Nepal Dalit Rights Law: हाल ही में, नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेन शाह (PM Balen shah) के बारे में एक खबर सामने आई है। अपनी सरकार बनाते ही, बालेन शाह ने दलित समुदाय से माफी मांगी थी। वही एक ऐसा कदम जिसने पड़ोसी देशों में राजनीतिक चर्चा को काफी गरमा दिया। यह मामला अभी पूरी तरह से शांत भी नहीं हुआ था कि लुम्बिनी ने दलित अधिकारों से संबंधित एक बिल पारित करके इतिहास रच दिया, और ऐसा करने वाला नेपाल का पहला प्रांत बन गया।
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दलित अधिकारों पर लुम्बिनी ने रचा इतिहास
चाहे कोई भी देश क्यों न हो दलितों को साथ सदियों से अन्याय होता ही रहा है। आज भी समाज में दलितों की स्थिति को समान नहीं माना जाता है। उनको आज भी अपनी आजीविका के लिए दुसरे पर निर्भर रहना पड़ता है। तथापि, इन सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए, नेपाल में दलित समुदाय के लिए एक बिल पारित किया गया है। जी हाँ, भारत के ही पड़ोसी देश नेपाल से खबर सामने आई है। जहां दलितों के अधिकारों के लिए जो भी ऐतिहासिक बदलाव हो रहा है उसके लिए भारत में भी बहस जारी है। दलितों से माफी मांगने की घोषणा करके पहले ही भारत सरकार की किरकिरी करने वाले नेपाल के पीएम बालेन शाह ने अब नेपाल के लुंबिनी में दलित समुदाय की आजीविका और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए एक बिल पास कर दिया है।
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दलितों को समान अधिकार मिले
जिससे दलित समुदाय में खुशी की माहौल है, दलितों को समान अधिकार मिले, और भेदभाव करने वालों को सख्त सजा.. नेपाल की सरकार ने पूरी तरह से इस कानून को सख्ती से पास करने के लिए कमर कस ली है.. लेकिन हैरानी की बात है कि भारत में एससी एसटी एक्ट (SC/ST Act) बना हुआ है, दलितो के साथ भेदभाव करना गैर जमानती अपराध की श्रैणी में डाला गया है लेकिन क्या इससे दलितों की स्थिति में सुधार हुआ.. नहीं… यहां तक कि उनकी स्थिति तो आये दिन और बद से बदतर होती जा रही है।
तो क्या अब जरूरी नहीं कि सरकार को इस मुद्दे पर नेपाल की ही तरह मंथन करना चाहिए कि आखिर कमी कहां रह रही है.. क्यों नहीं रोक पा रहे है दलितो के खिलाफ अपराध। जब तक दलितों को उनकी ही समुदाय के खिलाफ इस्तेमाल किया जायेगा.. तब तक न तो उत्पीड़न रूकेगा न ही अपराध। आपकी इस पर क्या राय है.. सरकार को क्या करना चाहिए?



