोर, दलित पिछड़े हिंदू शामिल नहीं होने चाहिए। सरकार ऐसा करके केवल धार्मिक अलगाव को बढ़ावा दे रहा है। कर्नाटक सरकार का रवैया दलितो के प्रति काफी उदासीन रहा है, ऐसे में विशेष समुदाय को ये सौगात देकर कहीं उन्होंने दलितों की नाराजगी और तो नहीं बढ़ा दी है। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि एक संविधान के तहत समान नागरिकता को बढ़ावा देने के बजाय, क्या यह धार्मिक अलगाव को संस्थागत नहीं बना रहा है?



