Damoh news: हाल ही में, मध्य प्रदेश के दमोह से एक बेहद शर्मनाक घटना सामने आई है, जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। वहाँ जातिवादी मानसिकता रखने वाले कुछ लोगों ने एक दलित बारात पर अचानक हमला कर दिया; उन्होंने ज़बरदस्ती दिव्यांग दलित दूल्हे को उसके घोड़े से नीचे खींच लिया और जातिसूचक गालियाँ देकर उसे अपमानित किया। इसके अलावा, आरोपियों ने बारात में आये लोगो के साथ बदसलूकी भी की वही मामले की सूचना मिलते ही पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही है.
दिव्यांग दूल्हे को घोड़ी से उतारा!
आज भी हमारे देश में किसी का दूल्हा बनकर घोड़ी पर चढ़ना अपराध है, जी हां, मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के दमोह (Damoh) से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने प्रशासन के दावों की पोल खोल दी है, दरअसल, यह मामला दमोह के हटा थाना क्षेत्र के बिजोरी पाठक गांव से सामने आया है, दिव्यांग दलित दूल्हा ‘गोलू’ अपनी बारात लेकर बक्सवाहा (Buxwaha) जा रहा था, लेकिन जैसे ही बारात लोधी समाज के मोहल्ले में पहुँची, तो वहां मौजूद कुछ लोगों को ये नागवार गुज़रा, जिसके बाद दबंगों ने न केवल बारात रोकी, बल्कि दिव्यांग दूल्हे को घोड़ी से उतारकर उसके साथ मारपीट और बदसलूकी की.
मध्य प्रदेश के दमोह में घोड़ी से उतारकर दबंगों ने दिव्यांग दूल्हे को पीटा और बारातियों पर भांजी लाठियां, दंबगों द्वारा दूल्हा बने दिव्यांग दलित को न केवल घोड़ी से उतारा गया, बल्कि मारपीट कर उसे अपमानित भी किया गया…#MadhyaPradesh #Famoh #dalit #DalitNews #MPNews #BheemSena pic.twitter.com/qvjSosxx6k
— Bheem Sena (@BheemsenaBheem) April 22, 2026
आरोपियों के खिलाफ SC-ST एक्ट के तहत केस दर्ज
अपमान से आहत दलित समाज के लोग बारात लेकर सीधे थाने पहुँचे, पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों पर SC-ST एक्ट सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज किया है, एहतियातन गांव में पुलिस बल तैनात किया गया, जिसके बाद कड़ी सुरक्षा के बीच बारात बूढ़ी सेमरा गाँव (Budhi Semra Village) के लिए आगे बढ़ सकी… वही मीडिया मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार हटा थाना प्रभारी सुधीर कुमार बेगी के बताया कि, इस गांव में ऐसे विवाद पहले भी हो चुके हैं, पिछली बार भीम आर्मी के हस्तक्षेप के बाद रछवाई निकली थी, सवाल ये है कि आखिर बार-बार प्रशासन की नाक के नीचे ऐसी घटनाएं क्यों हो रही हैं? क्या पुलिस का खौफ खत्म हो चुका है.. कानून अपना काम कर रहा है, लेकिन समाज की ये मानसिकता कब बदलेगी? ये अब भी सोचने वाली बात है.



