Women’s Reservation Bill में कोटे के भीतर कोटा, और स्वतंत्र अधिकार की मांग पर अड़े चंद्रशेखर आजाद

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Women’s Reservation Bill: हाल ही में  भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद को लेकर एक खबर सामने आई है, जिन्होंने बाबा साहब की राह पर चलते हुए  आज़ाद ने ‘सेपरेट इलेक्टोरेट’ यानि की अलग निर्वाचक मंडल की मांग शुरु कर दी है। उनकी इस मांग को लेकर सियासी बवाल शुरू हो गया है. वही कुछ लोग इसे पाकिस्तान के राष्ट्रपिता जिन्ना की मांग से कंपेयर कर रहे हैं।

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दलितों के लिए सेपरेट इलेक्टोरेट

काफी समय से, महिलाओं के लिए आरक्षण से जुड़ा एक प्रस्ताव लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों में लंबित है; हालाँकि, लोकसभा में इसे अभी तक पारित नहीं किया गया है। फिर भी, इस प्रस्ताव के चलते देश भर की कई राजनीतिक पार्टियाँ आगे आई हैं और सरकार पर दबाव बना रही हैं। वही आज़ाद समाज पार्टी (Azad Samaj Party) के प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद (Chandrashekhar Azad) के एक बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। चंद्रशेखर (Chandrashekhar Azad) बाबा साहब (Baba Saheb) के कदमों पर चलते हुए अब उन्होंने भी देश में ‘सेपरेट इलेक्टोरेट’ यानि की अलग निर्वाचक मंडल की मांग शुरु कर दी है। जिसका मतलब ये है कि जहाँ दलित उमीदवार खड़े हो और वोट देने का अधिकार भी सिर्फ दलित वोटर्स को हो।

उन्होंने साथ में ये भी कहा कि बाबा साहब (Baba Saheb) भी चाहते थे कि दलितो के सम्मान और उनकी समस्याओ को सुलझाने के लिए अलग निर्वाचन मंडल होना चाहिए, लेकिन तब वो महात्मा गांधी के कारण सफल नहीं हो सकें थे, लेकिन अब परिसीमन विधेयक को लागू करने की बात पर आजाद ने अलग निर्वाचन क्षेत्र की मांग रख दी है।

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पूना पैक्ट के कारण दलितो की शक्ति छीन ली

उन्होंने कहा कि इससे केवल  दलित उम्मीदवार ही खड़ें होंगे और उन्हें ही वोट करने का अधिकार होगा.. इतना ही नहीं उन्होंने संसद में अपने विचार प्रस्तुत करते हुए चंद्रशेखर आज़ाद ने दलितों, पिछड़े वर्गों और मुसलमानों के प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था के तहत, दलित प्रतिनिधि अपने समुदाय के प्रति कम और अपनी राजनीतिक पार्टियों के प्रति अधिक वफ़ादार रहते हैं। इस मांग का एक अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वो साफ कह रहे है कि जब तक स्वतंत्र प्रतिनीधि चुनने का अधिकार नहीं होगा.. तब तक असली सशक्तिकरण नहीं हो सकता.. सच तो ये है कि पूना पैक्ट के कारण दलितो की शक्ति छीन ली गई है।

राष्ट्रपिता जिन्ना की मांग से कंपेयर

आजाद की मांग को पाकिस्तान की राष्ट्रपिता जिन्ना की मांग से कंपेयर किया जा रहा है जब 1916 में उन्होंने मुसलमानो के अलग निर्वाचन क्षेत्र मांगा था और आखिरकार देश का विभाजन हो गया था। आजाद इस मांग पर काफी ट्रोल हो रहे है. कुछ लोग तो ये भी आरोप लगा रहे है कि आजाद देश को फिर से बांटना चाहते है, लेकिन जरा सोचिये जिस मांग को खुद संविधान निर्माता बाबा साहब ने रखा था क्या वो बांटने वाली मानसिकता से प्रेरित थी..वहीं आजाद की ये मांग कहां तक सही है।

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